Stale Dough Roti Effects: रात का गूंथा आटा सुबह खाना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें ज्योतिष में बासी रोटी के असर

Stale Dough Roti Effects: रात का गूंथा आटा सुबह खाना क्यों माना जाता है अशुभ? जानें ज्योतिष में बासी रोटी के असर

Stale Dough Roti Effects: हमारे भारतीय घरों में रोटी सिर्फ खाने का हिस्सा नहीं होती, बल्कि इसे सम्मान और भावनाओं से जोड़ा जाता है. सुबह या शाम की ताजी रोटी को सेहत, सुख और संतुलन से जोड़ा गया है. खासकर हिंदू धर्म और ज्योतिष में रोटी को ग्रहों और ऊर्जा से जुड़ा माना गया है. पुराने ग्रंथों जैसे गरुड़ पुराण और धर्मसिंधु में भोजन से जुड़े कई नियम बताए गए हैं, जिनका मकसद इंसान के शरीर और मन को संतुलित रखना है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग रात का आटा गूंथकर फ्रिज में रख देते हैं और सुबह उसी से रोटियां बना लेते हैं. देखने में यह आसान तरीका लगता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष के हिसाब से यह आदत ठीक नहीं मानी जाती. कहा जाता है कि बासी आटे से बनी रोटियां सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि घर के माहौल और व्यक्ति की सोच पर भी असर डालती हैं. यही वजह है कि पुराने समय से ताजा आटे से बनी रोटी खाने पर जोर दिया गया है. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य रवि पराशर से.

ज्योतिष में रोटी और ग्रहों का संबंध
ज्योतिष शास्त्र में रोटी को सीधे तौर पर सूर्य, चंद्रमा और मंगल से जोड़ा गया है. सूर्य ऊर्जा और आत्मबल का प्रतीक है, चंद्रमा मन और भावनाओं को दर्शाता है, जबकि मंगल ताकत और सक्रियता से जुड़ा है. जब ताजे आटे से बनी रोटी खाई जाती है, तो यह इन ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा को मजबूत करती है. इसके उलट बासी आटे से बनी रोटी ग्रहों की ऊर्जा को कमजोर कर सकती है, जिससे मन अशांत रहने लगता है और काम में मन नहीं लगता.

हिंदू धर्म में रसोई का महत्व
हिंदू धर्म में रसोई को सिर्फ खाना पकाने की जगह नहीं माना गया है. इसे घर का सबसे पवित्र हिस्सा कहा गया है. मान्यता है कि रसोई में मां अन्नपूर्णा का वास होता है, जो घर को सुख, शांति और पोषण देती हैं.
इसी कारण भोजन बनाते समय साफ-सफाई, मन की शुद्धता और ताजगी का खास ध्यान रखा जाता है. माना जाता है कि बासी चीजों से बना भोजन रसोई की सकारात्मक ऊर्जा को कम कर देता है.

बासी आटे में तामसिक ऊर्जा क्यों बढ़ती है?
रात का गूंथा हुआ आटा सुबह तक बासी माना जाता है. इस दौरान उसमें हल्का खमीर बनने लगता है. शास्त्रों के अनुसार ऐसा आटा तामसिक प्रवृत्ति का होता है. तामसिक भोजन खाने से शरीर में भारीपन, आलस्य और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. कई लोगों को बिना वजह गुस्सा आना, मन उदास रहना या काम में मन न लगना भी महसूस होता है. ऐसा माना जाता है कि यह सब बासी आटे की नकारात्मक ऊर्जा का असर हो सकता है.

मां अन्नपूर्णा से जुड़ा विश्वास
घर की रसोई को मां अन्नपूर्णा का स्थान माना गया है. जब भोजन ताजे मन और साफ वातावरण में बनाया जाता है, तो घर में सुख और सकारात्मकता बनी रहती है. मान्यता है कि बासी आटे से रोटियां बनाने पर मां अन्नपूर्णा प्रसन्न नहीं होतीं, जिससे घर की ऊर्जा कमजोर पड़ सकती है और पारिवारिक माहौल में तनाव बढ़ सकता है.

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क्या करना बेहतर है?
संभव हो तो रोज जरूरत के हिसाब से ही आटा गूंथें. अगर आटा बच भी जाए, तो उसे अगले दिन इस्तेमाल करने से पहले उसकी ताजगी जरूर जांचें. ताजा भोजन न सिर्फ शरीर के लिए अच्छा होता है, बल्कि मन को भी शांत रखता है.

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