Navratri 2025 Day 8, Maa Kalratri Puja: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां कालरात्रि पूजा, जानें महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, भोग और आरती

Navratri 2025 Day 8, Maa Kalratri Puja: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां कालरात्रि पूजा, जानें महत्व, पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, भोग और आरती

Shardiya Navratri 2025 Day 8, Maa Kalratri Puja : शारदीय नवरात्रि का आज आठवां दिन है और इस दिन मां दुर्गा की सातवीं शक्ति माता कालरात्रि की पूजा अर्चना की जाएगी. माता कालरात्रि को ही महायोगिनी, शुभंकरी और महायोगीश्वरी भी कहा जाता है और नवरात्रि की इस तिथि को निशा की रात भी कहा जाता है. मान्यता है कि मां कालरात्रि अपने भक्तों के सभी भय का नाश करती हैं और शत्रुओं का संहार कर उनकी रक्षा करती हैं. साथ ही माता की पूजा करने से भक्तों को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है. तंत्र मंत्र और साधना करने वाले माता कालरात्रि की विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं. आइए जानते हैं माता कालरात्रि की पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती…

शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी तिथि पर जहां सरस्वती आह्वान का विधान है, वहीं यह तिथि मां कालरात्रि की पूजा के लिए भी विशेष मानी जाती है. मां कालरात्रि की पूजा करने से भूत-प्रेत, जादू-टोना और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं. साथ ही शनि, राहु और केतु ग्रह से उत्पन्न कष्ट इस दिन की पूजा से शांत होते हैं. माता की पूजा से जीवन की हर कठिनाई में साहस और शक्ति मिलती है और भक्त को आत्मविश्वास, विजय और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इस दिन पूजा करने से साधक को सर्वसिद्धि और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है. मां कालरात्रि की पूजा दिन के साथ-साथ रात के समय में भी की जाती है. ज्यादातर तंत्र साधना करने वाले साधु संत रात के समय ही मां कालरात्रि की पूजा करते हैं.

मां कालरात्रि की पूजा का मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 04:38 ए एम से 05:26 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 11:48 ए एम से 12:36 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:11 पी एम से 02:59 पी एम

मां कालरात्रि का स्वरूप

मां कालरात्रि का स्वरूप उग्र और भीषण है, लेकिन वे भक्तों को अभय प्रदान करती हैं. मां कालरात्रि कृष्णवर्णा (गहरे श्याम रंग) हैं. इनकी चार भुजाएं हैं, एक हाथ में खड्ग (तलवार), दूसरे में वज्र या आयुध और दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं. माता का वाहन गर्दभ (गधा) है. माता के बाल बिखरे हुए, गले में विद्युत् जैसी ज्योति, शरीर पर तेल का लेप और गले में माला है. माता का स्वरूप देखने में भले ही उग्र है, लेकिन भक्तों के लिए मंगलकारी और शुभफलदायिनी हैं. मां कालरात्रि को ही शुभंकरी कहा गया है, क्योंकि इनकी कृपा से साधक के जीवन में शुभता आती है.

मां कालरात्रि का प्राकट्य

पुराणों और देवी-माहात्म्य के अनुसार, जब शुम्भ-निशुम्भ और रक्तबीज जैसे असुर अत्याचार करने लगे, तब देवी चण्डिका ने अपने क्रोध से एक उग्र रूप प्रकट किया. उस उग्रतम शक्ति को ही मां कालरात्रि कहा गया. इन्होंने असुरों का संहार कर देवताओं और ऋषियों को भयमुक्त किया. विशेष रूप से रक्तबीज का वध मां कालरात्रि के सहयोग से ही संभव हुआ, क्योंकि रक्तबीज के रक्त की हर बूंद से नया दैत्य उत्पन्न हो जाता था. इसलिए मां कालरात्रि ने अपना विशाल मुख फैलाकर उसके रक्त को धरती पर गिरने से पहले ही पी लिया और इस प्रकार देवताओं को विजय दिलाई.

मां कालरात्रि को अर्पित भोग

मां कालरात्रि को गुड़, सूजी का हलवा और काले चने, गन्ना, शहद और शमीपत्र के साथ नैवेद्य अर्पित कर सकते हैं. इन भोगों से मां प्रसन्न होकर भक्तों को असीम शक्ति और आशीर्वाद प्रदान करती हैं.

मां कालरात्रि मंत्र

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥

ध्यान मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टक भूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

बीज मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

मां कालरात्रि पूजा विधि महासप्तमी पूजा

आज सुबह स्नान कर घर के पूजा स्थान को साफ करें. इस दिन पूजा में लाल, नीले या काले रंग का वस्त्र विशेष शुभ माना गया है. देवी कालरात्रि का चित्र/प्रतिमा स्थापित करें. माता का यह स्वरूप कृष्णवर्ण, चार भुजाएं, गर्दभ वाहन पर विराजमान होता है. इसके बाद चारों तरफ गंगाजल से छिड़काव करें और माता को गुड़, शहद, गन्ना, लाल/काले पुष्प, जौ, शमीपत्र, धूप, दीप, चंदन, नैवेद्य अर्पित करें. देवी का ध्यान कर आवाहन करें और दीप प्रज्वलित करें. कपूर, दीपक और अगरबत्ती जलाकर पूजा आरंभ करें. शुद्ध चित्त से मंत्र जप करें.

मां कालरात्रि आरती

कालरात्रि जय-जय-महाकाली।
काल के मुह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतार॥
पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥
खडग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥
कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥
रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥
उस पर कभी कष्ट ना आवें।
महाकाली माँ जिसे बचाबे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि माँ तेरी जय॥

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