Maha Shivratri 2025 : शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले जान लें नियम, इस शुभ मुहूर्त में करें जलाभिषेक, कौन से पदार्थ करें अर्पित?

Maha Shivratri 2025 : शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले जान लें नियम, इस शुभ मुहूर्त में करें जलाभिषेक, कौन से पदार्थ करें अर्पित?

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Maha Shivratri 2025 : शिवरात्रि पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से न सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास भी होता है. सही तरीके से जलाभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त ह…और पढ़ें

महाशिवरात्रि 2025

हाइलाइट्स

  • महाशिवरात्रि 2025: 26 फरवरी को मनाई जाएगी.
  • जलाभिषेक के लिए गंगाजल या गाय का दूध उपयोग करें.
  • शिवलिंग पर बेलपत्र, धतुरा, आक के फूल अर्पित करें.

Maha Shivratri 2025 : शिवरात्रि, भगवान शिव की उपासना का सबसे विशेष दिन होता है, जब भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ महादेव को जल अर्पित करते हैं. यह दिन विशेष रूप से उपवास, पूजा और ध्यान का होता है. जिसमें भक्त महादेव के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न नियमों का पालन करते हैं. शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है ताकि पूजा सही और फलदायक तरीके से संपन्न हो सके. आइए जानते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से शिवलिंग पर जल चढ़ाने के नियम.

कैसे भगवान शिव को जल चढ़ाएं
महादेव को जल चढ़ाने के लिए कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है. सबसे पहले, यह ध्यान रखें कि भगवान शिव को जलाभिषेक गंगाजल, साफ पानी या गाय के दूध से किया जाए. जल की धारा हमेशा पतली और धीमी होनी चाहिए, क्योंकि बहुत तेजी से जल चढ़ाना ठीक नहीं माना जाता है. जलाभिषेक करते समय आपको हमेशा पूर्व दिशा में मुख करके जल चढ़ाना चाहिए. इसके अलावा, जलाभिषेक करते समय आपको झुककर या बैठकर पूजा करनी चाहिए.

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शिवलिंग पर कौन से पदार्थ अर्पित करें
भगवान शिव के जलाभिषेक के साथ-साथ कुछ अन्य विशेष चीजों को भी अर्पित किया जाता है, जो पूजा को और भी पवित्र बनाती हैं. बेलपत्र, धतुरा, आक के फूल और शमी के पत्ते शिव पूजा में प्रमुख रूप से शामिल किए जाते हैं. इनका अर्पण शुभ और फलदायी माना जाता है. लेकिन ध्यान रखें कि पूजा में तुलसी, सिंदूर, नारियल, शंख और केतकी के फूल का उपयोग नहीं किया जाता है, क्योंकि यह भगवान शिव के पूजन में निषिद्ध माने जाते हैं.

शिवलिंग की परिक्रमा का महत्व
जब भी आप भगवान शिव का जलाभिषेक करें, तो यह सुनिश्चित करें कि आप शिवलिंग की परिक्रमा करें. परिक्रमा हमेशा शिवलिंग की बाईं दिशा में करें और इसे आधे चक्कर तक ही सीमित रखें. इस दौरान जलहरी को लांघना नहीं चाहिए, क्योंकि ऐसा करना अशुभ माना जाता है.

महाशिवरात्रि 2025 की तिथि और समय
महाशिवरात्रि का पर्व 26 फरवरी 2025 को मनाया जाएगा, जो सुबह 11 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 27 फरवरी को सुबह 8 बजकर 54 मिनट तक चलेगा. इस दिन जलाभिषेक के लिए विशेष शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं.

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जलाभिषेक के लिए शुभ मुहूर्त
सुबह के समय जलाभिषेक का शुभ समय 6 बजकर 47 मिनट से 9 बजकर 42 मिनट तक है. इसके बाद 11 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक जल चढ़ाने का उचित समय है.

शाम के समय जलाभिषेक करने के लिए शुभ समय 3 बजकर 25 मिनट से 6 बजकर 8 मिनट तक है, और रात का समय 8 बजकर 54 मिनट से 12 बजकर 1 मिनट तक उपयुक्त माना गया है.

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शिवलिंग पर जल चढ़ाने से पहले जान लें नियम, इस शुभ मुहूर्त में करें जलाभिषेक

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