Janmashtami Vrat 2025 Paran: जन्माष्टमी का पारण कब करना सही होगा, जानें व्रत खोलने के नियम और संपूर्ण विधि

Janmashtami Vrat 2025 Paran: जन्माष्टमी का पारण कब करना सही होगा, जानें व्रत खोलने के नियम और संपूर्ण विधि

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Janmashtami Vrat 2025 Paran: जन्माष्टमी के व्रत में सभी नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है. जन्माष्टमी व्रत में पारण का विशेष महत्व है, तभी व्रत को पूरा माना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं जन्माष्टमी 2025 म…और पढ़ें

जन्माष्टमी का पारण कब करना सही होगा, जानें व्रत खोलने के नियम और संपूर्ण विधि
Janmashtami Vrat 2025 Paran Sahi Samay: देशभर में धूमधाम से कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन व्रत रखकर विधि विधान के साथ कान्हाजी की पूजा अर्चना करने से सभी कष्टों व परेशानियों से मुक्ति मिलती है और ग्रह-नक्षत्र का शुभ फल प्राप्त होंगे. जन्माष्टमी का व्रत सभी व्रत में सबसे कठीन माना जाता है क्योंकि यह दिन पूरे दिन और रात चलता है. बहुत से लोग तो जन्माष्टमी का निर्जला व्रत भी रखते हैं. अब जानते हैं व्रत समापन यानी पारण का सही समय और विधि क्या है. साथ ही व्रत खोलने के लिए किन नियमों का पालन किया जाता है.

जन्माष्टमी व्रत पारण का महत्व
ज्योतिष एवं पुराणों के अनुसार जन्माष्टमी का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है. यह व्रत करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जन्म-जन्मांतर के बंधन कटते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से भक्त को धन, संतान, आरोग्य और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है और भगवान कृष्ण की कृपा भी बनी रहती है. जन्माष्टमी व्रत करने के बाद पारण करना आवश्यक माना गया है, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है. मान्यता है कि व्रत तोड़ना तभी उचित है, जब अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र दोनों समाप्त हो चुके हैं. हालांकि कई बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन नहीं पाता है, ऐसे में पंचांग को देखने के बाद पारण कर सकते हैं.

जन्माष्टमी पारण के नियम
कई भक्त जन्माष्टमी की मध्यरात्रि यानी रात 12 बजे पूजा अर्चना करने के बाद व्रत खोल लेते हैं. यह तब सही रहता है, जब अष्टमी तिथि अगले दिन तक रहे.
शास्त्रों में बताया गया है कि व्रत हमेशा अष्टमी तिथि के समापन होने के बाद ही करना चाहिए. ऐसे में 16 अगस्त को अष्टमी तिथि का समापन 9 बजकर 34 मिनट समाप्त होती है. आप इस समय व्रत का पारण कर सकते हैं.
कुछ भक्त रोहिणी नक्षत्र के समापन के बाद जन्माष्टमी का व्रत खोलते हैं. ऐसे में साल 2025 में रोहिणी नक्षत्र की ही शुरुआत 17 अगस्त से सुबब 4 बजकर 38 मिनट से हो रही है 16 अगस्त 3 बजकर 17 समाप्त होगा. ऐसे में आप मध्यरात्रि में कान्हा की पूजा करने के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं.

जन्माष्टमी व्रत पारण विधि
जन्माष्टमी व्रत के पारण से पहले भगवान श्रीकृष्ण की फिर से पूजा करें और पंचांमृत या माखन-मिश्री का भोग लगाएं.
माखन-मिश्री, फल या पंजीरी का भोग अर्पित करके ही व्रती को भोजन शुरू करना चाहिए. पहले ब्राह्मण या बालक को भोजन कराएं, उसके बाद स्वयं व्रत खोलें
पारण करने के बाद केवल सात्विक भोजन ग्रहण करें और प्याज, लहसुन या मांसाहार जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें.
पारण करने के बाद दान करें और कृष्णजी को याद करें.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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