Snake Bite: पाली की अफसाना को 6 महीने में 8 बार सांप ने काटा, क्या कुंडली में छिपा है इसका रहस्य या बस इत्तेफाक है?
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Snake Bite Superstition: पाली की महिला अफसाना बानो का मामला ज्योतिष और विज्ञान दोनों नजरियों से अलग-अलग तरह से समझाया जा रहा है. एक ओर ज्योतिषी इसे ग्रह-नक्षत्रों का खेल बताते हैं, वहीं वैज्ञानिक इसे सामान्य घटना मानते हैं.
सांप काटने के ज्योतिषीय कारणज्योतिष के अनुसार सर्पदंश और ग्रह-नक्षत्र
पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बतात हैं कि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि और चंद्र के खास योग को सर्पदंश से जोड़ा जाता है. यदि वृश्चिक राशि में चंद्रमा हो और उस पर शनि की दृष्टि पड़े तो इसे विषयोग कहा जाता है. ज्योतिष में यह माना जाता है कि ऐसी स्थिति बार-बार बनती है तो व्यक्ति को सांप काटने या सर्पभय की समस्या हो सकती है.
अंकशास्त्र के अनुसार मान्यता है कि सर्पदंश के पीछे चंद्र और राहु का ग्रहण योग जिम्मेदार होता है. उनके अनुसार मंगल और राहु-शनि की युति भी ऐसी घटनाओं को बढ़ा सकती है. ऐसे योग में व्यक्ति को खासकर चंद्र ग्रहण के समय सावधानी रखनी चाहिए.
मेडिकल साइंस का दृष्टिकोण
महिला हर बार इसलिए बच जाती हैं क्योंकि समय पर अस्पताल पहुंच जाती हैं. सर्पदंश के बाद ब्लड टेस्ट से पता लगाया जाता है कि सांप जहरीला था या नहीं, अगर ब्लड में क्लॉट बन जाता है तो सांप जहरीला नहीं था, लेकिन अगर क्लॉट नहीं बनता तो डॉक्टर तुरंत एंटी-वेनम देकर इलाज शुरू करते हैं. बार-बार सांप काटने से शरीर में कुछ हद तक एंटीबॉडीज बनने लगती हैं, जिससे जीवन बचना आसान हो जाता है.
विज्ञान की नजर से बार-बार सांप का काटना महज संयोग है. बारिश के मौसम में सांप अपने बिल छोड़कर बाहर आते हैं क्योंकि उनमें पानी भर जाता है. भारत में पाए जाने वाले सिर्फ 10-15 प्रतिशत सांप ही जहरीले होते हैं. असल में सांप तभी काटता है जब उसे खतरा महसूस होता है. ऐसे में घबराने की बजाय तुरंत इलाज कराना ही सबसे बड़ा बचाव है.
धार्मिक मान्यताएं और अनुष्ठान
ज्योतिष और विज्ञान से परे भारत में धार्मिक मान्यताओं का भी गहरा असर है. महाराष्ट्र के नासिक स्थित त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में हर साल नागबली पूजा होती है. यहां पर मान्यता है कि अगर किसी के द्वारा जाने-अनजाने में सर्प हत्या हो जाती है तो यह पूजा करवाने से सर्पदोष से मुक्ति मिलती है. इस अनुष्ठान में सांप की मूर्ति बनाकर उसका अंतिम संस्कार किया जाता है, ताकि दोष दूर हो और जीवन में शांति बनी रहे.


