Ravi Pradosh Vrat Katha: आज रवि प्रदोष व्रत, यहां पढ़ें संपूर्ण पौराणिक प्रदोष व्रत कथा
Ravi Pradosh: आज रवि प्रदोष व्रत, यहां पढ़ें संपूर्ण पौराणिक प्रदोष व्रत कथा
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Ravi Pradosh Vrat Katha: आज रवि प्रदोष तिथि का व्रत किया जा रहा है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और ग्रहों का शुभ फल प्राप्त होता है. इस दिन व्रत रखने के साथ रवि प्रदोष व्रत कथा का श्रवण और पाठ करने का भी विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार प्रदोष व्रत कथा भगवान शिव की महिमा, उनकी कृपा और भक्ति के प्रभाव का वर्णन करती है. मान्यता है कि जो श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद प्रदोष व्रत कथा का श्रवण करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
Ravi Pradosh Vrat Katha In Hindi: आज रवि प्रदोष तिथि का व्रत किया जा रहा है. सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. जब त्रयोदशी तिथि रविवार को पड़ती है, तब उस तिथि को रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है. इस दिन व्रत रखने के साथ रवि प्रदोष व्रत कथा का श्रवण और पाठ करने का भी विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता है कि बिना कथा सुने या पढ़े प्रदोष व्रत की पूजा अधूरी मानी जाती है. साथ ही कथा का श्रवण करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है. यहां पढ़ें संपूर्ण रवि प्रदोष व्रत कथा…
रवि प्रदोष व्रत कथा | Ravi Pradosh Vrat Katha
एक गांव में गरीब ब्राह्मण निवास करता था. उसकी साध्वी स्त्री प्रदोष व्रत किया करती थी और एक पुत्र भी था. एक समय की बात है, वह पुत्र गंगा स्नान करने के लिए गया हुआ था. दुर्भाग्यवश रास्ते में चोरों ने उसे घेर लिया और वे कहने लगे कि हम तुम्हें मारेंगे नहीं, तुम अपने पिता के गुप्त धन के बारे में हमें बतला दो. बालक दीनभाव से कहने लगा कि बंधुओं! हम अत्यंत दु:खी दीन हैं. हमारे पास धन कहां है?
तब चोरों ने कहा कि तेरे इस पोटली में क्या बंधा है? बालक ने निसंकोच बताया कि मेरी मां ने मेरे लिए रोटियां दी हैं. यह सुनकर चोरों ने अपने साथियों से कहा कि साथियों! यह बहुत ही दीन-दुखी मनुष्य है इसलिए हम किसी और को लूटेंगे. इतना कहकर चोरों ने उस बालक को जाने दिया.
बालक वहां से चलते हुए एक नगर में पहुंचा. नगर के पास एक बरगद का पेड़ था. वह बालक उसी बरगद के वृक्ष की छाया में सो गया. उसी समय उस नगर के सिपाही चोरों को खोजते हुए उस बरगद के वृक्ष के पास पहुंचे और बालक को चोर समझकर बंदी बना राजा के पास ले गए. राजा ने उसे कारावास में बंद करने का आदेश दिया.
ब्राह्मणी का लड़का जब घर नहीं लौटा, तब उसे अपने पुत्र की बड़ी चिंता हुई. अगले दिन प्रदोष व्रत था. ब्राह्मणी ने प्रदोष व्रत किया और भगवान शंकर से मन-ही-मन अपने पुत्र की कुशलता की प्रार्थना करने लगी. भगवान शंकर ने उस ब्राह्मणी की प्रार्थना स्वीकार कर ली. उसी रात भगवान शंकर ने राजा को स्वप्न में आदेश दिया कि वह बालक चोर नहीं है, उसे ब्रह्म मुहूर्त में ही छोड़ दें अन्यथा तुम्हारा सारा राज्य-वैभव नष्ट हो जाएगा.
सुबह राजा ने शिवजी की आज्ञानुसार बालक को कारावास से मुक्त कर दिया गया. बालक ने अपनी सारी कहानी राजा को सुनाई. सारा वृत्तांत सुनकर राजा ने अपने सिपाहियों को उस बालक के घर भेजा और उसके माता-पिता को राजदरबार में बुलाया. उसके माता-पिता बहुत ही भयभीत थे. राजा ने उन्हें भयभीत देखकर कहा कि आप भयभीत ना हों. आपका बालक निर्दोष है. राजा ने ब्राह्मण को 5 गांव दान में दिए, जिससे कि वे सुखपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकें. इस तरह ब्राह्मण आनंद से रहने लगा. शिवजी की दया से उसकी दरिद्रता दूर हो गई. इसलिए जो भी मनुष्य रवि प्रदोष व्रत को करता है, वह सुखपूर्वक और निरोगी होकर अपना पूर्ण जीवन व्यतीत करता है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


