राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से बचना है तो आज ही बदल दें बाथरूम की ये 7 आदतें
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Bathroom Astrology: घर में लगातार पैसों की तंगी बनी रहती है, बिना वजह तनाव बढ़ रहा है या काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं, तो ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इसकी एक वजह घर के कुछ अनदेखे वास्तु दोष भी माने जाते हैं. खासकर बाथरूम को लेकर की गई छोटी-छोटी लापरवाहियां कई बार राहु और केतु के अशुभ प्रभाव को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बाथरूम सिर्फ साफ-सफाई की जगह नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा से जुड़ा अहम हिस्सा भी माना जाता है. ऐसे में यहां होने वाली गलतियां सकारात्मक ऊर्जा को कमजोर कर सकती हैं और आर्थिक स्थिति, मानसिक शांति व पारिवारिक सुख पर असर डाल सकती हैं, अगर आप भी अनजाने में ये गलतियां कर रहे हैं, तो समय रहते इन्हें सुधारना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं बाथरूम से जुड़ी ऐसी 7 वास्तु और ज्योतिषीय गलतियों के बारे में, जिनसे बचने की सलाह दी जाती है.
ज्योतिष में क्यों खास माना जाता है बाथरूम? वास्तु और ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार बाथरूम का संबंध राहु और केतु से जोड़ा जाता है. माना जाता है कि यह स्थान घर की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालने का माध्यम होता है. यदि यहां साफ-सफाई, दिशा या रख-रखाव से जुड़ी लापरवाही हो जाए, तो इसका असर धीरे-धीरे पूरे घर के वातावरण पर पड़ सकता है. यही वजह है कि ज्योतिष विशेषज्ञ बाथरूम से जुड़े कुछ नियमों का पालन करने की सलाह देते हैं.

टूटा हुआ शीशा बढ़ा सकता है नकारात्मक ऊर्जा अगर बाथरूम का शीशा टूट गया है या उसमें दरार आ गई है, तो उसे लंबे समय तक इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार टूटा हुआ दर्पण घर में नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. ऐसा भी माना जाता है कि इससे मानसिक तनाव, रिश्तों में दूरी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए शीशा टूटते ही उसे बदल देना शुभ माना जाता है.

खाली बाल्टी रखना माना जाता है अशुभ पानी से भरी बाल्टी को माना जाता है समृद्धि का प्रतीक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बाथरूम में खाली बाल्टी रखना आर्थिक खालीपन का संकेत माना जाता है. कहा जाता है कि इससे धन आगमन में रुकावट आ सकती है, अगर संभव हो तो बाल्टी में साफ पानी भरकर रखें. यदि पानी भरकर रखना संभव न हो, तो उसे उल्टा करके रखना बेहतर माना जाता है. वहीं नीले रंग की बाल्टी को राहु से जुड़े दोषों को शांत करने वाला और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है.
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नल से लगातार टपकता पानी देता है धन हानि का संकेत पानी का रिसाव माना जाता है आर्थिक नुकसान का प्रतीक वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम का खराब नल या लगातार टपकता पानी सिर्फ पानी की बर्बादी नहीं बल्कि धन हानि का संकेत भी माना जाता है. मान्यता है कि जिस तरह पानी लगातार बहता रहता है, उसी तरह घर का पैसा भी अनावश्यक खर्चों में निकलता रहता है. इसलिए खराब नल को जल्द ठीक करवाने की सलाह दी जाती है.

गीले और गंदे कपड़े देर तक रखना बढ़ा सकता है सूर्य दोष ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बाथरूम में लंबे समय तक गीले या गंदे कपड़े पड़े रहने से सूर्य दोष बढ़ने की संभावना मानी जाती है. मान्यता है कि इससे परिवार के सम्मान, आत्मविश्वास और आपसी संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. बेहतर होगा कि गंदे कपड़ों को तुरंत बाहर रखी लॉन्ड्री बास्केट में डाल दिया जाए.

सीलन और गंदगी को माना जाता है राहु का प्रभाव साफ और सूखा बाथरूम बढ़ाता है सकारात्मक ऊर्जा अगर बाथरूम में हमेशा सीलन, बदबू या गंदगी बनी रहती है, तो वास्तु शास्त्र में इसे राहु के बढ़ते प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है. ऐसी स्थिति मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और घर में नकारात्मक माहौल का कारण मानी जाती है. इसलिए बाथरूम को हमेशा साफ, सूखा और हवादार रखने की सलाह दी जाती है. कई लोग सप्ताह में एक बार नमक मिले पानी से सफाई को भी शुभ मानते हैं.

बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ना नहीं माना जाता शुभ कई लोग इस्तेमाल के बाद बाथरूम का दरवाजा खुला छोड़ देते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में इसे उचित नहीं माना गया है. मान्यता है कि ऐसा करने से बाथरूम की नकारात्मक ऊर्जा पूरे घर में फैल सकती है. इसका असर घर के सदस्यों की तरक्की, मानसिक शांति और पारिवारिक माहौल पर पड़ सकता है. इसलिए हर बार उपयोग के बाद दरवाजा बंद रखने की सलाह दी जाती है.

कमोड की दिशा भी मानी जाती है महत्वपूर्ण वास्तु शास्त्र में दिशाओं का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि बाथरूम के अंदर कमोड की दिशा उत्तर या दक्षिण की ओर होना अधिक शुभ माना जाता है. वहीं पूर्व या पश्चिम दिशा में बनी टॉयलेट सीट को कई ज्योतिष विशेषज्ञ उचित नहीं मानते. कहा जाता है कि गलत दिशा में बना कमोड घर के मुखिया की सेहत, करियर और आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर डाल सकता है. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की ये सभी बातें धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इनका उद्देश्य घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना और ऊर्जा संतुलन पर ध्यान देना माना जाता है. यदि आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, तो मान्यता है कि घर में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बना रह सकता है.


