अगस्त की मासिक शिवरात्रि भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी. इस बार भाद्रपद शिवरात्रि पर गुरु पुष्य समेत 3 शुभ योग बनेंगे, जिससे यह शिवरात्रि और भी शुभ फलदायी हो जाएगी. हालांकि भाद्रपद शिवरात्रि पर भद्रा का साया रहेगा. यह भद्रा दोपहर में प्रारंभ होगी, जिसका वास स्थान धरती पर है. धरती की भद्रा में कोई भी शुभ कार्य नहीं करते हैं. इस साल भाद्रपद की शिवरात्रि कब है? भाद्रपद शिवरात्रि का मुहूर्त और योग कौन-कौन से हैं?
भाद्रपद शिवरात्रि की तारीख क्या है?
पंचांग के अनुसार, हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 21 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से प्रारंभ होगी और इस तिथि का समापन 22 अगस्त को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर होगा. ऐसे में भाद्रपद शिवरात्रि 21 अगस्त गुरुवार को मनाई जाएगी.
भाद्रपद शिवरात्रि शुभ मुहूर्त
21 अगस्त को भाद्रपद शिवरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त 44 मिनट तक है. उस दिन शिव पूजा का शुभ समय देर रात 12 बजकर 2 मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक है. भाद्रपद शिवरात्रि की पूजा निशिता काल में की जाएगी. वैसे मासिक शिवरात्रि की पूजा पूरे दिन चलती है.
3 शुभ योग में है भाद्रपद शिवरात्रि
इस साल की भाद्रपद शिवरात्रि 3 शुभ योग में मनाई जाएगी. भाद्रपद शिवरात्रि के दिन गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग बनेंगे. ये तीनों ही शुभ योग भाद्रपद शिवरात्रि को सुबह 05 बजकर 53 मिनट से बनेंगे और देर रात 12 बजकर 8 मिनट तक रहेंगे.
इन तीन शुभ योगों के अलावा उस दिन प्रात:काल में व्यतीपात योग बनेगा, जो शाम को 04 बजकर 14 मिनट तर रहेगा. उसके बाद से वरीयान् योग बनेगा. मासिक शिवरात्रि के दिन पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर देर रात 12 बजकर 8 मिनट तक है, उसके बाद से अश्लेषा नक्षत्र है.
भाद्रपद शिवरात्रि पर भद्रा का साया
भाद्रपद शिवरात्रि के दिन भद्रा का साया है. उस दिन भद्रा का प्रारंभ दोपहर में 12 बजकर 44 मिनट से होगा और देर रात 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. जिन लोगों को भाद्रपद शिवरात्रि पर कोई शुभ कार्य करना है तो वे भद्रा के प्रारंभ से पहले कर लें.
भाद्रपद शिवरात्रि पर शिव वास
भाद्रपद शिवरात्रि के अवसर पर शिव वास भोजन में प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक है, उसके बाद से शिव वास श्मशान में है. जिस दिन शिववास होता है, उस दिन ही रुद्राभिषेक किया जाता है.
भाद्रपद शिवरात्रि का महत्व
भाद्रपद शिवरात्रि के दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं. भगवान भोलेनाथ को गंगाजल से अभिषेक करते हैं. उनको बेलपत्र, भांग, धतूरा, मदार पुष्प, धूप, दीप, फल आदि चढ़ाते हैं. पूजा के समय शिवरात्रि व्रत कथा सुनते हैं. शिवजी की आरती करते हैं. महादेव की कृपा से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती हैं.