जुलाई में आसमान रचेगा अद्भुत नजारा! चंद्रमा, मंगल और कृतिका नक्षत्र बनाएंगे दुर्लभ 'त्रिको

जुलाई में आसमान रचेगा अद्भुत नजारा! चंद्रमा, मंगल और कृतिका नक्षत्र बनाएंगे दुर्लभ 'त्रिको

July Sky Events: आपको रात के आसमान को निहारना पसंद है, तो जुलाई का महीना आपके लिए बेहद खास साबित हो सकता है. इस बार आसमान में कई ऐसी खगोलीय घटनाएं होने जा रही हैं, जिन्हें बिना किसी बड़े उपकरण के भी देखा जा सकता है. सबसे ज्यादा चर्चा 11 जुलाई की है, जब चंद्रमा, मंगल ग्रह और कृतिका नक्षत्र यानी प्लियाडेस (Pleiades) मिलकर आसमान में एक खूबसूरत त्रिकोण जैसी आकृति बनाएंगे. इसके अलावा शनि, शुक्र और बृहस्पति के साथ चंद्रमा की युति, अमावस्या की अंधेरी रात में आकाशगंगा का साफ नजारा और महीने के आखिर में उल्का वर्षा जैसी घटनाएं भी लोगों को रोमांचित करेंगी, अगर मौसम साफ रहा तो यह महीना खगोल प्रेमियों, फोटोग्राफरों और आम लोगों के लिए यादगार अनुभव लेकर आ सकता है.

जुलाई में 11 तारीख को दिखेगा सबसे खास नजारा
जुलाई की सबसे आकर्षक खगोलीय घटना 11 जुलाई की सुबह देखने को मिलेगी. सूर्योदय से करीब दो घंटे पहले पूर्व दिशा में पतला अर्धचंद्र, लाल रंग का मंगल ग्रह और कृतिका तारा समूह एक साथ दिखाई देंगे. तीनों मिलकर आसमान में त्रिकोण जैसी आकृति बनाएंगे, जिसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकेगा. हालांकि यदि आपके पास दूरबीन या छोटी टेलीस्कोप है, तो यह दृश्य और भी शानदार नजर आएगा. आसमान देखने के शौकीनों के लिए यह एक बेहतरीन मौका होगा, क्योंकि इस तरह का संतुलित दृश्य रोज देखने को नहीं मिलता. शहरों की तुलना में गांवों या कम रोशनी वाले इलाकों में यह नजारा ज्यादा स्पष्ट दिखाई देगा.

कृतिका नक्षत्र क्यों है इतना खास?
1. हजारों तारों का चमकदार समूह
जिस तारा समूह को हम कृतिका नक्षत्र कहते हैं, उसे दुनिया भर में प्लियाडेस, सेवन सिस्टर्स और मेसियर-45 के नाम से भी जाना जाता है. यह पृथ्वी के सबसे नजदीक दिखाई देने वाले खुले तारा समूहों में शामिल है. दिलचस्प बात यह है कि सामान्य आंखों से इसमें छह या सात तारे ही दिखाई देते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार इसमें करीब एक हजार तारे मौजूद हैं. यह वृषभ तारामंडल की दिशा में स्थित है और इसका आकार छोटे चम्मच जैसा दिखाई देता है. भारतीय खगोलीय परंपरा में कृतिका नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है.

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2. पूरे महीने दिखेंगे ग्रहों और चंद्रमा के खूबसूरत मिलन
जुलाई सिर्फ 11 तारीख तक सीमित नहीं है. पूरे महीने अलग-अलग दिनों में चंद्रमा कई ग्रहों के करीब दिखाई देगा. 7 और 8 जुलाई की सुबह सूर्योदय से पहले चंद्रमा और शनि ग्रह की युति देखी जा सकेगी. इसके बाद 15 जुलाई को चंद्रमा बृहस्पति के पास नजर आएगा, जबकि 17 जुलाई की शाम पश्चिम दिशा में शुक्र ग्रह और चंद्रमा का सुंदर दृश्य देखने को मिलेगा. ऐसे दृश्य खगोल विज्ञान में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, लेकिन धरती से देखने पर बेहद आकर्षक लगते हैं.

अमावस्या की रात मिलेगा आकाशगंगा देखने का मौका
14 जुलाई को अमावस्या रहेगी. इस दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देगा, जिससे रात का आसमान काफी अंधेरा रहेगा. ऐसी स्थिति में आकाशगंगा यानी मिल्की वे को अपेक्षाकृत ज्यादा साफ देखा जा सकता है, अगर आप किसी ऐसे स्थान पर हैं जहां कृत्रिम रोशनी कम है, तो कई चमकीले तारे और तारामंडल भी आसानी से दिखाई देंगे. यही वजह है कि खगोल प्रेमी अमावस्या की रात का बेसब्री से इंतजार करते हैं.

महीने के आखिर में होगी उल्का वर्षा

रात में टूटते तारों का मिलेगा शानदार नजारा
जुलाई के अंतिम सप्ताह में डेल्टा एक्वेरिड्स और अल्फा कैप्रिकोर्निड्स उल्का वर्षा अपने चरम पर पहुंचेगी. 30 जुलाई की रात सबसे ज्यादा उल्काएं दिखाई देने की संभावना है. यदि मौसम साफ रहा और आप रोशनी से दूर खुले स्थान पर मौजूद रहे, तो आधी रात के बाद टूटते तारों का शानदार नजारा देख सकते हैं. यह उल्का वर्षा अगस्त के पहले सप्ताह तक जारी रहेगी और बाद में पर्सिड्स उल्का वर्षा के साथ मिल जाएगी. विशेषज्ञों के मुताबिक रात करीब दो बजे के आसपास इसका दृश्य सबसे बेहतर रहता है.

6 जुलाई को पृथ्वी रहेगी सूर्य से सबसे अधिक दूर
इस महीने 6 जुलाई का दिन भी वैज्ञानिक दृष्टि से खास रहेगा. इस दिन पृथ्वी अपनी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चलते हुए सूर्य से सबसे अधिक दूरी पर होगी. इस स्थिति को अपसौर कहा जाता है. उस समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 15.21 करोड़ किलोमीटर होगी. हालांकि इसका मौसम पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता, लेकिन यह पृथ्वी की कक्षा की एक महत्वपूर्ण खगोलीय स्थिति मानी जाती है.

पूर्णिमा पर दिखेगा ‘बक मून’
29 जुलाई को पूर्णिमा होगी, जिसे दुनिया के कई हिस्सों में बक मून कहा जाता है. इस नाम के पीछे वजह यह है कि इसी समय नर हिरणों के नए सींग तेजी से बढ़ने लगते हैं. इसी पूर्णिमा को थंडर मून और हे मून जैसे नामों से भी जाना जाता है. भारतीय परंपरा में यही पूर्णिमा गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है. यह दिन आध्यात्मिक गुरुओं के सम्मान और ज्ञान की परंपरा को समर्पित माना जाता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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