प्रयागराज के बाद कब और कहां लगने वाला है अगला कुंभ मेला, जानें उज्जैन, नासिक या हरिद्वार कहां हो रही है तैयारी

प्रयागराज के बाद कब और कहां लगने वाला है अगला कुंभ मेला, जानें उज्जैन, नासिक या हरिद्वार कहां हो रही है तैयारी

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Next Kumbh Mela Date And Place: कुंभ मेला भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है, जो हर बार 12 साल बाद चार जगहों पर लगता है. इस महापर्व में करोड़ों लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं और मोक्ष की कामना करते है…और पढ़ें

प्रयागराज के बाद कब और कहां लगने वाला है अगला कुंभ मेला

हाइलाइट्स

  • अगला कुंभ मेला साल 2027 में होगा.
  • इस तरह तय होती है कुंभ की तिथि.
  • अगला कुंभ होगा सिंहस्थ कुंभ.

महाशिवरात्रि के दिन प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ मेले का समापन हो गया है. प्रयागराज नगरी में त्रिवेणी संगम के तट पर लगे महाकुंभ मेले में 62 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके हैं. कुंभ मेला केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है बल्कि यह सनातन धर्म की महान सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का बोध भी कराता है. कुंभ मेले का आयोजन हर 12 साल के अंतराल पर प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में होता है. प्रयागराज के बाद अब लोगों में सवाल उठ रहा है कि अगला कुंभ मेला कहां और कब लगने वाला है. आइए जानते हैं प्रयागराज के बाद अगला कुंभ मेला कहां आयोजित होने वाला है…

साल 2027 में लगेगा अगला कुंभ
ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी के अनसुार, प्रयागराज के बाद अगला कुंभ मेला साल 2027 में महाराष्ट्र के नासिक में लगने जा रहा है. नासिक के गोदावरी तट पर लगने वाला यह कुंभ मेला 17 जुलाई दिन शनिवार से शुरू होगा. नासिक में पिछली बार कुंभ मेला साल 2015 में लगा था. हर 12 साल में नासिक और उज्जैन में पूर्ण कुंभ मेले का आयोजन होता है. वहीं हरिद्वार और प्रयागराज में कुंभ मेला, अर्धकुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ का आयोजन होता है और 6 साल बाद प्रयागराज और हरिद्वार में लगने वाले कुंभ को अर्ध कुंभ कहते हैं. नासिक के बाद 2028 में पूर्ण कुंभ मेला उज्जैन में होगा, फिर 2030 में प्रयागराज में अर्धकुंभ मेला आयोजित किया जाएगा.

नासिक कुंभ मेला 2027
कहां लगेगा – अगला कुंभ मेला नासिक में गोदावरी के तट पर लगेगा
नासिक कुंभ मेले का प्रारंभ – 17 जुलाई 2027 दिन शनिवार
नासिक कुंभ मेले का समापन – 17 अगस्त 2027 दिन मंगलवार

इस तरह तय होती है कुंभ की तिथि
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों और राशियों के विश्लेषण करने के बाद ही कुंभ मेले की तिथि निर्धारित की जाती है. कुंभ मेले की तिथि के लिए ग्रहों के राजा सूर्य और देवताओं के गुरु बृहस्पति की चाल को महत्वपूर्ण माना जाता है. सूर्य और गुरु के राशि परिवर्तन के आधार पर ही कुंभ का स्थान तय किया जाता है.

प्रयागराज – ग्रहों के राजा सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं और बृहस्पति वृषभ राशि में होते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में किया जाता है.
नासिक – जब सिंह राशि में सूर्य और बृहस्पति ग्रह विराजमान रहते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन महाराष्ट्र के नासिक में लगता है.
हरिद्वार – जब सूर्य मेष राशि में तो बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ का मेला हरिद्वार में लगता है.
उज्जैन – जब सूर्य मेष राशि में तो बृहस्पति सिंह राशि में होते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन उज्जैन में किया जाता है.

नासिक में लगेगा सिंहस्थ कुंभ
नासिक में सिंहस्थ कुंभ का योग बनता है क्योंकि सिंह राशि में सूर्य और बृहस्पति ग्रह विराजमान रहते है इसलिए नासिक में लगने वाले कुंभ को सिंहस्थ कुंभ भी कहा जाता है. यह कुंभ मेला गोदावरी नदी के तट पर लगेगा, जो त्र्यंबकेश्वर में स्थित है. गोदावरी नदी गंगा नदी के बाद दूसरी सबसे लंबी नदी है. यह नदी भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 10% हिस्सा कवर करती है. इसे दक्षिण गंगा भी कहा जाता है और इसकी उत्पत्ति पश्चिमी घाट में त्रयंबक पहाड़ी से हुई है.

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कब और कहां लगने वाला है अगला कुंभ मेला, जानें अगले कुंभ मेला का महत्व

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