जानलेवा गर्मी में कैसे होगा निर्जला एकादशी व्रत? कब पी सकते हैं पानी, जानें नियम और समय

जानलेवा गर्मी में कैसे होगा निर्जला एकादशी व्रत? कब पी सकते हैं पानी, जानें नियम और समय

Nirjala Ekadashi 2026 Niyam: इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है और उसमें भी नौतपा चल रहा है. इस साल निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून को है, तब तक नौतपा तो खत्म हो जाएगा, लेकिन जेठ की गर्मी रहेगी. ज्येष्ठ माह में भी भीषण गर्मी होती है, इसमें बिना पानी के जीना मुश्किल होता है. निर्जला एकादशी के नाम से ही आपको पता चल रहा है कि वो एकादशी व्रत, जो निर्जला रखते हैं, यानि कि इस व्रत में अन्न, फल तो दूर जल का एक बूंद भी ग्रहण नहीं करते हैं. ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत रखते हैं. ऐसे में प्रश्न यह है कि इस भीषण गर्मी में निर्जला एकादशी का व्रत कैसे होगा? क्या पानी पीने से पूरा नहीं होगा उपवास? जानें क्या कहते हैं नियम?

निर्जला एकादशी 2026 मुहूर्त

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ: 24 जून, शाम 06:12 बजे
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि का समापन: 25 जून, रात 08:09 बजे
निर्जला एकादशी पूजा मुहूर्त: 25 जून, सुबह 05:25 बजे से 02:09 बजे तक

पानी पीने से टूट जाएगा निर्जला एकादशी व्रत?

यह कोई सामान्य एकादशी व्रत नहीं है. यह 24 एकादशी व्रतों में से एक मात्र ऐसा व्रत है, जिसमें अन्न और जल का सेवन नहीं किया जाता है. बाकी एकादशी को आप फल, जूस, पानी, दूध आदि ले सकते हैं, लेकिन यह तो निर्जला एकादशी बिना पानी के करते हैं. यदि आपने गलती से भी पानी का एक बूंद ग्रहण कर लिया तो आपका व्रत टूट जाएगा और वह निष्फल हो जाएगा.

निर्जला एकादशी व्रत के नियम

वेद व्यास जी की कथा के अनुसार, अधिकमास को लेकर साल की पूरी 25 एकादशी का व्रत न हो सके तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत करने से पूरे वर्ष की एकादशी का फल मिलता है.

निर्जला एकादशी व्रत करने वाला व्यक्ति स्नान के बाद एक बूंद भी जल ग्रहण न करें. यदि आपने किसी भी प्रकार से एक बूंद भी जल ग्रहण कर लिया तो वह व्रत भंग हो जाएगा. इसलिए जो लोग सोच रहे हैं ​कि थोड़ा पानी पीकर निर्जला एकादशी का व्रत रख लेंगे तो ऐसा संभव नहीं है.

5 पांडवों में से भीम ने व्यास जी से पूछा था कि आप कोई ऐसा उपाय बताएं, जिसके प्रभाव से अपने आप ही सदगति हो जाए. तो उन्होंने उनसे बोला कि तुम से साल के सभी एकादशी व्रत नहीं हो पाते तो तुम केवल एक निर्जला एकादशी व्रत कर लो. इस व्रत से ही पूरे सालभर की एकादशी व्रत के समान फल प्राप्त हो जाएंगे.

भीमसेन को बहुत भूख लगती थी और वे बिना खाए और पिए नहीं रख सकते थे. लेकिन निर्जला एकादशी पर उन्होंने न कुछ खाया और न ही जल ग्रहण किया. इस जरूरी एक नियम के साथ आपको अन्य सभी व्रत नियमों का पालन करना है.

केवल 2 बार जल उपयोग की अनुमति

वेद व्यास ने भीम को बताया कि निर्जला एकादशी में केवल 2 बार ही जल की अनुमति है. निर्जला एकादशी पर जब आप ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें, तब पहली बार जल का उपयोग कर सकते हैं. फिर जब व्रत संकल्प करेंगे, तो आचमन के लिए पानी का उपयोग करेंगे. स्नान और आचमन के अलावा फिर इस व्रत में जल ग्रहण नहीं करेंगे.

निर्जला एकादशी में पानी कब पिएं?

निर्जला व्रत में लोग रात 12 बजे के बाद या अगले दिन सूर्योदय के बाद पानी पी लेते हैं. लेकिन ऐसा करने से व्रत टूट जाता है. निर्जला एकादशी व्रत में ​हरि वासर खत्म होने पर ही पानी पीना चाहिए. हरि वासर पारण के प्रारंभ का समय या द्वादशी तिथि का पहला हिस्सा कहा जाता है. इसमें पारण नहीं करते हैं. हरि वासर के बाद ही पारण का नियम हैं. 26 जून को 01:42 AM पर निर्जला एकादशी का हरि वासर समाप्त होगा, ऐसे में आप इस समय के बाद जल ग्रहण कर सकते हैं.

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