2 अगस्त को 100 साल का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण, जब दोपहर में हो जाएगी रात, ये 5 चरण मचाएंगे त
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Total Solar Eclipse 2 August: 2 अगस्त को आसमान में सदी का सबसे बड़ा नज़ारा दिखने वाला है, जब 100 साल का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण दिन के उजाले को दोपहर में ही रात जैसा अंधेरा बना देगा. खगोलविदों के मुताबिक यह दुर्लभ खगोलीय घटना 5 अहम चरणों में पूरी होगी, जो ना सिर्फ वैज्ञानिकों बल्कि आम लोगों के लिए भी रोमांच और हैरानी का कारण बनेगी. देश-दुनिया की नज़रें इस ऐतिहासिक ग्रहण पर टिकी हैं.
Total Solar Eclipse 2 August: दुनिया 2 अगस्त 2027 को एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना की गवाह बनने जा रही है. इस दिन 100 साल में सबसे लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा, जिसकी अधिकतम अवधि 6 मिनट 23 सेकेंड बताई जा रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार इतनी लंबी अवधि का पूर्ण सूर्यग्रहण बेहद कम देखने को मिलता है. इससे पहले 29 मई 1919 को ऐसा लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण दर्ज किया गया था, जिसने वैज्ञानिक दुनिया में बड़ा इतिहास रचा था. सूर्य ग्रहण को ज्योतिष शास्त्र में बेहद महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है. मान्यता है कि ग्रहण का असर व्यक्ति की राशि, स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और जीवन पर पड़ सकता है. ज्योतिषियों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, इसलिए इस समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
दिन में हो जाएगी रात
खगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि 2027 का यह सूर्यग्रहण यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व के कई हिस्सों में साफ दिखाई देगा. ग्रहण के दौरान कुछ मिनटों के लिए दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा जाएगा. आसमान में तारे दिखाई देने लगेंगे और तापमान में भी अचानक गिरावट महसूस की जा सकती है. इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक और खगोल प्रेमी अभी से तैयारी में जुट गए हैं.
क्यों खास है यह सूर्यग्रहण?
पूर्ण सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य पूरी तरह ढक जाता है. 2 अगस्त 2027 का ग्रहण इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि इसकी अवधि सामान्य सूर्यग्रहणों की तुलना में काफी लंबी होगी. आमतौर पर पूर्ण सूर्यग्रहण कुछ मिनटों तक ही रहता है, लेकिन इस बार यह 6 मिनट 23 सेकेंड तक रहेगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह ग्रहण पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की विशेष स्थिति के कारण इतना लंबा दिखाई देगा. इस दौरान सूर्य का चमकदार बाहरी भाग यानी कोरोना भी साफ देखा जा सकेगा, जिसे सामान्य दिनों में देख पाना संभव नहीं होता.
अब 22वीं सदी में दिखेगा ग्रहण
नासा की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2 अगस्त 2027 को सदी का सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने वाला है. यह ग्रहण 100 साल में लगने वाला सबसे लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. इस ग्रहण की अधिकतम अवधि 6 मिनट 23 सेकेंड की रहने वाली है. इससे पहले ऐसा सूर्य ग्रहण 29 मई 1919 में देखने को मिला था. अब 2 अगस्त के बाद ऐसा पूर्ण सूर्य ग्रहण 22वीं सदी में यानी साल 2114 में देखने को मिलने वाला है.
2026 में लगने वाला सूर्य ग्रहण
साल 2026 के सूर्य ग्रहण की बात करें तो इस साल दो सूर्य ग्रहण घटित होने वाले हैं. पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को बीत चुका है और दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगने वाला है. साल 2027 में भी दो सूर्य ग्रहण होने वाले हैं. पहला ग्रहण 6 फरवरी को वलायकार सूर्य ग्रहण होगा, जबकि 2 अगस्त को सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण होगा.
सूर्यग्रहण के पांच चरण
खगोल विज्ञान में पूर्ण सूर्यग्रहण को पांच चरणों में बांटा जाता है और हर चरण का अपना अलग महत्व होता है.
पहला चरण – आंशिक ग्रहण की शुरुआत
इस चरण में चंद्रमा धीरे-धीरे सूर्य के सामने आना शुरू करता है. सूर्य का छोटा हिस्सा ढकता दिखाई देता है.
दूसरा चरण – पूर्ण ग्रहण से ठीक पहले
जैसे-जैसे चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढकने के करीब पहुंचता है, आसमान का रंग बदलने लगता है और रोशनी कम हो जाती है.
तीसरा चरण – पूर्ण सूर्यग्रहण
यह सबसे खास क्षण होता है, जब सूर्य पूरी तरह चंद्रमा से ढक जाता है. कुछ मिनटों के लिए दिन में अंधेरा छा जाता है और सूर्य का कोरोना दिखाई देता है.
चौथा चरण – पूर्ण ग्रहण समाप्ति
चंद्रमा धीरे-धीरे सूर्य के सामने से हटने लगता है और रोशनी वापस लौटने लगती है.
पांचवां चरण – ग्रहण का अंत
इस चरण में चंद्रमा पूरी तरह सूर्य से हट जाता है और सूर्य सामान्य रूप में दिखाई देने लगता है.
ग्रहण काल में क्या करें?
ग्रहण काल में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है. कई लोग इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र या गायत्री मंत्र का जाप करते हैं. गर्भवती महिलाओं को खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि उन्हें ग्रहण के समय बाहर नहीं निकलना चाहिए और नुकीली चीजों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.
ग्रहण काल में क्या ना करें?
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान भोजन बनाना और खाना भी शुभ नहीं माना जाता. ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करके घर की शुद्धि करने की परंपरा है. हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन भारत में आज भी इससे जुड़ी धार्मिक और ज्योतिष मान्यताओं का विशेष महत्व बना हुआ है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


