इन नक्षत्रों में विवाह मतलब जल्द बुलाएगा नीला ड्रम, सिंदूर लगाने के लिए लग्न का क्यों रखते

इन नक्षत्रों में विवाह मतलब जल्द बुलाएगा नीला ड्रम, सिंदूर लगाने के लिए लग्न का क्यों रखते

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इन नक्षत्रों में विवाह मतलब नीला डिब्बे की पुकार, सिंदूर के समय रखें यह ध्यान

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Inauspicious Nakshatras For Marriage: विवाह करने से पहले पंडितजी द्वारा एक शुभ तिथि तय कर दी जाती है, उसके बाद ही मांगलिक कार्यक्रम आरंभ किया जाता है. विवाह की तिथि तय करने के लिए कई चीजों का ध्यान रखा जाता है. साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि सिंदूर लगाते समय कौन सा लग्न पड़ रहा है. अगर इन सभी क्रियाओं में थोड़ी सभी भी गलती हो जाए तो वैवाहिक जीवन नरक बन जाता है.

Inauspicious Nakshatras For Marriage: सनातन धर्म में विवाह जैसे शुभ आयोजन केवल किसी विशिष्ट तिथि पर संपन्न होने वाले सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम ही नहीं हैं. ये शुभ आयोजन शुभ समय ग्रह-नक्षत्रों और तिथि की स्थिति के आधार पर निर्धारित किया जाता है. जब लड़का व लड़की के घरवालों की शादी की बातें पूरी हो जाती हैं, तब पंडितजी को बुलाया जाता है और फिर वह दोनों की कुंडली की गणना करते हैं और पंचांग देखकर एक शुभ तिथि विवाह के लिए दोनों परिवारों को दे देते हैं. शुभ विवाह की तिथि को तय करने के लिए पंचांग में ग्रह-नक्षत्र की चाल, लग्न, राहुकाल, भद्रा या शुभ व अशुभ समेत कई चीजें देखी जाती है और फिर उस तरह शुभ मुहूर्त में विवाह करवाया जाता है.

हाल ही में शुरू हुए शादी के मौसम के साथ, देशभर में शादियां जोरों से चल रही हैं और फिर 17 मई से खरमास की वजह से शुभ व मांगलिक कार्यक्रम पर रोक लग जाएगी. किन एक महत्वपूर्ण बात जो हर कोई नहीं जानता, वह यह है कि चाहे कुछ नक्षत्र कितने भी शुभ क्यों ना हों लेकिन वे विवाह के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते. यह बात झारखंड के देवगढ़ के प्रसिद्ध ज्योतिषी पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने स्पष्ट रूप से कही है.

नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना जाता है. हालांकि यह कई शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ होता है, लेकिन विवाह के लिए यह नक्षत्र उपयुक्त नहीं माना जाता. इसी प्रकार, विद्वानों का कहना है कि पूर्वा फाल्गुनी और रेवती नक्षत्रों में होने वाले विवाह भी शुभ नहीं माने जाते. वे चेतावनी देते हैं कि इन नक्षत्रों में विवाह होने पर वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव, तनाव और अस्थिरता जैसी समस्याओं की आशंका रहती है और बात तलाक तक पहुंच जाती है.

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पंडितजी का कहना है कि केवल नक्षत्र ही नहीं बल्कि विवाह पंचक काल, भद्रा या राहुकाल आदि अशुभ समय में नहीं किया जाता है. अगर इन अशुभ काल में किसी का विवाह होता है तो जीवन भर वैवाहिक जीवन में नकारात्मक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. इसीलिए मुहूर्त तय करते समय इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है.

सिर्फ नक्षत्र ही नहीं, बल्कि लग्न भी विवाह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सिंदूर लगाते समय स्थिर लग्न का होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वृषभ, सिंह और कुंभ जैसे स्थिर लग्नों में सिंदूर लगाने से दंपत्ति के जीवन में स्थिरता और सुख बढ़ता है. कहा जाता है कि सही लग्न का चुनाव वैवाहिक जीवन में प्रेम और समझ को मजबूत करता है.

मॉर्डन लाइफस्टाइल में बदलाव के बावजूद, कई लोग आज भी शादी जैसे महत्वपूर्ण फैसले लेते समय ज्योतिषीय सलाह का पालन करते हैं. केवल शादी की तारीख तय करना ही काफी नहीं है. यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सही नक्षत्र, तिथि और लग्न सभी एक साथ मिलें। क्योंकि सही समय पर होने वाली शादी जीवन में खुशियां लाती है, वहीं विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि गलत समय पर होने वाली शादी समस्याएं पैदा कर सकती है.

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