मासिक शिवरात्रि 2026: पूजा से पहले जान लें ये नियम, वरना अधूरा रह सकता है व्रत

मासिक शिवरात्रि 2026: पूजा से पहले जान लें ये नियम, वरना अधूरा रह सकता है व्रत

Masik Shivratri 2026: भगवान शिव के भक्तों के लिए आज का दिन बेहद खास माना जा रहा है. ज्येष्ठ माह की मासिक शिवरात्रि इस बार शुक्रवार को पड़ी है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है. सुबह से ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है. कहीं लोग जलाभिषेक कर रहे हैं तो कहीं महिलाएं परिवार की सुख-शांति और वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए व्रत रख रही हैं. माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि पर सच्चे मन से पूजा करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और जीवन की परेशानियों को दूर करते हैं.

खास बात यह है कि जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही हो या मानसिक तनाव लंबे समय से बना हो, उनके लिए यह व्रत बेहद फलदायी माना जाता है. धार्मिक परंपराओं में भी इस दिन शिव साधना और मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया गया है.

कब से कब तक रहेगी मासिक शिवरात्रि तिथि
पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि आज सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. इसके बाद चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी, जो अगले दिन सुबह 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर शुक्रवार को ही मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है. धार्मिक जानकारों का कहना है कि इस बार शिवरात्रि पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे पूजा का महत्व और बढ़ गया है. यही वजह है कि मंदिरों में सुबह से भक्तों की आवाजाही तेज हो गई है.

पूजा के लिए कौन-से मुहूर्त रहेंगे शुभ

सर्वार्थ सिद्धि योग का खास संयोग
आज सुबह 5:30 बजे से रात 8:14 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. इसे किसी भी शुभ कार्य के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:50 बजे से 12:45 बजे तक रहेगा.

ब्रह्म मुहूर्त, विजय मुहूर्त और गोधूलि बेला में भी शिव पूजा करना शुभ माना गया है. कई भक्त रात में भी शिवलिंग का रुद्राभिषेक करते हैं.

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ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
-मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है.
-इसके बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान शिव का ध्यान करें.
-घर के मंदिर या नजदीकी शिवालय में जाकर शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल अर्पित करें.
-पूजा में बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, शहद और दही चढ़ाने की परंपरा है.
-मान्यता है कि भोलेनाथ को शक्कर और घी से बने मिष्ठान का भोग लगाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है.
-पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है.
-अंत में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें.

व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

सात्विकता और संयम का विशेष महत्व
-मासिक शिवरात्रि का व्रत केवल भोजन त्यागने तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता भी जरूरी मानी जाती है. कई श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं.

-धार्मिक मान्यता है कि इस दिन क्रोध, झूठ और विवाद से दूर रहना चाहिए. अगले दिन पूजा के बाद व्रत का पारण किया जाता है और जरूरतमंद लोगों को दान देना शुभ माना जाता है.

-भोलेनाथ के भक्तों का मानना है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ रखा गया यह व्रत जीवन में सकारात्मकता, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि लेकर आता है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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