Akshay Tritiya पर दक्षिण भारत के मंदिरों में होती है विशेष पूजा, चंदन लेपन से लेकर लगाया ज
Akshay Tritiya पर दक्षिण भारत के मंदिरों में होती है विशेष पूजा, यह है लिस्ट
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Akshay Tritiya 2026: आज देशभर में अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है. पंचांग में अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना गया है अर्थात इस दिन बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं. अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर दक्षिण भारत के मंदिरों में कई भव्य आयोजन किए जाते हैं. कहीं चंदन लेप को हटाया जाता है तो कहीं पायसम का भोग लगाया जाता है. अक्षय तृतीया पर दक्षिण भारत के मंदिरों में होती है विशेष पूजा.
Akshay Tritiya 2026: आज देशभर में अक्षय तृतीया का पावन पर्व मनाया जाएगा, जिसे साल का अत्यंत शुभ ‘स्वयं सिद्ध मुहूर्त’ माना जाता है. इस समय किया गया हर काम फलदायी होता है, लेकिन दक्षिण भारत में इसे नई शुरुआत के रूप में देखा जाता है. आज के दिन नए व्यापार, गृह प्रवेश या शादी-ब्याह के लिए बेहद खास होता है. दक्षिण भारत के मंदिरों में अक्षय तृतीया के दिन विशेष अनुष्ठान होते हैं और चंदन से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा होती है. आज हम दक्षिण भारत के मंदिरों में होने वाले खास अनुष्ठानों और मंदिरों के बारे में बताएंगे. आइए जानते हैं दक्षिण भारत के मंदिरों में किस तरह मनाया जाता है अक्षय तृतीया का पर्व…

आंध्र प्रदेश के सिंहाचलम मंदिर में अक्षय तृतीया की धूम देखी जाती है. यहां भगवान विष्णु के वराह नरसिंह अवतार की पूजा होती है और साल में एक दिन यानी अक्षय तृतीया के दिन ही, प्रतिमा से चंदन हटाया जाता है. साल भर रोजाना प्रतिमा पर चंदन का लेपन किया जाता है और आज के दिन भगवान चंदन की मोटी परत से निकलकर भक्तों को दर्शन देते हैं.

तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर में भी भगवान विष्णु का दिव्य शृंगार होता है और विशेष भोग भी अर्पित किया जाता है. आज के दिन भक्त भगवान विष्णु के दर्शन कर धन-धान्य की कामना करते हैं.
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कांचीपुरम के वरदराज पेरुमल मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन सोने और चांदी की छिपकलियों का दर्शन करना शुभ माना जाता है, जो मां लक्ष्मी और कुबेर के प्रतीक माने जाते हैं. आज के दिन भगवान विष्णु को अर्पित करने के लिए विशेष मीठी भात और केसरी भात का भोग भी लगाता जाता है, जिसे पायसम भी कहते हैं.

तमिलनाडु का श्री अक्षयपुरीश्वरर मंदिर भी अक्षय तृतीया से जुड़ा है क्योंकि इसी स्थान पर भगवान शिव ने कुबेर को धन का देवता बनने का वरदान दिया था. यही कारण है कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान शिव को ठंडी जलधारा अर्पित की जाती है और कुबेर से धन और समृद्धि का वरदान मांगा जाता है.


