Last Sawan Sunday 2025: सावन के अंतिम रविवार को कई शुभ योग, इस मुहूर्त में पूजा करने से मिलेगी सफलता, जानें व्रत के लाभ
रवि योग का महत्व
रवि योग ज्योतिष में एक शुभ योग है. यह योग तब बनता है जब चंद्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से चौथे, छठे, नौवें, 10वें और 13वें स्थान पर होता है. इस दिन आप कोई भी शुभ कार्य की शुरुआत कर सकते हैं. निवेश, यात्रा, शिक्षा या व्यवसाय से संबंधित काम की शुरुआत करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. इस योग में सूर्यदेव की पूजा अर्चना करने से कुंडली में सूर्यदेव की स्थिति मजबूत होती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है.
सावन के अंतिम रविवार को पूजा मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर के 12 बजे से शुरू होकर 12 बजकर 54 मिनट तक रहेगा और राहुकाल का समय शाम के 5 बजकर 30 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा. सूर्य पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे उत्तम माना जाता है.
3 अगस्त को दिन रविवार भी पड़ रहा है. अग्नि और स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि रविवार के दिन व्रत रखने से जीवन में सुख, समृद्धि, अरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है. वहीं, इस व्रत की शुरुआत आप किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से शुरू कर सकते हैं. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी माना जाता है जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है.
रविवार को पूजा करने की विधि
व्रत शुरू करने के लिए आप रविवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें और मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें. उसके बाद एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें, फिर व्रत कथा सुनें और सूर्य देव को तांबे के बर्तन में जल भरकर उसमें फूल, अक्षत और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें. ऐसा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. इसके अलावा, इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने और सूर्य देव के मंत्र “ऊं सूर्याय नमः” या “ऊं घृणि सूर्याय नमः” का जप करने से भी विशेष लाभ मिलता है. रविवार के दिन गुड़ और तांबे के दान का भी विशेष महत्व है. इन उपायों को करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता मिलती है.
इस दिन एक समय बिना नमक का भोजन करें. रविवार के दिन एक समय बिना नमक का भोजन करें. रविवार के दिन काले या नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए. इस दिन मांस-मदिरा का सेवन, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना, बाल या दाढ़ी कटवाना, तेल मालिश करना और तांबे के बर्तन बेचना भी वर्जित माना गया है. व्रत का उद्यापन 12 व्रतों के बाद किया जाता है.


