बच्चों को मां-बाप का प्यार चाहिए, नौकरानी की सेवा नहीं: प्रेमानंद महाराज की सलाह पर बहस क्यों? देखें वीडियो

बच्चों को मां-बाप का प्यार चाहिए, नौकरानी की सेवा नहीं: प्रेमानंद महाराज की सलाह पर बहस क्यों? देखें वीडियो

Premanand Maharaj Advice : हाल ही में आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने बच्चों के पालन-पोषण को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं, जो आज के माता-पिता के दिल को छू गईं. वीडियो में एक पिता अपनी परेशानी साझा करते हैं कि वह और उनकी पत्नी अपनी ढाई साल की बेटी के साथ पर्याप्त समय नहीं बिता पा रहे, जिससे उन्हें लगातार चिंता रहती है. इस पर महाराज ने जो जवाब दिया, उसने न केवल उस पिता को, बल्कि हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया.

प्रेमानंद महाराज ने बड़ी सहजता से यह बात कही कि बच्चों को पैसा नहीं, मां-बाप का समय और प्यार चाहिए. उन्होंने कहा, “अगर हम किसी के लिए पैसा कमा रहे हैं, लेकिन उसे अपना समय नहीं दे पा रहे, तो उस पैसे का क्या मतलब?” इस कथन ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या हम अपने बच्चों की ज़रूरतें केवल चीज़ों से पूरी कर सकते हैं, या फिर हमारे साथ की अहमियत कहीं ज़्यादा है.

एक उपयोगकर्ता ने लिखा, “गुरुजी, ऐसा नहीं है कि कामकाजी महिलाएं अपने बच्चों को प्यार या समय नहीं देतीं. मैं भी नौकरी करती हूं और अपने बच्चों को पूरा समय और स्नेह देती हूं.” यह बात बताती है कि समाज में अब एक नई सोच बन रही है, जहां मां-बाप दोनों घर चलाने और बच्चों की परवरिश में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

हालांकि प्रेमानंद महाराज ने करियर छोड़ने की बात नहीं कही, लेकिन उनका ज़ोर इस बात पर था कि माता-पिता को अपने बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखने के लिए सचेत प्रयास करने चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बचपन में बच्चे मां-बाप का स्नेह नहीं पाते, तो बड़े होकर वे वही दूरी बना लेते हैं.

एक और यूज़र ने लिखा, “अगर हम अपने बच्चों से दोस्त की तरह पेश आएंगे, तो वे भी हर बात हमारे साथ साझा करेंगे. यही रिश्ते की गहराई होती है.” ऐसे कमेंट्स से यह बात स्पष्ट होती है कि आज की पीढ़ी सिर्फ परंपरा नहीं, अनुभव और समझदारी से बच्चों को बड़ा करना चाहती है.

बढ़ती महंगाई, दोहरी कमाई की ज़रूरत और घरों में नौकरों पर बढ़ती निर्भरता ने माता-पिता के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ऐसे में प्रेमानंद महाराज का यह संदेश लोगों को यह याद दिलाता है कि जीवन में पैसा ज़रूरी है, लेकिन अपने बच्चों के लिए हमारी मौजूदगी उससे कहीं ज़्यादा मायने रखती है.

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