Laddu Gopal Chatti Puja 2025 : जन्माष्टमी पर जन्मे कान्हा… माताएं अब कर लें लड्डू गोपाल की छठी की तैयारी, केवल इस चीज का लगाएं भोग
हमारे प्रभु की हो रही है छठी
लड्डू गोपाल की छठी में मथुरा वृंदावन समेत ब्रज के कई मंदिरों को सजाया जाता है. भंडारे किए जाते हैं और ब्रज की महिलाएं भजन कीर्तन और गाना गाती हैं. साथ ही घरों में धार्मिक कार्यक्रम किए जाते हैं क्योंकि हर घर में हमारे कान्हा का जन्म हुआ है. इस दिन घरों में पकवान बनाए जाते हैं और कान्हा की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है. छठी हमेशा बच्चे के जन्म के छह दिन मनाई जाती है, उसी तरह जन्माष्टमी के छठे दिन लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाएगी.
इस दिन मनाएं लड्डू गोपाल की छठी
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीहरि का जन्म हुआ था, ऐसे में छठवे दिन यानी भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी तिथि पर लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाएगी, जिन लोगों ने साल 2025 में 15 अगस्त को कान्हा का व्रत रखते हुए उनका जन्मोत्सव मनाया है वे 21 अगस्त दिन गुरुवार को और जिन्होंने उदया तिथि को आधार मानते हुए 16 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाया था, वे लोग 22 अगस्त दिन शुक्रवार के दिन लड्डू गोपाल की छठी मनाएंगे.
छठी पर लड्डू गोपाल की पूजा विधि
छठी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ सफाई करके स्नान ध्यान करें. साथ ही पूरे घर में गंगाजल से छिड़काव करें. घर के बाहर और आंगन में रंगोली बनाएं. इसके बाद हमारे लड्डू गोपाल की धीरे धीरे बच्चों की तरह उठाएं और उनका पंचामृत से अभिषेक करें. छठी के दिन लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाएं, लेकिन पोशाक चुनते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह पोशान हमारे लड्डू गोपाल का चुभे ना. अभिषेक के बाद फल, फूल, मिठाई, तुलसी के पत्ते आदि चढ़ाएं.
सभी चीजें अर्पित करने के बाद अब नंबर आता है भोग का. लड्डू गोपाल की छठी वाले दिन कढ़ी चावल का भोग अर्पित करें. भोग में तुलसी दल अवश्य डालें, इसके बाद भोग को प्रसाद के तौर पर सभी में बांट दें. छठी पर कढ़ी चावल का भोग लगाने का बड़ा महत्व है, दही, बेसन और हल्के मसालों के साथ कढ़ी बनाएं और भगवान को अर्पित करें, इसके साथ ही माखन मिश्री का भोग भी लगाएं और मोरपंख अर्पित करें. फिर देसी घी के दीपक से शंख व घंटे के साथ आरती करें.
छठी वाले दिन गरीब व जरूरतमंद लोगों को भोजन अवश्य कराएं और दान पुण्य भी अवश्य करें. छठी को एक उत्सव की तरह मनाएं क्योंकि हमारे प्रभु की छठी हो रही है. इसके साथ ही कदंब के पेड़ की टहनी लाकर पूजा स्थल पर रख सकते हैं क्योंकि कृष्णजी को कदंब का पेड़ बड़ा प्रिय है. इसके साथ ही भगवान कृष्ण से जुड़े मंत्रों का जप करें और दिन भर भजन कीर्तन करें. साथ ही शाम के समय भी पूजा अर्चना करें.


