अनंत चतुर्दशी हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा की विदाई होती है, इसके साथ ही 10 दिनों के गणेशोत्सव का समापन हो जाता है. इस दिन व्रत रखकर
भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करते हैं. इस साल अनंत चतुर्दशी के दिन रवि योग बन रहा है. हालांकि अनंत चतुर्दशी पर मृत्यु पंचक और भद्रा भी लग रही है. अनंत चतुर्दशी कब है? अनंत चतुर्दशी का मुहूर्त क्या है?
अनंत चतुर्दशी की तारीख
तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव के अनुसार, इस साल अनंत चतुर्दशी की जरूरी तिथि भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी का प्रारंभ 6 सितंबर को तड़के 3 बजकर 12 मिनट पर हो रहा है और यह तिथि अगले दिन 7 सितंबर को मध्य रात्रि 1 बजकर 41 मिनट पर खत्म होगी. उदयातिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर शनिवार को मनाई जाएगी.
अनंत चतुर्दशी शुभ मुहूर्त
6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त प्रात:काल में 6 बजकर 2 मिनट से प्रारंभ हो रहा है, जो अगले दिन 7 सितंबर रविवार को मध्य रात्रि 1 बजकर 41 मिनट तक है. अनंत चतुर्दशी की पूजा के लिए 19 घंटे 39 मिनट का शुभ समय प्राप्त हो रहा है. इस दिन पूजा के बाद गणपत्ति बप्पा की विदाई होगी. लोग विधिपूर्वक गणेश जी का जल में विसर्जन करेंगे.
अनंत चतुर्दशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:30 ए एम से 05:16 ए एम तक है. वहीं उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक है.
रवि योग में अनंत चतुर्दशी
अनंत चतुर्दशी के दिन रवि योग बन रहा है. उस दिन रवि योग सुबह में 06 बजकर 02 मिनट पर बन रहा है, जो रात 10 बजकर 55 मिनट तक रहेगा. रवि योग में सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं. इस दिन अतिगण्ड योग प्रात:काल से लेकर दिन में 11 बजकर 52 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से सुकर्मा योग बनेगा. चतुर्दशी पर धनिष्ठा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 55 मिनट तक है, उसके बाद शतभिषा नक्षत्र है.
मृत्यु पंचक में अनंत चतुर्दशी
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर मृत्यु पंचक लग रहा है, इसे अशुभ माना जाता है. मृत्यु पंचक का प्रारंभ अनंत चतुर्दशी को दिन में 11 बजकर 21 मिनट पर होगा और यह अगले दिन 7 सितंबर रविवार को सुबह 6 बजकर 2 मिनट तक रहेगा. मृत्यु पंचक में कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करते हैं.
अनंत चतुर्दशी की रात लगेगी भद्रा
अनंत चतुर्दशी की मध्य रात्रि में 1 बजकर 41 मिनट से भद्रा लगने वाली है, जो 7 सितंबर को सुबह 6 बजकर 2 मिनट तक रहेगी. इस भद्रा का वास धरती पर होगी. इस वजह से भद्रा में कोई शुभ कार्य नहीं होगा. हालांकि यह रात्रि के समय में होगी.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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