Premanand Ji Maharaj: क्या सच में शादी के बाद माता-पिता को बेटी के घर का पानी नहीं पीना चाहिए? जानें क्या कहते हैं प्रेमानंद जी महाराज?

Premanand Ji Maharaj: क्या सच में शादी के बाद माता-पिता को बेटी के घर का पानी नहीं पीना चाहिए? जानें क्या कहते हैं प्रेमानंद जी महाराज?

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Premanand Ji Maharaj: प्रेमानंद जी महाराज को बड़ी संख्या में लोग फॉलो करते हैं और उनसे सहज ही कई सवाल पूछ कर उनके जवाब का अनुसरण करते हैं. फिर चाहे सवाल निजी जीवन से ही जुड़ा क्यों न हो.

बेटी के घर पानी पीना चाहिए या नहीं?

हाइलाइट्स

  • प्रेमानंद जी महाराज ने बेटी के घर पानी पीने को गलत मान्यता बताया.
  • माता-पिता की सेवा का दायित्व बेटे और बेटी दोनों का है.
  • समाज की धारणाओं से ऊपर उठकर जीवन जीना जरूरी है.

Premanand Ji Maharaj: हमारे समाज में कभी-कभी कुछ पुराने रिवाज और धारणाएं लोगों के मन में घर कर जाती हैं, जो कि उनके जीवन को और सोच को प्रभावित करती हैं. इनमें से एक सामान्य मान्यता है कि माता-पिता अपनी शादी-शुदा बेटी के घर पानी नहीं पीते हैं. इस बात को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं कि क्या सच में ऐसा करना पाप है या नहीं. हाल ही में, प्रेमानंद जी महाराज से एक श्रद्धालु ने इस विषय पर सवाल पूछा और महाराज जी ने इस सवाल का उत्तर दिया, जो हर किसी के लिए मार्गदर्शन साबित हो सकता है.

महिला ने पूछा, क्या बेटी के घर का पानी पीना गलत है?
एक महिला ने प्रेमानंद जी से पूछा कि क्या सच में अगर माता-पिता अपनी बेटी के घर पानी पीते हैं, तो वह पाप के भागी बनते हैं? वह कहती हैं कि उनकी मां की तबीयत खराब रहती है और वह अपनी मां की सेवा करना चाहती हैं, लेकिन समाज के डर से वह अपनी मां के पास नहीं जा पातीं. ऐसी स्थिति में उनका सवाल यह था कि क्या उन्हें अपनी मां की सेवा करने का अधिकार नहीं है?

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प्रेमानंद जी महाराज ने दिया स्पष्ट और संतुलित जवाब
प्रेमानंद जी महाराज ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि शास्त्रों में बेटा और बेटी के बीच कोई भेदभाव नहीं किया गया है. सनातन धर्म में स्त्रियों को पूज्य माना जाता है और यही कारण है कि कुछ लोग बेटी के घर पानी पीने को गलत मानते हैं. हालांकि, यह मानसिकता सही नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि माता-पिता की सेवा का दायित्व न सिर्फ बेटे का है, बल्कि बेटी का भी है. यदि माता-पिता की तबीयत खराब होती है, तो यह बेटी का कर्तव्य बनता है कि वह उनकी सेवा करे.

महाराज जी ने यह भी कहा कि समाज की बनाई हुई सीमाओं और धारणाओं को पार करके हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए. अगर माता-पिता अपनी बेटी के घर जीवन बिताते हैं, तो यह कोई गलत बात नहीं है. प्यार और सेवा में किसी प्रकार की कोई सीमाएं नहीं होनी चाहिए.

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समाज की धारणाओं से ऊपर उठकर जीवन को जीना जरूरी है
प्रेमानंद जी महाराज के इस उत्तर से यह स्पष्ट होता है कि हमें समाज की पुरानी मान्यताओं को अपने जीवन की दिशा तय करने का आधार नहीं बनाना चाहिए. माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना हर बेटे और बेटी का कर्तव्य है और इसे नकारना या इसमें कोई भेदभाव रखना हमारी सोच को संकीर्ण करता है. हमें अपने रिश्तों को समझकर उन्हें मजबूत करना चाहिए, ताकि समाज के पुराने खांचे में बंधे बिना हम अपने परिवार और समाज के प्रति सही भूमिका निभा सकें.

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क्या सच में शादी के बाद माता-पिता को बेटी के घर का पानी नहीं पीना चाहिए?

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