Budh Pradosh Vrat 2025: बुध प्रदोष व्रत पर शाम 06:56 से पूजा करना क्यों उत्तम, महादेव संग करें गणपति पूजा
बुध प्रदोष व्रत का महत्व
बुध प्रदोष व्रत को शास्त्रों में बुद्धि, विद्या, वाणी और नौकरी व व्यापार में सफलता प्रदान करने वाला व्रत माना गया है. इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की भी विशेष पूजा का विधान है. यह व्रत विद्यार्थियों, व्यापारियों और वाणी से कार्य करने वालों (वकील, वक्ता, लेखक, शिक्षक आदि) के लिए विशेष फलदायी है. बुध प्रदोष तिथि का व्रत करने से व्रती को धन, विद्या और वाणी पर नियंत्रण की प्राप्ति होती है. साथ ही रोग और कष्ट दूर होते हैं, जीवन में शांति और सौहार्द बढ़ता है.
बुध प्रदोष व्रत 20 अगस्त 2025
हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. बुधवार को पड़ने पर इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. दृक पंचांग के अनुसार, 20 अगस्त को भाद्रपद माह का पहला बुध प्रदोष व्रत मनाया जाएगा. त्रयोदशी तिथि दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से शुरू होकर 21 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक रहेगी.पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 56 मिनट से रात 9 बजकर 7 मिनट तक है. इस दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 2 बजकर 2 मिनट तक रहेगा, जिसमें पूजा नहीं करनी चाहिए.
पौराणिक ग्रंथों में प्रदोष व्रत के पूजन की विधि सरल तरीके से व्याख्यायित है.इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें.पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें और आटा, हल्दी, रोली, चावल, और फूलों से रंगोली बनाकर मंडप तैयार करें.कुश के आसन पर बैठकर भगवान शिव और गणपति की पूजा करें.शिवजी को दूध, जल, दही, शहद, घी से स्नान कराने के बाद बेलपत्र, माला-फूल, इत्र, जनेऊ, अबीर-बुक्का, जौं, गेहूं, काला तिल, शक्कर आदि अर्पित करें.इसके बाद धूप और दीप जलाकर प्रार्थना करें.गणपति को भी पंचामृत से स्नान कराएं और फिर सिंदूर-घी का लेप करें.तिलक लगाने के बाद दूर्वा, मोदक और सुपारी-पान, और माला-फूल चढ़ाएं. विधि-विधान से पूजा-पाठ करने के बाद ओम गं गणपते नम: और ओम नमः शिवाय मंत्रों का जप करें.

बुध प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त
प्रदोष काल (शाम 06:56 से 09:07) में पूजा और कथा का पाठ करना अति उत्तम माना जाता है. संध्या के समय पूजन करने के बाद बुध प्रदोष व्रत कथा भी सुनें. इसके बाद आरती करें और घर के सभी सदस्यों को प्रसाद देकर भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करें. साथ ही ब्राह्मण और जरूरतमंद को अन्न दान करें.दूसरे दिन पारण करना चाहिए.


