देवताओं के घर को मिलेगा दुनिया की धरोहर का दर्जा? UNESCO की लिस्ट में शामिल होने की राह पर

देवताओं के घर को मिलेगा दुनिया की धरोहर का दर्जा? UNESCO की लिस्ट में शामिल होने की राह पर

Mount Olympus UNESCO: कुछ पहाड़ सिर्फ पहाड़ नहीं होते. वे किसी देश की कहानी, संस्कृति और लोगों की पहचान का हिस्सा बन जाते हैं. ग्रीस का माउंट ओलिंपस भी ऐसा ही एक पर्वत है. बर्फ से ढकी चोटियां, बादलों में छिपे शिखर और समुद्र से लगभग सीधे उठती इसकी विशाल ढलानें इसे दूर से ही अलग पहचान देती हैं. लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ऊंचाई या खूबसूरती नहीं, बल्कि इससे जुड़ी हजारों साल पुरानी मान्यताएं हैं.

प्राचीन यूनानी कथाओं में माउंट ओलिंपस को Zeus और 12 Olympian Gods का निवास माना गया. यहीं देवताओं की सभा होती थी, यहीं से Zeus अपने वज्र का इस्तेमाल करते थे और यहीं से जुड़ी कथाओं ने पश्चिमी सभ्यता की कल्पना को सदियों तक प्रभावित किया.

अब ग्रीस इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर को एक नई पहचान दिलाना चाहता है. माउंट ओलिंपस को UNESCO World Heritage List में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है. दक्षिण कोरिया के बुसान में World Heritage Committee की बैठक में इस नामांकन पर चर्चा हो रही है. हालांकि, अंतिम फैसला अभी तय नहीं है और अधिक जानकारी मांगे जाने की संभावना भी बनी हुई है.

माइथोलॉजी से आगे, लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा
माउंट ओलिंपस की सबसे ऊंची चोटी लगभग 2,918 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचती है. इसका ऊपरी हिस्सा अक्सर बादलों और धुंध से घिरा रहता है. यही दृश्य शायद उन प्राचीन लोगों की कल्पना को जन्म देता होगा, जिन्होंने इसे देवताओं का घर माना. पर्वत के नीचे बसे लिटोकोरो जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए ओलिंपस किसी कहानी की किताब का हिस्सा नहीं है. वे इसे हर दिन देखते हैं. उनकी जिंदगी, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और पहचान किसी न किसी रूप में इस पर्वत से जुड़ी है.

Dion-Olympus के मेयर Evagelos Geroliolios के लिए यह पहाड़ सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा है. उनके मुताबिक, ओलिंपस वह जगह है जहां स्थानीय लोग बड़े हुए हैं और जिसकी प्राकृतिक सुंदरता, इतिहास और जैव विविधता उनके लिए बेहद खास है. दिलचस्प बात यह है कि आधुनिक दौर में भी Greek mythology को लेकर लोगों की दिलचस्पी कम नहीं हुई है.

Zeus की धरती पर आज भी मौजूद हैं प्राचीन आस्था के निशान
माउंट ओलिंपस की धार्मिक कहानी केवल यूनानी देवताओं तक सीमित नहीं है. इसकी ढलानों पर अलग-अलग दौर की आस्थाओं के निशान मिलते हैं. पुरातत्वविदों को पर्वत की निचली चोटियों में से एक पर खुले आसमान के नीचे बने प्राचीन धार्मिक स्थल के अवशेष मिले हैं. यहां मिलने वाले प्रमाण Hellenistic Period यानी 323 से 30 ईसा पूर्व के बीच के माने जाते हैं. प्राचीन लेखों में भी ऐसे धार्मिक जुलूसों का उल्लेख मिलता है, जिनमें लोग Zeus को बलि चढ़ाने के लिए पर्वत की ओर जाते थे. यानी ओलिंपस केवल माइथोलॉजी में देवताओं का घर नहीं था. कभी लोग वास्तव में इसकी ढलानों पर चढ़कर धार्मिक अनुष्ठान किया करते थे. समय बदला और ग्रीस में ईसाई धर्म का प्रभाव बढ़ा, लेकिन पर्वत की आध्यात्मिक पहचान खत्म नहीं हुई. बल्कि उसने एक नया रूप ले लिया.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

बादलों के बीच बना एक चर्च और पुरानी मठ परंपरा
Prophet Elias Peak पर लगभग 2,803 मीटर की ऊंचाई पर बना एक Orthodox Chapel इस पर्वत की धार्मिक विरासत को आगे बढ़ाता है. इसे दुनिया के सबसे ऊंचे Christian Orthodox Chapels में से एक माना जाता है. नीचे की ओर Enipeas Gorge में 1542 में स्थापित एक पुराने मठ के अवशेष भी मिलते हैं. इसके आसपास St. Dionysios की Holy Cave है, जहां चट्टान के भीतर एक छोटा Chapel और प्राकृतिक जलस्रोत मौजूद है. इस पानी को पवित्र माना जाता है. इस तरह एक ही पर्वत पर प्राचीन Greek Gods की कथाएं, पुराने धार्मिक अनुष्ठान, Byzantine परंपराएं और Christian pilgrimage की कहानियां एक साथ दिखाई देती हैं.

UNESCO का दर्जा मिलने की राह आसान नहीं
ग्रीस ने 2014 में माउंट ओलिंपस को UNESCO की Tentative List में शामिल किया था. किसी भी स्थान को World Heritage List के लिए नामांकित करने से पहले यह एक जरूरी शुरुआती कदम होता है. इसके बाद किसी स्थल की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक विशेषताओं, ऐतिहासिक महत्व, प्रबंधन व्यवस्था और संभावित खतरों से जुड़ी विस्तृत जानकारी तैयार की जाती है. ICOMOS और IUCN जैसे सलाहकार संगठन भी नामांकन की समीक्षा करते हैं.

अंतिम निर्णय World Heritage Committee के पास होता है, जिसमें 21 देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. ओलिंपस के मामले में अभी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. बुसान बैठक से जुड़े मसौदा दस्तावेजों के अनुसार, समिति ग्रीस से कुछ अतिरिक्त जानकारी मांगते हुए नामांकन को वापस भेज सकती है. इसका अर्थ यह नहीं होगा कि प्रस्ताव खारिज हो गया, बल्कि प्रक्रिया को पूरा करने के लिए और दस्तावेज व स्पष्टीकरण की जरूरत होगी.

बढ़ता पर्यटन बना सबसे बड़ी चिंता
UNESCO की सूची में शामिल होना किसी भी जगह के लिए प्रतिष्ठा की बात है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है. मान्यता मिलने के बाद माउंट ओलिंपस को देखने दुनिया भर से और ज्यादा पर्यटक पहुंच सकते हैं. पहाड़ पर पहले से ही hikers, climbers, nature lovers और mythology में रुचि रखने वाले लोग आते हैं. Alpine Club of Litochoro के अध्यक्ष और mountain guide Babis Marinidis का सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है आखिर यह नाजुक ecosystem कितने लोगों का दबाव सह सकता है? कुछ इलाकों में पर्यटकों द्वारा camping और swimming से जुड़े नियमों की अनदेखी, कचरा फैलाने और संवेदनशील क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाने जैसी शिकायतें सामने आती हैं. बढ़ती भीड़ को देखते हुए visitor registration या entrance fee जैसे उपायों पर भी विचार किया जा सकता है. चुनौती साफ है. दुनिया को ओलिंपस दिखाना है, लेकिन उसे भीड़ के बोझ तले खोना नहीं है.

देवताओं का घर या धरती की नाजुक धरोहर?
माउंट ओलिंपस को UNESCO World Heritage Site का दर्जा मिले या इसके लिए ग्रीस को अभी और इंतजार करना पड़े, इसकी अहमियत पहले से ही वैश्विक है. यहां Zeus और Olympian Gods की प्राचीन कथाएं हैं. धार्मिक अनुष्ठानों के पुरातात्विक प्रमाण हैं. Chapels और monasteries हैं. जंगल, चट्टानें और दुर्लभ जैव विविधता है. और सबसे बढ़कर, उन स्थानीय लोगों की जिंदगी है जो हर सुबह इस विशाल पर्वत को अपने सामने देखते हैं. (Source: The Times of India)

Source link

You May Have Missed