January Pradosh Vrat 2026: ध्रुव योग में शुक्र प्रदोष आज, 2 घंटे 42 मिनट का है शुभ मुहूर्त, जानें पूजा विधि, मंत्र, आरती, महत्व
शुक्र प्रदोष मुहूर्त
- माघ कृष्ण त्रयोदशी का प्रारंभ: 15 जनवरी, गुरुवार, रात 08:16 बजे से
- माघ कृष्ण त्रयोदशी का समापन: 16 जनवरी, शुक्रवार, रात 10:21 बजे
- प्रदोष पूजा का मुहूर्त: 05:47 पी एम से 08:29 पी एम के बीच
- निशिता मुहूर्त: 17 जनवरी को 12:04 ए एम से 12:58 ए एम तक
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम के समय में सूर्यास्त के बाद करते हैं. उस समय को प्रदोष काल कहा जाता है. इस समय में पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं.
प्रदोष पूजा मंत्र
ओम नम: शिवाय
ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम्।
उर्व्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:।।
प्रदोष व्रत और पूजा विधि
- आज ब्रह्म मुहूर्त 05:27 ए एम से 06:21 ए एम के बीच स्नान कर लें. उसके बाद साफ कपड़े पहनें. फिर हाथ में जल और फूल लेकर व्रत और शिव पूजा का संकल्प करें.
- सबसे पहले सूर्य देव को जल चढ़ाएं और गणेश जी की पूजा करें. उसके बाद भगवान शिव की दैनिक पूजा कर लें. दिनभर फलाहार पर रहें. दोपहर में सोना मना है.
- प्रदोष मुहूर्त के समय में आप शिव मंदिर जाएं या घर पर ही पूजा का प्रबंध कर लें. पवित्र जल में गंगाजल मिला लें और उससे शिवलिंग का जलाभिषेक करें.
- इसके बाद शिवजी को बेलपत्र, चंदन, फूल, फल, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, शहद, नैवेद्य आदि चढ़ाएं. इस दौरान ओम नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करते रहें. एक घी की दीपक जलाएं और महादेव को अर्पित करें. माता गौरी, गणेश जी, भगवान कार्तिकेय, नंदी की भी पूजा करें.
- अब आप शिव चालीसा पढ़ें और शुक्र प्रदोष व्रत कथा सुनें. उसके बाद घी के दीपक या कपूरे से शिव जी की आरती करें. पूजा के समापन के समय क्षमा प्रार्थना करें.
- रात्रि के समय जागरण करें. कल सुबह सूर्योदय के बाद स्नान करके पूजा करें. दान दक्षिणा दें. उसके बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.
शिव आरती
ओम जय शिव ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा॥ ओम जय शिव…
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ओम जय शिव…
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे॥ ओम जय शिव…
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी॥ ओम जय शिव…
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ओम जय शिव…
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥ ओम जय शिव…
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥ ओम जय शिव…
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी॥ ओम जय शिव…
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ओम जय शिव…
कर्पूरगौरं मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।


