सालों बाद ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा पर अद्भुत महासंयोग, सिर्फ 1 छोटा सा दान और जप चमका द
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Jyeshtha Adhik Maas Purnima 2026: ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा पर इस बार एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद शुभ माना जा रहा है. मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर किए गए दान, जप और धार्मिक अनुष्ठान से भाग्य प्रबल होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. पंडितों के अनुसार, सही विधि से पूजा और सत्कर्म करने पर नकारात्मकता दूर होकर जीवन में सकारात्मक बदलाव की सम्भावना बढ़ जाती है.
Jyeshtha Adhik Maas Purnima 2026: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है, इस बार ज्येष्ठ अधिकमास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 31 मई दिन रविवार को है. मान्यता है कि इस तिथि पर किया गया दान, जप, और व्रत अन्य पूर्णिमाओं की तुलना में कई गुना अधिक कल्याणकारी माना जाता है. पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि अधिकमास का आगमन हर तीन साल में केवल एक बार होता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, पवित्र नदियों में स्नान और दान करने का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है. आइए जानते हैं ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा का महत्व, पूजा विधि और किन चीजों का दान करें..
ज्येष्ठ पूर्णिमा पर दुर्लभ संयोग
ज्येष्ठ पूर्णिमा शिव और सिद्ध नामक शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. इस शुभ दिन पर मंगल के स्वराशि में होने से रूचक राजयोग बन रहा है. साथ ही शुक्र और बुध ग्रह एक राशि में होने से लक्ष्मी नारायण योग भी बन रहा है. इन शुभ संयोग में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करने से हर सुख की प्राप्ति होती है और ग्रहों का शुभ प्रभाव भी मिलता है.
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, शनिवार के दिन सूर्य वृषभ राशि में और चंद्रमा तुला राशि में विराजमान रहेंगे.
ब्रह्म मुहूर्त: 04:03 ए एम से 04:43 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 11:51 ए एम से 12:47 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 07:13 पी एम से 07:33 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:37 पी एम से 03:33 पी एम
निशिता मुहूर्त: 11:58 पी एम से 12:39 ए एम, 1 जून
अधिकमास की पूर्णिमा का महत्व
अधिकमास की पूर्णिमा ‘सर्वसिद्धिदायिनी’ होती है यानी कि यह हर तरह की मनोकामनाओं को सिद्ध करने वाली है. मान्यता है कि इस पावन तिथि पर व्रत रखने, पवित्र नदियों में स्नान करने और अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य करने से साधक को सामान्य दिनों के मुकाबले कई हजार गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. कई लोग सत्यनारायण कथा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं.
ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा पूजा विधि
ज्येष्ठ अधिकमास की पूर्णिमा तिथि भगवान नारायण (विष्णु) को समर्पित है. इस दिन उपवास रखने और सत्यनारायण कथा का पाठ करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है. इस दिन विशेष पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्म स्नान (हो सके, तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें) आदि करने के बाद स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण कर घर के मंदिर पर गंगाजल का छिड़काव कर वहां एक चौकी रखें, जिस पर पीला या फिर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. अब श्री हरि को फूल, फल, चंदन, अक्षत और धूप-दीप और भोग में तुलसी पत्ति जरूर शामिल करें. इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या पढ़ें. साथ ही ‘विष्णु सहस्रनाम’ या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें.
इन चीजों का करें दान
ज्योतिष मान्यताओं के मुताबिक अधिकमास की पूर्णिमा पर किए गए धार्मिक कार्यों का असर लंबे समय तक शुभ फल देने वाला माना जाता है. ज्येष्ठ का महीना होने के कारण गर्मी बहुत होती है, इसलिए अधिकमास की पूर्णिमा पर जल से भरी मटकी (घड़ा), सत्तू, आम, खरबूजा, पंखा, वस्त्र या अन्न का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है. किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर दें. श्रद्धालुओं के लिए यह दिन आध्यात्मिक शांति और पुण्य प्राप्ति का खास अवसर माना जाता है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


