घर के पास नहीं है वट वृक्ष तो कैसे करें वट सावित्री की पूजा? जानें क्या हो सकते 5 विकल्प

घर के पास नहीं है वट वृक्ष तो कैसे करें वट सावित्री की पूजा? जानें क्या हो सकते 5 विकल्प

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घर के पास नहीं है वट वृक्ष तो कैसे करें वट सावित्री की पूजा? जानें 5 विकल्प

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Vat Savitri Vrat 2026 How To Worship Without Banyan Tree: 16 मई शुक्रवार को वट सावित्री व्रत है. इसमें बरगद के पेड़ की पूजा करते हैं. लेकिन आपके घर के पास बरगद का पेड़ नहीं है तो आप पूजा कैसे करेंगी? इस स्थिति में वट सावित्री व्रत की पूजा के 5 विकल्प कौन से हैं?

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बरगद का पेड़ नहीं है तो कैसे करें वट सावित्री पूजा? (Photo: AI)

Vat Savitri Vrat 2026 Puja Niyam: वट सावित्री व्रत 16 मई को है. इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और पूजा करती हैं. इस व्रत की पूजा में वट वृक्ष का विशेष महत्व है क्योंकि उसकी पूजा करके उसमें कच्चा सूत कम से कम 7 बार लपेटते हैं. कुछ महिलाएं वट सावित्री व्रत रखेंगी, लेकिन वे यात्रा कर रही हों या उनके घर के आसपास में कोई वट वृक्ष यानि बरगद का पेड़ न हो तो ऐसी स्थिति में वे कैसे पूजा करेंगी? उनके पास पूजा का दूसरा विकल्प क्या हो सकता है?

1. वट वृक्ष की टहनी की पूजा

यदि आपके घर के आस पास या मंदिर में वट वृक्ष नहीं है तो आप परेशान न हों. व्रत से एक दिन पहले वट वृक्ष की टहनी मंगा लें. उसे एक साफ गमले में मिट्टी भरकर लगा दें और उसमें पानी डालती रहें. व्रत के दिन शुभ मुहूर्त में उसे ही वट वृक्ष मानकर विधि विधान से पूजा करें और उसके कच्चा सूत लपेट दें. पूजा के अगले दिन उस टहनी को बहते जल में प्रवाहित कर दें या गमले में ही रहने दें.

2. मानसिक पूजा

आपके पास दूसरा विकल्प यह है कि आप वट वृक्ष की मानसिक पूजा करें. शुभ मुहूर्त में एक वट वृक्ष की कल्पना करके उसकी पूजा मन ही मन कर लें. शास्त्रों में मानसिक पूजा का वर्णन मिलता है.

3. वट सावित्री व्रत की तस्वीर

आपके पास तीसरी विकल्प यह है कि आप बाजार से वट सावित्री व्रत की तस्वीर लेकर आएं, जिसमें सावित्री-सत्यवान और बरगद का पेड़ बना हो. शुभ मुहूर्त में उस तस्वीर की पूजा कर लें.

4. वट वृक्ष की आकृति बनाकर पूजा

आपके पास चौथा विकल्प यह है कि आप एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछा लें. फिर उस पर हल्दी से वट वृक्ष की आकृति बना लें. विधि विधान से अपनी पूजा संपन्न करें. रही बात परिक्रमा और सूत लपेटने की तो उस चित्र या चौकी की परिक्रमा करके सूत लपेट दें.

5. वट वृक्ष में त्रिदेवों का वास

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष में त्रिदेवों का वास होता है. बरगद के पेड़ की जड़ में ब्रह्मा जी, वृक्ष के मुख्य तने में भगवान विष्णु और उसकी शाखाओं में शिव जी का वास होता है. ऐसे में आप त्रिदेवों को साक्षी मानकर पूजा कर लें. बरगद के तने में ही सूत लपेटते हैं, आप भगवान विष्णु की परिक्रमा करके कच्चा सूत उनके चरणों में रख दें.

वट वृक्ष की पूजा के फायदे

  1. वट वृक्ष की पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. उनका दांपत्य जीवन सुखमय होता है. पति की आयु लंबी होती है.
  2. बरगद का पेड़ अक्षय वृक्ष होता है क्योंकि उसकी जड़ें काफी दूर तक फैली होती हैं और एक से अनेक पेड़ उग जाते हैं. उनकी वंश बेल कम नहीं होती है, वह बढ़ती ही रहती है. ऐसी मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा करने से संतान प्राप्ति होती है, वंश की वृद्धि होती है.
  3. वट वृक्ष की पूजा करने से ग्रह दोष शांत होते हैं. शनि, राहु और केतु के दोष दूस होती हैं, इसलिए वट वृक्ष की सेवा करते हैं.

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कार्तिकेय तिवारीDeputy News Editor

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें

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