Vat Savitri Vrat 2026 Niyam: वट सावित्री का पहली बार रखना है व्रत, तो जानें 10 नियम

Vat Savitri Vrat 2026 Niyam: वट सावित्री का पहली बार रखना है व्रत, तो जानें 10 नियम

Vat Savitri Vrat 2026 Niyam In Hindi: अखंड सौभाग्य का वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ अमावस्या के दिन रखा जाता है. इस साल वट सावित्री व्रत 16 मई दिन शनिवार को है. पंचांग के अनुसार, वट सावित्री की अमावस्या तिथि 16 मई को 5:11 एएम से लेकर 17 मई को 01:30 एएम तक है. इस दिन सुहागन महिलाएं व्रत रखकर वट वृक्ष, देवी सावित्री और सत्यवान की पूजा करती हैं. इससे उनको अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और दांपत्य जीवन सुखमय होता है. जिन महिलाओं को पहली बार वट सावित्री व्रत रखना है, तो उनको विशेष नियमों का पालन करना चाहिए, तभी आपकी यह व्रत फलित होगा.

वट सावित्री व्रत के नियम

1. पहली बार व्रत रख रही हैं तो आपको वट सावित्री व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. उस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:07 ए एम से 04:48 ए एम तक है.

2. इस दिन व्रती महिलाओं को लाल, पीला या नारंगी रंग के कपड़े पहनने चाहिए. अपनी शादी का जोड़ा या नई साड़ी भी पहन सकती हैं. सोलह श्रृंगार करें.

3. स्नान के करने के बाद वट सावित्री व्रत और पूजा का संकल्प लें. उसके बाद पूजा सामग्री की व्यवस्था कर लें.

पहली बार वट सावित्री व्रत रखने वालों के लिए नियम. (Photo: AI)

4. पूजा सामग्री में बांस का पंखा, कच्चा सूत, भीगे हुए चने, धूप, दीप, गाय का घी, फूल, मौसमी फल, सुहाग सामग्री जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ी आदि, बरगद के फल, सावित्री और सत्यवान की तस्वीर को शामिल करना चाहिए.

5. इस व्रत में वट वृक्ष यानि बरगद के पेड़ की पूजा करते हैं. यह एक देव वृक्ष है, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है.

6. पूजा में सबसे पहले वट वृक्ष की जड़ को जल अर्पित करते हैं. उसके बाद वृक्ष में सूत लपेटते हैं. वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसमें कच्चे सूत को 7, 12, 51 या 108 लपेटना चाहिए.

7. परिक्रमा के समय में अपने पति की लंबी आयु की कामना करें. पूजा के समय चना, फल, फूल आदि अर्पित करते हैं और वट सावित्री व्रत की कथा सुनते हैं. बांस के पंखे से वट वृक्ष और उसके बाद पति को हवा करते हैं.

8. इस व्रत को निर्जला और फलाहार दोनों तरह से रखते हैं. आपसे जो संभव हो या आपके यहां जो प्रचलन हो, उसका पालन करें.

9. कुछ स्थानों पर पूजा के बाद वट वृक्ष की एक कली और एक भीगा चना पानी की मदद से निगलते हैं.

10. पूजा के बाद अपनी सास और परिवार की बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद लेते हैं.

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