कामाख्या मंदिर: साल में 3 दिन नहीं खुलते कपाट, प्रसाद में मिलता खून से लाल वस्त्र अंबुबाची
कामाख्या मंदिर के 4 बड़े रहस्य! प्रसाद में मिलता खून से लाल वस्त्र अंबुबाची
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Kamakhya Mandir Ambubachi Mela: असम में गुवाहाटी का कामाख्या मंदिर रहस्यों से भरा है. जून में 3 दिन इस मंदिर के कपाट बंद रहते हैं क्योंकि देवी रजस्वला रहती हैं. संभवत: यह ऐसा पहला मंदिर होगा. 3 दिन के बाद अंबुबाची मेला लगता है और भक्तों को प्रसाद में खून से लाल वस्त्र अंबुबाची मिलता है.
कामाख्या मंदिर के 4 बड़े रहस्य!
Kamakhya Temple Secrets: असम में नीलांचल की पहाड़ियों पर देवी कामाख्या का वास है. गुवाहाटी का कामाख्या मंदिर अपने रहस्यों के लिए जाना जाता है. आमलोगों में कामाख्या मंदिर तंत्र-मंत्र की साधना के लिए प्रसिद्ध है. देश और दुनियाभर के साधक कामाख्या मंदिर में तंत्र साधना के लिए आते हैं. लेकिन यहां पर लगने वाला अंबुबाची मेला विशेष है. यह साल में केवल एक बार लगता है, वह भी तब, जब मंदिर के कपाट 3 दिनों के लिए बंद होते हैं, उस समय देवी कामाख्या रजस्वला रहती हैं. यह मंदिर काफी रहस्यमयी है, इसके गर्भ गृह में देवी की कोई मूर्ति नहीं है. भक्तों को प्रसाद में खून से लाल हुआ वस्त्र अंबुबाची मिलता है. जो इसे पाता है, वह स्वयं को धन्य समझता है. इस साल यह अंबुबाची मेला 22 जून से शुरू होगा और 25 जून तक चलेगा.
कौन हैं देवी कामाख्या?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव जब शोक में देवी सती के पार्थिक शरीर को लेकर घूम रहे थे, तब भगवान विष्णु ने चक्र से उनके शरीर को 52 टुकड़ों में काट दिया, जो धरती पर 52 अलग-अलग जगहों पर गिरे थे. देवी सती की योनि इसी स्थान पर गिरा, जिससे यह स्थान शक्तिपीठ बन गया. तब से यहां पर देवी कामाख्या की पूजा होने लगी. इस तरह से देवी कमाख्या का उत्पत्ति हुई. देवी कमाख्या को सृजन और इच्छा की देवी कहा जाता है.
कामाख्या मंदिर के 4 बड़े रहस्य!
गर्भ गृह में नहीं है कोई मूर्ति
आपको जानकर हैरानी होगी कि कामाख्या मंदिर के गर्भ में देवी की कोई मूर्ति नहीं है. वहां पर एक चट्टान है, जिसमें दरार से जलधारा बहती रहती है. इसे योनिकुंड कहा जाता है. गर्भ गृह बहुत ही छोटा और गहरा है. सीढ़ियों से नीचे उतरकर अंधेरी गुफा में जाना होता है. भक्त उस प्राकृतिक चट्टान और बहते जल को स्पर्श करके देवी कामाख्या का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
साल में 3 दिन देवी रहती हैं रजस्वला
कामाख्या मंदिर की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि देवी कामाख्या साल में 3 दिन रजस्वला होती हैं यानि मासिक धर्म से गुजरती हैं. यह हर साल जून में होता है. इस वजह 3 दिनों तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं. संभवत: यह एक मात्र ऐसा देवी मंदिर है, जहां पर यह घटना होती है. मान्यता के अनुसार, इस समय धरती सबसे अधिक उपजाऊ होती है.
ब्रह्मपुत्र नदी का पानी होता जाता है लाल
लोगों की मान्यताएं हैं कि जब देवी कामाख्या रजस्वला रहती हैं तो उन 3 दिनों में मंदिर के पास से बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल रंग का हो जाता है. इस चमत्कार से भक्त आश्चर्यचकित होते हैं. इन तीन दिनों में अंबुबाची मेला लगता है. 3 दिनों के बाद फिर से पूजा पाठ होता है और मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं.
खून से लाल हो जाता है सफेद कपड़ा, प्रसाद में मिलता है अंबुबाची वस्त्र
देवी जब रजस्वला होती हैं तो गर्भ गृह के योनिकुंड के पास सफेद रंग के सूती कपड़े बिछा देते हैं. 3 दिन बाद जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तो वह कपड़े देवी के खून से लाल हो जाते हैं. उसे अंबुबाची वस्त्र या अंगोदक वस्त्र कहते हैं. उसे प्रसाद स्वरूप भक्तों को दिया जाता है.
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कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. धर्म में पचांग, पुराणों और शास्त्रों के आधार पर व्…और पढ़ें


