बच्चों को चांदी का आधा चांद क्यों पहनाया जाता है? जानिए मान्यता

बच्चों को चांदी का आधा चांद क्यों पहनाया जाता है? जानिए मान्यता

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हिंदू परंपरा में छोटे बच्चों के गले में चांदी का आधा चांद पहनाने की प्रथा लंबे समय से चली आ रही है. धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसे चंद्रमा, मानसिक शांति, बुरी नजर से बचाव और शुभता का प्रतीक माना जाता है. हालांकि, ये दावे धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

फरीदाबाद: हिंदू धर्म में छोटे बच्चों के गले में चांदी का आधा चांद पहनाने की परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है. दादी-नानी के समय से चली आ रही इस मान्यता को लोग सिर्फ एक आभूषण नहीं… बल्कि बच्चे की सुरक्षा और अच्छे भविष्य से जोड़कर देखते हैं. ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार चांदी का संबंध चंद्रमा से माना जाता है. इसलिए बच्चों के गले में चांदी का आधा चांद पहनाने से उनका मन शांत रहता है…अच्छी नींद आती है और बुरी नजर से भी बचाव होता है. यही वजह है कि आज भी जन्म के कुछ समय बाद बच्चों को काले धागे या चांदी की चेन में आधा चांद पहनाया जाता है.

चंद्रमा से जुड़ी है चांदी की मान्यता

Local18 से बातचीत में बल्लभगढ़ उदासीन साधु आश्रम के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं प्राचीन समय से चांदी को चंद्रमा की धातु माना गया है. चांदी का सफेद रंग चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है और सोमवार के दिन भगवान शिव को अर्पित करने के बाद इसे धारण करना शुभ माना जाता है. भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्रमा विराजमान हैं. छोटे बच्चों का मन बहुत कोमल होता है. वे जल्दी रोने लगते हैं और कई बार चिड़चिड़े भी हो जाते हैं. ऐसे में चांदी का आधा चांद पहनाने की परंपरा मन को शांत रखने से जोड़कर देखी जाती है. इससे बच्चे को अच्छी नींद आने की भी मान्यता है.

बुरी नजर से बचाने की भी है मान्यता

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि छोटे बच्चों को नजर जल्दी लग जाती है. इसलिए आधा चांद काले धागे या चांदी की पतली चेन में पहनाया जाता है. लोक मान्यता है इससे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव कम पड़ता है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. यही कारण है कि पुराने समय से परिवारों में बच्चों को यह लॉकेट पहनाने की परंपरा चली आ रही है. आज भी कई लोग इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं.

बुद्धि और विकास से भी जोड़ा जाता है

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा मन का कारक ग्रह माना जाता है. जब मन शांत रहता है तो बच्चा धीरे-धीरे अच्छी तरह सीखता है और उसका मानसिक विकास भी बेहतर होता है. बचपन में मन सही रहेगा तो आगे चलकर पढ़ाई, नौकरी और जीवन के दूसरे कामों में भी उसका अच्छा असर देखने को मिलता है. इसलिए चांदी का आधा चांद बच्चों के लिए शुभ माना जाता है.

माता के साथ अच्छे संबंध की भी मान्यता

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं चंद्रमा का संबंध माता से भी माना जाता है. जब बच्चा अपनी मां के प्रति प्रेम और सम्मान रखता है तो चंद्रमा का शुभ प्रभाव बना रहता है. इसी वजह से बच्चों को चांदी का आधा चांद पहनाने की परंपरा को शुभ माना गया है. हालांकि यह सभी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं. लोग अपनी आस्था और विश्वास के अनुसार इस परंपरा का पालन करते हैं. Local18 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…

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