2 शुभ योग में वैशाख अमावस्या आज, स्नान-दान, तर्पण से दूर होगा पितृ दोष,जानें विधि, मुहूर्त

2 शुभ योग में वैशाख अमावस्या आज, स्नान-दान, तर्पण से दूर होगा पितृ दोष,जानें विधि, मुहूर्त

Vaishakh Amavasya 2026 Puja Vidhi: वैशाख अमावस्या आज है. इस बार की वैशाख अमावस्या पर 2 शुभ योग बने हैं. एक सर्वार्थ सिद्धि योग और दूसरा अमृत सिद्धि योग है. इन योग में वैशाख अमावस्या का स्नान और दान करने से आपके पाप और दुख मिटेंगे, पुण्य फल की प्राप्ति होगी. वैशाख अमावस्या पितरों के आशीर्वाद और पितृ दोष मुक्ति का दिन है. पितरों के आशीर्वाद से व्यक्ति की उन्नति होती है, जो लोग आज के दिन पितरों को प्रसन्न नहीं करते हैं, तृप्त नहीं करते हैं, उनको दोष लगता है. आइए जानते हैं वैशाख अमावस्या पर बनने वाले शुभ योग, मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र आदि के बारे में.

वैशाख अमावस्या 2026 मुहूर्त

वैशाख अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 16 अप्रैल, गुरुवार, रात 8:11 बजे से
वैशाख अमावस्या तिथि का समापन: 17 अप्रैल, शुक्रवार, शाम 5:21 बजे पर.
अमावस्या स्नान का मुहूर्त: 04:25 ए एम से 05:09 ए एम तक
अमावस्या का शुभ समय: 11:55 ए एम से 12:47 पी एम तक
श्राद्ध का समय: दिन में 11:30 बजे से दोपहर 02:30 बजे तक
सूर्योदय: 05:54 ए एम पर

2 शुभ योग में वैशाख अमावस्या 2026

आज वैशाख अमावस्या पर दो शुभ योग बने हैं. वैशाख अमावस्या पर पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना है, वहीं अमृत सिद्धि योग सुबह में 05:54 ए एम से है, जो दोपहर 12:02 पी एम तक रहेगा.

इन दो शुभ योगों के अलावा आज वैधृति योग प्रात:काल से लेकर सुबह 07:22 ए एम तक है, वहीं विष्कम्भ योग 07:22 ए एम से लेकर कल 18 अप्रैल को तड़के 03:45 ए एम तक है, उसके बाद प्रीति योग बनेगा.

वैशाख अमावस्या पर रेवती नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 12:02 पी एम तक है, उसके बाद से अश्विनी नक्षत्र है.

वैशाख अमावस्या पर स्नान-दान और तर्पण विधि

वैशाख अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर दैनिक क्रिया से निवृत हो जाएं और उसके बाद स्नान करें. ब्रह्म मुहूर्त स्नान के लिए उत्तम समय माना गया है. इस समय न कर पाएं तो सूर्योदय के बाद कर लें.

स्नान के बाद साफ वस्त्र पहनें. काले तिल, सफेद फूल और जल की व्यवस्था कर लें. जिन पितरों को तर्पण देना है, उनके नाम का स्मरण करें. फिर हाथ में कुशा की पवित्री पहनकर काले तिल, फूल और जल से पितरों को तर्पण दें.

उसके बाद पितरों को प्रणाम करके कहें कि आपने अपने वचन और कर्म से आप सभी पितरों को तृप्त किया है, आप सभी ​तृप्त हों और आशीर्वाद प्रदान करें.

तर्पण के बाद आपको अपने पितरों के लिए दान करना है. किसी ब्राह्मण को अन्न और सफेद वस्त्र का दान करें. वस्त्र सिले हुए नहीं होने चाहिए. उसमें आप तौलिया, लुंगी, धोती, गमछा आदि दान दे सकते हैं. इसके साथ कोई एक बर्तन का भी दान करें.

स्नान, दान और तर्पण के बाद पितरों के लिए भोजन का एक हिस्सा निकालकर पक्षी, कौआ, कुत्ता, गाय आदि को ​खिला दें. ऐसी मान्यता है कि इनको भोजन का अंश खिलाने से वह पितरों को प्राप्त होता है. इससे वे प्रसन्न होकर परिवार की उन्नति का आशीर्वाद देते हैं.

पितरों के तर्पण का मंत्र

तर्पण के समय आपको ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः मंत्र का उच्चारण करना चाहिए. आप चाहें तो ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च, नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः मंत्र का भी जाप कर सकते हैं.

वैशाख अमावस्या का मह​त्व

वैशाख अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण, दान, श्राद्ध आदि करने से पितृ दोष से शांति मिलती है. जो लोग ऐसा नहीं करते हैं, उनको पितृ दोष लगता है. पितृ दोष की वज​ह से लोगों की तरक्की नहीं होती है, घर में क्लेश रहता है, वाद विवाद की स्थिति बनती है. पितृ दोष की शांति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध भी कराने का विधान है.

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