Mauni Amavasya 2026 Vrat Niyam: मौनी अमावस्या पर रखना है मौन व्रत, दो तरह के हैं नियम, पहला आसान तो दूसरा है बहुत कठिन, ज्योतिषाचार्य से जानें सही विधि, पारण
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत के नियम और विधि
ज्योतिषाचार्य भट्ट का कहना है कि मौन व्रत रखना कठिन होता है, सभी लोगों के लिए यह आसान काम नहीं है. मौन व्रत रखने का उद्देश्य मानव जीवन की सार्थकता, उच्च चेतनावस्था और आध्यात्मिक विकास को प्राप्त करना है. यह समझना है कि मानव जीवन क्यों प्राप्त हुआ है? लोभ, मद, मोह, काम, क्रोध जैसी नकारात्मकता को स्वयं से दूर करके अपना आत्मिक विकास करना मौन व्रत का उद्देश्य है. पूरे वर्ष आप भौतिक जीवन के भाग-दौड़ में व्यतीत कर देते हैं, मौनी अमावस्या आपको एक ऐसा अवसर प्रदान करता है कि आप शांत चित्त से ईश्वर और स्वयं की खोज कर सकते हैं.
मौन व्रत के दो नियम
काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट.
ज्योतिषाचार्य भट्ट के अनुसार, जो लोग मौन व्रत रखना चाहते हैं, वे जान लें कि मौन व्रत के लिए दो नियम हैं. पहला नियम आसान है, जबकि दूसरा सामान्य लोगों के लिए काफी कठिन हो सकता है.
पहला नियम: मौन व्रत स्नान करने तक रखा जाता है. उठने और स्नान करने तक के बीच के समय में आपको कुछ भी नहीं बोलना होता है. मौन व्रत रखना होता है. स्नान के बाद आप बोलें, हरि का भजन करें.
दूसरा नियम: मौन व्रत का यह नियम पूरे दिन के लिए होता है. व्रत रखने वाला व्यक्ति संकल्प करके मौन व्रत रखता है. वह सुबह उठने से लेकर अगले दिन पारण करने तक मौन रहता है. एक शब्द नहीं बोलता है. यदि आप इस बीच में बोलते हैं तो आपका व्रत टूट जाता है. यह व्रत बिना संकल्प के पूर्ण नहीं होता है. संकल्प करके मौन व्रत करते हैं और वो टूट जाता है तो दोष लगता है.
मौन व्रत की विधि
मौनी अमावस्या से पहली रात यानि 17 जनवरी की रात जब आप सोने जाएं तो इस बात का ध्यान रखें कि 18 जनवरी को सुबह उठने पर कुछ न बोलें. अपनी दैनिक क्रिया करें. स्नान करके सूर्य को अर्घ्य, पितरों को तर्पण दें और दान करें. उसके बाद बोलें. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौन व्रत के बाद जब बोलें तो अपने इष्ट देव का नाम लें या भजन कर लें. यह मौन व्रत उठने से लेकर स्नान करने तक का है.
जो लोग पूरे दिन मौन व्रत रखना चाहते हैं, उनको पहले की प्रक्रिया का पालन करना है. स्नान करने के बाद आप हाथ में जल लेकर मौन व्रत का संकल्प करें. फिर पितरों के लिए तर्पण, दान आदि करें. दिनभर मौन रहें. यह एक कठिन कार्य है, इसके लिए एकांत की आवश्यकता होगी. मौन के समय में आप अपने इष्ट देव के नाम का मानसिक जाप करें. मानसिक जाप में मुंह से शब्द नहीं बोले जाते, मन में जाप करते हैं. आध्यात्म, ईश्वर और आत्मा के संबंध का विचार करें. जीवन के उद्देश्य को समझने का प्रयास करें.
मौन व्रत का पारण कैसे करें?
रात्रि के समय में शयन करने के बाद जब अगले दिन उठें, तो दैनिक क्रिया से निवृत होकर स्नान करें. उसके बाद आप सबसे पहले अपने गुरु मंत्र, इष्ट देव के नाम या किसी भजन से पहला शब्द बोलना शुरू करें. जब हम कोई व्रत रखते हैं तो वह सूर्योदय से सूर्योदय तक होता है, उसके बाद अन्न, फल, तुलसी दल आदि खाकर पारण करते हैं. यह मौन व्रत है, तो इसका पारण आपके भजन, मंत्र जाप के प्रारंभ से होगा क्योंकि आप पूरे दिन मौन रहते हैं और मौन की प्रक्रिया शुभ शब्दों के उच्चारण से पूर्ण होनी चाहिए. जब आप मंत्र, नाम जाप, भजन आदि करेंगे तो आपका मौन व्रत पूर्ण हो जाएगा.
कौन रख सकता है मौन व्रत?
मौनी अमावस्या पर मौन व्रत सभी लोग रख सकते हैं, लेकिन बच्चों को नहीं रखना चाहिए. बच्चे चंचल होते हैं, उनसे पूरे एक दिन व्रत रखना संभव नहीं है. वे बोल ही देते हैं. वे काफी समय तक चुप नहीं रह सकते हैं.


