'भारत को हिंदू राष्ट्र…' रामभद्राचार्य के बयान पर आखिर आ ही गया संतों का बयान, एक ने तो नरसंहार से जोड़ा मामला

'भारत को हिंदू राष्ट्र…' रामभद्राचार्य के बयान पर आखिर आ ही गया संतों का बयान, एक ने तो नरसंहार से जोड़ा मामला

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जगद्गुरु रामभद्राचार्य के भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की अपील पर अब कई संतों के बयान आ चुके हैं. संत समाज कह रहे हैं कि इस मामले पर सभी भारतीयों की एकजुटता बहुत जरूरी है, तभी कई संतों का सपना पूरा होगा. आइए जानते हैं रामभद्राचार्य के बयान का किन किन संतों ने समर्थन किया है…

भारत में आए दिन हिंदू राष्ट्र बनाने की अपील होती रहती है और इसे लेकर कई जगह प्रदर्शन भी किए जा चुके हैं. अब इस मामले पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य के दिए गए बयान पर सीताराम दास महाराज और परमहंस आचार्य ने समर्थन जताया है. दोनों संतों ने देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कुछ कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में देश में हिंदुओं की सुरक्षा संदिग्ध हो सकती है. साथ ही उन्होंने सभी भारतीयों से इस मामले पर एकजुट होने की अपील भी की है. आइए जानते हैं रामभद्राचार्य के भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की अपील पर संतों ने क्या क्या कहा…

सीताराम दास महाराज
सीताराम दास महाराज ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान को सही बताते हुए कहा कि जब तक जगद्गुरु रामभद्राचार्य जैसे संत हैं, सनातनियों द्वारा हिंदुओं को कोई क्षति नहीं पहुंचने दी जाएगी. जब तक ऐसे संत हैं, हमारा राष्ट्र सुरक्षित है. कई हिंदू महापुरुष भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए प्रयासरत हैं और यह तब तक संभव नहीं होगा, जब तक संसद में हमारी संख्या 470 सीटों तक नहीं पहुंचती. उन्होंने आगे कहा कि महाराज ने जनता से अपील की कि आने वाले दिनों में इस संख्या को पूरा करने की दिशा में काम करें ताकि भारत हिंदू राष्ट्र बन सके. उन्होंने हमारी संस्कृति पर हो रहे हमलों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और बच्चों को संस्कृत भाषा व संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता बताई ताकि वे राष्ट्र के प्रति समर्पित रहें.

जगद्गुरु परमहंस आचार्य
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी जगद्गुरु रामभद्राचार्य के कथन का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को भी उनके सुझावों पर विचार करना चाहिए और देश की बहुसंख्यक जनता को भी इस पर आत्म चिंतन करना चाहिए. परमहंस आचार्य ने विभाजन के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों की मांगों के कारण विभाजन हुआ था और उस दौर में हिन्दुओं का बड़ा नरसंहार हुआ. विभाजन के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश बने और वहां के हिंदुओं को राष्ट्रीय पहचान व सुरक्षा नहीं मिली. आचार्य ने 1990 के दशक में कश्मीर में हुई घटनाओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं के साथ बुरा व्यवहार हुआ और कई तरह के अत्याचार दिखाई दिए.

परमहंस आचार्य की चेतावनी
परमहंस आचार्य ने चेतावनी देते हुए आगे कहा कि यदि भारत को तत्काल हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया गया तो अगले 50 वर्षों में देश के हिंदुओं के साथ उसी तरह की स्थिति बन सकती है, जैसी कुछ स्थानों पर देखी गई है. देश को बचाना है तो भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना होगा, नहीं तो इसका अंजाम बुरा होगा. बता दें कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा था कि संसद में जब तक 470 सीटें नहीं होंगी तब तक देश हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता.

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Parag Sharma

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें

मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प… और पढ़ें

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रामभद्राचार्य के बयान को संतों का समर्थन, भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की अपील

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