अक्षय तृतीया पर महाकालेश्वर के माथे पर शेषनाग को दिया स्थान, बाबा महाकाल की भस्म आरती में

अक्षय तृतीया पर महाकालेश्वर के माथे पर शेषनाग को दिया स्थान, बाबा महाकाल की भस्म आरती में

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अक्षय तृतीया पर बाबा महाकाल ने शेषनाग को दिया स्थान, भस्म आरती के नए नियम जाने

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Akshaya Tritiya 2026 Baba Mahakaleshwar: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर रविवार को भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा. तड़के सुबह से ही श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर भगवान महाकाल के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे. मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा. आइए जानते हैं बाबा महाकाल की भस्म आरती के नए नियम…

Akshaya Tritiya 2026 Baba Mahakaleshwar: आज अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है और इस पावन अवसर पर उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल के अद्भुत दर्शन के लिए भक्त भारी संख्या में पहुंच रहे हैं. अक्षय तृतीया के दिन देशभर में अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है. महाकाल के दरबार में भी अक्षय तृतीया के मौके पर बाबा का मनमोहक शृंगार किया गया, जिसे देखकर पूरा मंदिर परिसर ‘ॐ नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा. मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन किए गए धार्मिक कार्यों का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है. इसी कारण महाकालेश्वर मंदिर में पूजा का विशेष महत्व बढ़ जाता है.

रविवार तड़के सुबह 4 बजे वीरवद्र की आज्ञा लेकर मंदिर के पट खुलते ही पंचामृत अभिषेक के साथ बाबा का विशेष रूप से आम के रस से अभिषेक किया गया. भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को भस्म रमाकर, भांग और मस्तक पर शेषनाग सजाकर दिव्य स्वरूप दिया गया. नवीन मुकुट धारण किए बाबा के इस साकार दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. शंखनाद और ढोल-नगाड़ों के बीच पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा.

अक्षय तृतीया के दिन बाबा के माथे पर शेषनाग को सजाया गया, जो भगवान विष्णु के प्रतीक है. आज के दिन भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था. माना जाता है कि आज के दिन किए गए कार्य का अक्षय फल (कभी न समाप्त होने वाला) मिलता है, यानी कभी न खत्म होने वाला है, चाहे वह कार्य अच्छा हो या बुरा. आज के दिन दान का बहुत महत्व है.

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महाकाल मंदिर में रोजाना भस्म आरती होती है और हर दिन भक्तों की भारी भीड़ मंदिर में भस्म आरती में भाग लेती है. भस्म आरती के दौरान पहले बाबा निराकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे जन्म और मृत्यु से परे माना जाता है, और फिर अलौलिक शृंगार कर भक्तों के सामने राजा के स्वरूप में आते हैं. बाबा का यह रूप सांसारिक होता है, जिसे प्राकृतिक चीजों से सजाया जाता है.

बता दें कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के नियमों में बदलाव किया है. पहले मंदिर के काउंटर से भस्म आरती के लिए पंजीकरण कराना होता था लेकिन बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर मे शुल्क के साथ भस्म भारती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है. भस्म आरती के लिए एक दिन पहले बुकिंग करना अनिवार्य होगा.

अक्षय तृतीया के मौके पर सुबह 4 बजे हुई भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालु रात से ही लाइन में लग गए थे. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और दर्शन की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. प्रशासन ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग की भी व्यवस्था की गई.

धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाकाल की नगरी उज्जैन में अक्षय तृतीया पर दर्शन करने से जीवन में सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. कई श्रद्धालु इस दिन विशेष रूप से विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्यों की शुरुआत भी करते हैं. उज्जैन के स्थानीय पुजारियों का कहना है कि इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

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