Guru Stotram: गुरुवार को करें गुरु स्तोत्र का पाठ, कुंडली का गुरु दोष होगा दूर, मिलेगी बृहस्पति की कृपा

Guru Stotram: गुरुवार को करें गुरु स्तोत्र का पाठ, कुंडली का गुरु दोष होगा दूर, मिलेगी बृहस्पति की कृपा

गुरुवार का दिन देव गुरु बृहस्पति की पूजा का है. इस दिन व्रत रखकर विधि विधान से गुरु की पूजा करते हैं. जिन लोगों की कुंडली में गुरु दोष होता है, उनको यह व्रत करना चाहिए, इससे वह दूर होता है. गुरु दोष को दूर करने के लिए आप गुरुवार को गुरु स्तोत्र पाठ करें. गुरु स्तोत्र में गुरु की महिमा का वर्णन किया गया है. गुरु वंदना में आप जो मंत्र काफी समय से पढ़ते आए हैं, वो मंत्र भी इस गुरु स्तोत्र का हिस्सा है. वह मंत्र है- गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः, गुरुः साक्षात् परम्ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः. यदि आप गुरुवार के दिन गुरु स्तोत्र का पाठ करते हैं तो गुरु दोष में लाभ होगा. कुंडली का गुरु ग्रह मजबूत होगा और आपको शुभ फल प्राप्त होंगे.

गुरु स्तोत्र पाठ

अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जन शलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परम्ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

स्थावरं जङ्गमं व्याप्तं यत्किञ्चित्सचराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

चिन्मयं व्यापियत्सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

सर्वश्रुतिशिरोरत्नसमुद्भासितमूर्तये।
वेदान्ताम्बूजसूर्याय तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

चैतन्यं शाश्वतं शान्तं व्योमातीतं निरंजनं।
नादबिंदु कलातीतं तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

ज्ञानशक्तिसमारूढः तत्त्वमालाविभूषितः।
भुक्ति मुक्ति प्रदाता च तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

अनेकजन्म सम्प्राप्त कर्मबन्धविदाहिने।
आत्मज्ञानप्रदानेन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

न गुरोरधिकं तत्त्वं न गुरोरधिकं तपः।
न गुरोरधिकं ज्ञानं तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

मन्नाथः श्रीजगन्नाथः मद्गुरुः श्रीजगद्गुरुः।
मदात्मा सर्वभूतात्मा तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

गुरुरादिरनादिश्च गुरुः परमदैवतम्।
गुरोः परतरं नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

यत्सत्येन जगत्सर्वं यत्प्रकाशेन भ्रान्तियत।
यदानन्देन नंदैन्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः॥

नित्यशुद्धं निराभासं निराकारं निरंजनं।
नित्यबोधं चिदानन्दम गुरुर्ब्रह्मानमाम्यहम॥

ध्यानमूलं गुरोमूर्ति पूजा मूलं गुरोरपदं।
मंत्र मूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोर्कृपा॥

नमामि श्रीगुरुपादपल्लवम्।
स्मरामि श्रीगुरुनाम निर्मलम्।
पश्यामि श्रीगुरु रूप सुन्दरम्।
श्रृणोमि श्रीगुरु कीर्ति अद्भुतम्॥

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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