सावन में घर पर रुद्राभिषेक कैसे करें? जानें पूजा की सही विधि और जरूरी नियम

सावन में घर पर रुद्राभिषेक कैसे करें? जानें पूजा की सही विधि और जरूरी नियम

अंबाला: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है और इस पूरे माह में शिवालयों में जलाभिषेक, कांवड़ यात्रा और रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक अनुष्ठानों की विशेष धूम रहती है. दरअसल, बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों के साथ-साथ अपने घरों में भी रुद्राभिषेक का आयोजन करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले सबसे प्रभावशाली अनुष्ठानों में से एक है, लेकिन इसकी सफलता केवल श्रद्धा पर ही नहीं, बल्कि सही विधि और नियमों के पालन पर भी निर्भर करती है.

बता दें कि यदि पूजा के दौरान कुछ आवश्यक बातों की अनदेखी हो जाए तो अपेक्षित शुभ फल नहीं मिल पाते हैं, क्योंकि शिव पुराण में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है और ‘रुद्र’ भगवान शिव का ही एक स्वरूप है. रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान शिव का जल, दूध या अन्य पवित्र सामग्री से अभिषेक करना. मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया यह अनुष्ठान जीवन की बाधाओं को दूर करने, मानसिक शांति प्रदान करने और घर में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है. यही कारण है कि सावन के दौरान घरों में भी रुद्राभिषेक कराने की परंपरा लगातार बढ़ रही है.

रुद्राभिषेक से पहले घर की सफाई जरूरी

वहीं, इस बारे में लोकल18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि घर में रुद्राभिषेक करने से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करना सबसे पहला नियम है और जिस स्थान पर पूजा होनी है, वहां किसी प्रकार की गंदगी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने बताया कि पूजा स्थल पर स्वच्छ आसन बिछाकर शिवलिंग को उत्तर दिशा की ओर स्थापित करना शुभ माना जाता है, जबकि पूजा करने वाले का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए. यदि दिशा को लेकर कोई भ्रम हो तो किसी योग्य पंडित से मार्गदर्शन लेना बेहतर रहता है.

पति-पत्नी साथ बैठकर लें संकल्प

उन्होंने बताया कि यदि संभव हो तो पति-पत्नी को एक साथ बैठकर रुद्राभिषेक का संकल्प लेना चाहिए. इसके साथ ही अभिषेक के दौरान शृंगी या ऐसे पात्र का उपयोग करना चाहिए, जिससे शिवलिंग पर जल की धारा लगातार बहती रहे. उन्होंने बताया कि अभिषेक जल या दूध दोनों से किया जा सकता है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि जलधारा बीच में टूटनी नहीं चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह निरंतरता पूजा की पूर्णता का प्रतीक मानी जाती है.

रुद्राभिषेक के दौरान तामसिक भोजन से बचें

वहीं, पंडित दीपलाल जयपुरी के अनुसार, जिस घर में रुद्राभिषेक का आयोजन हो रहा हो, वहां पूजा समाप्त होने तक तामसिक भोजन नहीं बनाना चाहिए. इसके साथ ही अनुष्ठान करने वाले दंपति को यथासंभव उपवास रखकर पूरे मन से भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए. इससे पूजा का आध्यात्मिक प्रभाव और अधिक बढ़ता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर करें पूजा

वहीं, रुद्राभिषेक की विधि के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि पूजा वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान शिव का जल से अभिषेक करें. इसके बाद शिवलिंग के समीप कलश स्थापित करें और दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र और पूजा का संकल्प करें. इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए जल या दूध से अभिषेक प्रारंभ करें. इसके बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाकर बेलपत्र, पुष्प, अक्षत, काले तिल, शहद और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें.

आरती और प्रसाद के साथ करें पूजा का समापन

उन्होंने बताया कि अंत में रुद्राभिषेक मंत्रों का जाप, भगवान शिव की आरती और प्रसाद वितरण के साथ पूजा का समापन करें. उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि सावन के पवित्र महीने में नियमपूर्वक किया गया रुद्राभिषेक भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है.

ऐसे में यदि आप भी इस सावन अपने घर में रुद्राभिषेक कराने की योजना बना रहे हैं तो केवल पूजा सामग्री जुटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है. यही सावधानी इस अनुष्ठान को पूर्ण बनाती है और भक्त को उसका शुभ फल प्राप्त करने में सहायक होती है.

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