Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि आज से, पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानिए महत्व और पूजन विधि

Shardiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि आज से, पहले दिन करें मां शैलपुत्री की पूजा, जानिए महत्व और पूजन विधि

Shardiya Navratri 2025: आज यानी 22 सितंबर को मां दुर्गे के सबसे पवित्र दिन शारदीय नवरात्रि का पहला दिन है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है. आज मां भक्त कलश स्थापना करके मां दुर्गा की पूजा करेंगे. शारदीय नवरात्रि में 9 दिनों तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा करने का विधान है. इस साल भी शारदीय नवरात्रि 9 नहीं, 10 दिनों की है. बता दें कि, नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा करते हैं. नोएडा के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी से जानते हैं मां शैलपुत्री की पूजन का महत्व क्या है? शैलपुत्री को कौन से भोग लगाएं? किन मंत्रों के जप से प्रसन्न होंगी मां शैलपुत्री?

मां शैलपुत्री की पूजा विधि

सुबह उठकर स्नान करें और साफ पीले रंग के वस्त्र धारण करें. मां शैलपुत्री को पीला रंग अति प्रिय है. मां शैलपुत्री की पूजा करने से पहले चौकी पर मां शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा को स्थापित करें. इसके बाद उस पर एक कलश स्थापित करें. कलश के ऊपर नारियल और पान के पत्ते रख कर एक स्वास्तिक बनाएं. इसके बाद कलश के पास अंखड ज्योति जला कर ‘ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम:’ मंत्र का जाप करें. इसके बाद मां को सफेद फूल की माला अर्पित करें. फिर मां को सफेद रंग का भोग जैसे खीर या मिठाई लगाएं. इसके बाद माता कि कथा सुनकर उनकी आरती करें. शाम को मां के समक्ष कपूर जलाकर हवन करें.

इन मंत्रों के जप से प्रसन्न होंगी मां शैलपुत्री

ऊं देवी शैलपुत्र्यै नमः।।
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।।
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।

मां शैलपुत्री के पूजन का महत्व

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है. पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने की वजह से मां दुर्गा के इस रूप को शैलपुत्री कहा जाता है. माता शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल है, जबकि मां के बाएं हाथ में कमल का फूल है. मां शैलपुत्री की सवारी बैल है. मां शैलपुत्री का यह रूप अत्यंत ही दिव्य और मनमोहक है. मान्यताओं के अनुसार, माता शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्रमा के बुरे प्रभाव दूर हो जाते हैं.

मां शैलपुत्री को लगाएं ये भोग

नवरात्रि के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है. देवी को सफेद रंग बेहद प्रिय है, इसलिए उन्हें सफेद रंग की चीजों का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है. अगर आप इस नवरात्रि पर माता शैलपुत्री की पूर्ण कृपा प्राप्त करना चाहते हो, तो उन्हें सफेद बर्फी, घर पर दूध से बनी शुद्ध मिठाई, गाय के घी से बना हलवा, रबड़ी या मावे के लड्डू आदि चीजों का भोग लगाएं.

मां शैलपुत्री की पौराणिक कथा

बहुत समय पहले की बात है जब प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया. दक्ष ने इस यज्ञ में सारे देवताओं को निमंत्रित किया, लेकिन अपनी बेटी सती और पति भगवान शंकर को यज्ञ में नहीं बुलाया. सती अपने पिता द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने के लिए बेचैन हो उठीं. इसपर भगवान शिव ने सती से कहा कि अगर प्रजापति ने हमें यज्ञ में नहीं आमंत्रित किया है तो ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है. लेकिन इसके बाद सती की जिद को देखकर शिवजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की स्वीकृति दे दी.

सती जब घर पहुंचीं तो उनकी बहनों ने उनपर कई तरह से कटाक्ष किए. साथ ही भगवान शंकर का भी तिरस्कार किया. दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे. इससे सती को काफी दुःख पहुंचा. इस अपमान से दुखी होकर सती ने हवन की कूदकर अपने प्राण दे दिए. इसपर भगवान शिव ने यज्ञ भूमि में प्रकट होकर सबकुछ सर्वनाश कर दिया. सती का अगला जन्म देवराज हिमालय के यहां हुआ. हिमालय के घर जन्म होने की वजह से उनका नाम शैलपुत्री पड़ा.

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