मौनी अमावस्या पर तर्पण के बाद कर दें यह काम, पितरों की नाराजगी होगी दूर, देंगे आशीर्वाद! जानें इसकी विधि

मौनी अमावस्या पर तर्पण के बाद कर दें यह काम, पितरों की नाराजगी होगी दूर, देंगे आशीर्वाद! जानें इसकी विधि

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान-दान के अलावा पितरों को खुश करने, उनको तृप्त करने का भी एक अच्छा मौका है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पितर धरती पर आते हैं. वे उम्मीद करते हैं कि उनकी संतानें उनको तर्पण, पिंडदान, दान, श्राद्ध आदि से तृप्त कर देंगी. जिसके बाद वे वापस पितृ लोक लौटते हैं. मौनी अमावस्या पर मोक्ष प्रदान करने वाले भगवान विष्णु और देवी गंगा का आशीर्वाद प्रयागराज के संगम में स्नान मात्र से प्राप्त हो जाता है. जो संगम में स्नान के बाद गंगाजल से पितरों का तर्पण करते हैं, उससे उनके पूर्वज तृप्त हो जाते हैं. राजा सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार मां गंगा के स्पर्श से हो गया था, राजा भगीरथ ने गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाने के लिए कठोर तप किया था. 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर जब आप स्नान कर लें, तो अपने पितरों के लिए तर्पण करें. उसके बाद पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृ सूक्तम् का पाठ करें.

कैसे करें पितृ सूक्तम् का पाठ?

  • सबसे पहले पितरों के देवता अर्यमा की पूजा विधिपूर्वक करें. अर्यमा पितृ लोक के राजा और न्यायाधीश हैं. पितरों को तृप्ति देने से पहले इनकी पूजा जरूरी है.
  • इसके बाद कुशा की पवित्री बनाकर अनामिका अंगुली में धारण करें. फिर गंगाजल, फूल और काले तिल लेकर पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण दें. तर्पण का जल कुशा की पवित्री से होकर गिरना चाहिए. कुशा के पोरों से गिरने वाला जल ही पितरों को प्राप्त होता है.
  • तर्पण देने के बाद संस्कृत में लिखे पितृ सूक्तम् का पाठ प्रारंभ करें. पाठ करते समय शब्दों का सही उच्चारण करें. पितरों के देव अर्यमा के पूजन और तर्पण से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं. नाराज पितरों को प्रसन्न करने का यह एक उपाय है. पितृ सूक्तम् नीचे दिया गया है.

पितृ सूक्तम् पाठ

उदिताम् अवर उत्परास उन्मध्यमाः पितरः सोम्यासः।
असुम् यऽ ईयुर-वृका ॠतज्ञास्ते नो ऽवन्तु पितरो हवेषु॥

अंगिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वनो भृगवः सोम्यासः।
तेषां वयम् सुमतो यज्ञियानाम् अपि भद्रे सौमनसे स्याम्॥

ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासो ऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः।
तेभिर यमः सरराणो हवीष्य उशन्न उशद्भिः प्रतिकामम् अत्तु॥

त्वं सोम प्र चिकितो मनीषा त्वं रजिष्ठम् अनु नेषि पंथाम्।
तव प्रणीती पितरो न देवेषु रत्नम् अभजन्त धीराः॥

त्वया हि नः पितरः सोम पूर्वे कर्माणि चक्रुः पवमान धीराः।
वन्वन् अवातः परिधीन् ऽरपोर्णु वीरेभिः अश्वैः मघवा भवा नः॥

त्वं सोम पितृभिः संविदानो ऽनु द्यावा-पृथिवीऽ आ ततन्थ।
तस्मै तऽ इन्दो हविषा विधेम वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥

बर्हिषदः पितरः ऊत्य-र्वागिमा वो हव्या चकृमा जुषध्वम्।
तऽ आगत अवसा शन्तमे नाथा नः शंयोर ऽरपो दधात॥

आहं पितृन्त् सुविदत्रान् ऽअवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः।
बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वः तऽ इहागमिष्ठाः॥

उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु।
तऽ आ गमन्तु तऽ इह श्रुवन्तु अधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥

आ यन्तु नः पितरः सोम्यासो ऽग्निष्वात्ताः पथिभि-र्देवयानैः।
अस्मिन् यज्ञे स्वधया मदन्तो ऽधि ब्रुवन्तु ते ऽवन्तु-अस्मान्॥

अग्निष्वात्ताः पितर एह गच्छत सदःसदः सदत सु-प्रणीतयः।
अत्ता हवींषि प्रयतानि बर्हिष्य-था रयिम् सर्व-वीरं दधातन॥

येऽ अग्निष्वात्ता येऽ अनग्निष्वात्ता मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते।
तेभ्यः स्वराड-सुनीतिम् एताम् यथा-वशं तन्वं कल्पयाति॥

अग्निष्वात्तान् ॠतुमतो हवामहे नाराशं-से सोमपीथं यऽ आशुः।
ते नो विप्रासः सुहवा भवन्तु वयं स्याम पतयो रयीणाम्॥

आच्या जानु दक्षिणतो निषद्य इमम् यज्ञम् अभि गृणीत विश्वे।
मा हिंसिष्ट पितरः केन चिन्नो यद्व आगः पुरूषता कराम॥

आसीनासोऽ अरूणीनाम् उपस्थे रयिम् धत्त दाशुषे मर्त्याय।
पुत्रेभ्यः पितरः तस्य वस्वः प्रयच्छत तऽ इह ऊर्जम् दधात॥

Source link

Previous post

Aaj Ka Tarot Rashifal: मौनी अमावस्या 5 राशिवालों के लिए शुभ, नई जॉब, धन लाभ, वृषभ प्रॉपर्टी विवाद से रहेंगे परेशान! जानें आज का टैरो राशिफल

Next post

Aaj Ka Vrishchik Rashifal: अमावस्या पर बुद्ध बढ़ाएंगे टेंशन, धन योग के बीच शत्रुओं से बचने के लिए करें ये उपाय

You May Have Missed