Chandra Grahan 2025: पितृ दोष और कालसर्प योग से छुटकारे के लिए चंद्रग्रहण 2025 है सबसे उत्तम समय

Chandra Grahan 2025: पितृ दोष और कालसर्प योग से छुटकारे के लिए चंद्रग्रहण 2025 है सबसे उत्तम समय

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Chandra Grahan 2025: साल 2025 का चंद्रग्रहण सिर्फ आकाशीय घटना नहीं बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाला खास अवसर है. पितृ दोष और कालसर्प योग से परेशान लोग इस समय पूजा-पाठ और सही उपाय करके मुक्ति पा सकते हैं. …और पढ़ें

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पितृ दोष और कालसर्प योग से छुटकारे के लिए चंद्रग्रहण 2025 है सबसे उत्तम समयचंद्र ग्रहण 2025 उपाय
Chandra Grahan 2025: चंद्रग्रहण को हमेशा से ही खास माना गया है. सिर्फ खगोल विज्ञान ही नहीं बल्कि ज्योतिष शास्त्र में भी इसका बड़ा महत्व बताया गया है. साल 2025 का चंद्रग्रहण उन लोगों के लिए बेहद खास रहने वाला है जिनके जीवन में पितृ दोष या कालसर्प योग की बाधा मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप, तर्पण और दान-पुण्य करने से न केवल नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आता है. चंद्रग्रहण के दौरान किया गया आध्यात्मिक और धार्मिक कार्य कई गुना फल देता है. यही कारण है कि इसे पितृ दोष और कालसर्प योग से मुक्ति पाने का शुभ समय कहा जाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

पितृ दोष और कालसर्प योग का असर
पितृ दोष तब माना जाता है जब पूर्वजों की आत्मा संतुष्ट नहीं होती या उनके अधूरे काम पूरे नहीं हो पाते. इसकी वजह से व्यक्ति के जीवन में अचानक रुकावटें, आर्थिक परेशानियां, मानसिक तनाव और कई बार अनजाने दुःख देखने को मिलते हैं.

चंद्रग्रहण में किए जाने वाले उपाय

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल को खास तौर पर पूजा-पाठ और साधना के लिए शुभ माना जाता है.

1. पितरों का तर्पण और जल अर्पित करने से पितृ दोष का असर कम होता है.
2. राहु-केतु से जुड़े मंत्रों का जाप करने और नाग देवता या हनुमान जी की पूजा करने से कालसर्प योग का असर घटता है.
3. ग्रहण के दौरान अगर कोई यज्ञ, हवन या विशेष पूजा की जाए तो उसका असर सामान्य दिनों से ज्यादा फलदायी होता है.
4. दान-पुण्य का भी खास महत्व है. गरीब और जरूरतमंद को भोजन, कपड़े या अनाज दान करने से पितरों की आत्मा प्रसन्न होती है.

ध्यान और साधना का महत्व
चंद्रग्रहण का समय केवल बाहरी पूजा-पाठ के लिए ही नहीं बल्कि आंतरिक शांति और साधना के लिए भी बहुत अहम है.

1. इस दौरान ध्यान करने से मन की अशांति दूर होती है.
2. धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने और मंत्रों का जाप करने से आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
3. परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना और सेवा करना भी बेहद शुभ माना जाता है.
4. ग्रहण के समय भोजन करने से बचना और उपवास रखना स्वास्थ्य और आत्मिक शांति दोनों के लिए अच्छा माना जाता है.

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