Vakratunda Sankashti Chaturthi 2025: वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी आज, शिव परिवार की पूजा का उत्तम दिन, बना 'त्रिवेणी योग', जीवन में होगी उन्नति

Vakratunda Sankashti Chaturthi 2025: वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी आज, शिव परिवार की पूजा का उत्तम दिन, बना 'त्रिवेणी योग', जीवन में होगी उन्नति

Vakratunda Sankashti Chaturthi 2025: आज 10 अक्टूबर शुक्रवार को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी है. आज के दिन वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर ‘त्रिवेणी योग’ बना है. ‘त्रिवेणी योग’ यानि कि वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी के साथ करवा चौथ और मासिक कार्तिगाई है. इन तीनों में ही शिव परिवार की पूजा करते हैं. इस वजह से आज शिव परिवार की पूजा का उत्तम दिन है. पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आज है. आज मासिक कार्तिगाई, वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी व्रत और करवा चौथ का व्रत साथ रखा गया है.

द्रिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार को सूर्य कन्या राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय सुबह 10 बजकर 41 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 8 मिनट तक रहेगा.

आज के दिन वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी भी मनाई जा रही है, जिसमें भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप की आराधना की जाती है. वक्रतुंड, जिसका अर्थ है टेढ़ी सूंड वाले गणेश, गणपति के अष्टविनायक रूपों में प्रथम हैं.

मुद्गल पुराण के अनुसार, गणपति ने मत्सरासुर नामक दैत्य का वध करने के लिए यह रूप धारण किया था. दैत्य के क्षमा मांगने पर गणेश जी ने उसे जीवन दान दिया. इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा करते हैं और व्रत रखकर विघ्नहर्ता से आशीर्वाद मांगते हैं. गण​पति कृपा से व्यक्ति की उन्नति होती है.

करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. हालांकि, अमांत पंचांग का पालन करने वाले क्षेत्रों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे आश्विन माह में मनाया जाता है. यह अंतर केवल माह के नाम का होता है, लेकिन तिथि सभी जगह एक ही रहती है.

इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए सूर्योदय से चंद्र दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं. भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की पूजा की जाती है.

व्रत का समापन चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने और मिट्टी के करवा (करक) से जल चढ़ाने के बाद होता है. इस व्रत में करवा का महत्व विशेष होता है, जिसे पूजा के बाद ब्राह्मण या सुहागन को दान दिया जाता है. कुछ क्षेत्रों में इसे करक चतुर्थी भी कहा जाता है.

मासिक कार्तिगाई का महत्व

मासिक कार्तिगाई, जिसे कार्तिगाई दीपम भी कहते हैं, हर माह तब मनाया जाता है, जब कार्तिगाई नक्षत्र प्रबल होता है. यह पर्व भगवान शिव और उनके पुत्र मुरुगन (कार्तिकेय) को समर्पित है.

पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु को अपनी श्रेष्ठता दिखाने के लिए स्वयं को अनंत ज्योति में परिवर्तित किया था. कार्तिक माह में पड़ने वाला कार्तिगाई दीपम विशेष महत्व रखता है.

अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव

तमिलनाडु के तिरुवन्नामलई में इस अवसर पर विशाल महादीपम जलाया जाता है, जो दूर-दूर तक दिखाई देता है. हजारों श्रद्धालु वहां एकत्र होकर भगवान शिव की पूजा करते हैं और दीप जलाकर अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव मनाते हैं.

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