बच्चों को मां-बाप का प्यार चाहिए, नौकरानी की सेवा नहीं: प्रेमानंद महाराज की सलाह पर बहस क्यों? देखें वीडियो
प्रेमानंद महाराज ने बड़ी सहजता से यह बात कही कि बच्चों को पैसा नहीं, मां-बाप का समय और प्यार चाहिए. उन्होंने कहा, “अगर हम किसी के लिए पैसा कमा रहे हैं, लेकिन उसे अपना समय नहीं दे पा रहे, तो उस पैसे का क्या मतलब?” इस कथन ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या हम अपने बच्चों की ज़रूरतें केवल चीज़ों से पूरी कर सकते हैं, या फिर हमारे साथ की अहमियत कहीं ज़्यादा है.
हालांकि प्रेमानंद महाराज ने करियर छोड़ने की बात नहीं कही, लेकिन उनका ज़ोर इस बात पर था कि माता-पिता को अपने बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखने के लिए सचेत प्रयास करने चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बचपन में बच्चे मां-बाप का स्नेह नहीं पाते, तो बड़े होकर वे वही दूरी बना लेते हैं.
बढ़ती महंगाई, दोहरी कमाई की ज़रूरत और घरों में नौकरों पर बढ़ती निर्भरता ने माता-पिता के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ऐसे में प्रेमानंद महाराज का यह संदेश लोगों को यह याद दिलाता है कि जीवन में पैसा ज़रूरी है, लेकिन अपने बच्चों के लिए हमारी मौजूदगी उससे कहीं ज़्यादा मायने रखती है.


