116 साल की दादी ने कर दिखाया कमाल! पैदल चढ़ीं तिरुमाला की 3550 सीढ़ियां

116 साल की दादी ने कर दिखाया कमाल! पैदल चढ़ीं तिरुमाला की 3550 सीढ़ियां

116 year old woman: उम्र बढ़ने के साथ अक्सर लोग कुछ कदम चलने से भी पहले सोचने लगते हैं. घुटनों का दर्द, सांस फूलना और थकान जैसी समस्याएं सामान्य मानी जाती हैं. ऐसे समय में अगर कोई 100 साल से अधिक उम्र की महिला हजारों सीढ़ियां पैदल चढ़कर मंदिर पहुंच जाए, तो यह सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि प्रेरणा की मिसाल बन जाती है. कर्नाटक की रहने वाली लक्ष्मव्वा, जिन्हें स्थानीय लोग भीमव्वा के नाम से भी जानते हैं, इन दिनों अपनी इसी अद्भुत यात्रा की वजह से चर्चा में हैं.

परिवार का दावा है कि उनकी उम्र 116 साल है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तिरुमाला की 3,550 सीढ़ियां चढ़ते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. “गोविंदा-गोविंदा” का लगातार जाप करती लक्ष्मव्वा की आस्था और हौसले ने लाखों लोगों का दिल जीत लिया है.

आस्था के सहारे पूरी की कठिन चढ़ाई
कर्नाटक से अपने परिवार के साथ तिरुमाला पहुंचीं लक्ष्मव्वा ने अलीपिरी पैदल मार्ग से भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन का संकल्प लिया. यह रास्ता तिरुमाला जाने वाले सबसे प्रसिद्ध पैदल मार्गों में से एक माना जाता है, जिसमें करीब 3,550 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. हैरानी की बात यह रही कि इतनी अधिक उम्र होने के बावजूद उन्होंने यात्रा के दौरान किसी की शारीरिक मदद नहीं ली. कमज़ोर नजर होने के कारण वह रास्ते में बनी दीवार का सहारा लेकर धीरे-धीरे आगे बढ़ती रहीं. उनके परिवार के सदस्य पूरे समय उनके साथ रहे और उनका उत्साह बढ़ाते रहे.

‘गोविंदा’ का जाप बना उनकी ताकत

हर कदम पर भगवान का नाम
यात्रा के दौरान लक्ष्मव्वा लगातार “गोविंदा, गोविंदा” का जाप करती रहीं. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि उनके चेहरे पर थकान से ज्यादा श्रद्धा और संतोष दिखाई देता है. उनके परिवार का कहना है कि भगवान वेंकटेश्वर में उनकी अटूट आस्था ही उन्हें यह शक्ति देती है. रास्ते में मौजूद दूसरे श्रद्धालु भी उन्हें देखकर रुक गए. कई लोगों ने उनका वीडियो बनाया, जबकि कुछ लोगों ने उनके हौसले की सराहना करते हुए उनका अभिवादन किया. सोशल मीडिया पर भी लोग इसे भक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति का अद्भुत उदाहरण बता रहे हैं.

उम्र की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी
परिवार का दावा है कि लक्ष्मव्वा की उम्र 116 वर्ष है. हालांकि फिलहाल इस उम्र की आधिकारिक पुष्टि किसी सरकारी दस्तावेज़ या रिकॉर्ड से नहीं हुई है. फिर भी, वीडियो में दिखाई दे रही उनकी शारीरिक स्थिति और बुजुर्ग स्वरूप से यह स्पष्ट है कि वह 100 वर्ष से अधिक आयु की हैं. यही वजह है कि लोग सिर्फ उनकी उम्र नहीं, बल्कि उनके साहस और आत्मविश्वास की भी चर्चा कर रहे हैं. कई लोगों का मानना है कि उम्र का आंकड़ा चाहे जो भी हो, इतनी कठिन चढ़ाई पूरी करना अपने आप में असाधारण उपलब्धि है.

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परिवार बना सबसे बड़ा सहारा

साथ चलते रहे पर हिम्मत उन्होंने खुद दिखाई
लक्ष्मव्वा के परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान किया और उन्हें तिरुमाला की यात्रा पर साथ लेकर गया. परिवार के सदस्य रास्ते भर उनके साथ चलते रहे, लेकिन सीढ़ियां चढ़ने का प्रयास उन्होंने अपने दम पर किया. यह दृश्य उन परिवारों के लिए भी एक संदेश बनकर सामने आया है, जो अपने बुजुर्गों की धार्मिक इच्छाओं और भावनाओं को पूरा करने का प्रयास करते हैं. परिवार का सहयोग और बुजुर्ग की इच्छाशक्ति दोनों ने इस यात्रा को यादगार बना दिया.

सिर्फ आस्था नहीं, जीवनशैली भी हो सकती है वजह
विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ती उम्र में सक्रिय जीवनशैली, नियमित चलना-फिरना, संतुलित खानपान और सकारात्मक सोच शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं. वहीं मानसिक मजबूती और किसी उद्देश्य के प्रति समर्पण भी व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का हौसला देता है. लक्ष्मव्वा खुद अपनी ताकत का श्रेय भगवान वेंकटेश्वर की कृपा को देती हैं. वहीं कई लोग मानते हैं कि उनकी जीवनशैली, अनुशासन और मानसिक दृढ़ता ने भी इस यात्रा को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई.



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