Mauni Amavasya 2026 Pitra Dosh Upay: पितृ दोष से जीवन में मची है उथल-पुथल? मौनी अमावस्या पर करें यह अचूक उपाय, नाराज पितर होंगे शांत, तेजी से होगी तरक्की

Mauni Amavasya 2026 Pitra Dosh Upay: पितृ दोष से जीवन में मची है उथल-पुथल? मौनी अमावस्या पर करें यह अचूक उपाय, नाराज पितर होंगे शांत, तेजी से होगी तरक्की

Mauni Amavasya 2026 Pitra Dosh Upay: मौनी अमावस्या 18 जनवरी रविवार को है. यह माघ या माघी अमावस्या भी कहलाती है क्योंकि यह माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को होती है. मौनी अमावस्या के दिन स्नान और दान का विधान है, लेकिन इस दिन आप अपने नाराज पितरों को शांत करने का उपाय कर सकते हैं. जिन लोगों को पितृ दोष होता है, उनके जीवन में उथल पुथल मचा रहता है. अतृप्त पितर अपने परिवार के लोगों को तरह-तरह से परेशान करके अपनी नाराजगी का संकेत देते हैं. पितृ दोष की वजह से लोगों की उन्नति रुक जाती है. आप मौनी अमावस्या पर एक अचूक उपाय से पितृ दोष से मुक्ति पास सकते हैं. आइए जानते हैं उस उपाय के बारे में.

मौनी अमावस्या पर पितृ दोष मुक्ति का अचूक उपाय

काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट के अनुसार, पितरों की शांति के लिए अमावस्या तिथि, पितृ पक्ष और मार्गशीर्ष माह उत्तम होते हैं. इन दिनों में आप अपने पितृ दोष की शांति करा सकते हैं. जिन लोगों को पितृ दोष हो और वे गया जी नहीं जा सकते हैं तो उनको त्रिपिंडी श्राद्ध जरूर करा लेना चाहिए. पितृ दोष से मुक्ति का अचूक उपाय त्रिपिंडी श्राद्ध ही होता है. यदि आप गया जी जाकर अपने पितरों के लिए श्राद्ध, पिंडदान आदि कर लेते हैं तो उससे ब​ढ़िया कुछ भी नहीं है. गया में श्राद्ध और पिंडदान करने से पितर तृप्त हो जाते हैं, शांत हो जाते हैं और दोष मिट जाता है.

त्रिपिंडी श्राद्ध क्या है?

ज्योतिषाचार्य भट्ट बताते हैं कि व्यक्ति पर कैसा भी पितृ दोष हो, त्रिपिंडी श्राद्ध करा देने से दूर हो जाता है. त्रिपिंडी श्राद्ध में मुख्य तीन पिंड बनाए जाते हैं. एक पिंड सृष्टि के रचनाकार ब्रह्म देव के लिए, एक पिंड देवों के देव महादेव के लिए और एक पिंड मृत्यृ के देवता यमराज के लिए बनाया जाता है.

इस तीन के अलावा एक पिंड प्रेतों के लिए बनाया जाता है. ये चार पिंड बनाने के बाद 16 पिंड बनाए जाते हैं. ये 16 पिंड अपने पूर्वजों के लिए होते हैं. आपको अपने जिन पूर्वजों का नाम नहीं पता, जिनके मरने की तिथि नहीं मालूम, जो अकाल मृत्यु का शिकार हो गए, दुर्घटना आदि में जिनकी मृत्यु हो गई, उन सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों के लिए ये 16 पिंड बनाए जाते हैं. आम श्राद्ध की प्रक्रिया से त्रिपिंडी श्राद्ध का प्र​क्रिया लंबी होती है, इसमें काफी समय लगता है. त्रिपिंडी श्राद्ध में कुल 20 पिंड बनाने के बाद पूजन, अर्चना होता है. अंत में इनका विसर्जन कर दिया जाता है.

किस समय करें त्रिपिंडी श्राद्ध?

त्रिपिंडी श्राद्ध आप किसी भी माह की अमावस्या तिथि को कर सकते हैं. इसके अलावा किसी भी महीने के कृष्ण की 15 ति​थियों में इसे कराया जा सकता है. त्रिपिंडी श्राद्ध चैत्र माह के कृष्ण पक्ष, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष और पितृ पक्ष में कराना अच्छा रहता है. अमावस्या तिथियां पितरों के लिए होती हैं, इस दिन पितर धरती पर आते हैं ताकि उनकी संतान उनको तृप्त करे.

त्रिपिंडी श्राद्ध कहां पर होता है?

शास्त्रों में त्रिपिंडी श्राद्ध कराने के लिए निश्चित स्थान बताया गया है. भूलकर भी त्रिपिंडी श्राद्ध घर पर नहीं कराना चाहिए. जिन जगहों से गंगा प्रभावित हो रही हैं, उन जगहों पर आप त्रिपिंडी श्राद्ध करा सकते हैं. मोक्ष की नगरी काशी त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए उत्तम स्थान है. काशी में पिशाचमोचन स्थान है, जहां पर त्रिपिंडी श्राद्ध कराया जाता है, उसे मिनी गया कहा जाता है. वाराणसी के अलावा त्रिपिंडी श्राद्ध हरिद्वार और प्रयागराज में भी कराया जा सकता है. पितृ दोष से मुक्ति मिलने के बाद कई प्रकार के कष्ट मिट जाते हैं. व्यक्ति अपने जीवन में तरक्की करता है.

Source link

Previous post

पितरों का आशीर्वाद चाहिए? मौनी अमावस्या पर कर लिए 6 उपाय तो पितृदोष, गरीबी और अशांति खुद-ब-खुद हो जाएगी दूर

Next post

Chaturgrahi Yog 2026: 17 जनवरी से बन रहा चतुर्ग्रही योग, इन 4 राशिवालों को होगा बंपर लाभ, ​करियर में उन्नति के संकेत, रहेगा भाग्य का साथ!

You May Have Missed