दिशा बदलने से बदलेगी किस्मत? जानें वास्तु मान्यताओं और विज्ञान की राय

दिशा बदलने से बदलेगी किस्मत? जानें वास्तु मान्यताओं और विज्ञान की राय

अंबाला: भारतीय वास्तुशास्त्र में घर की प्रत्येक दिशा का अपना अलग महत्व बताया गया है. दरअसल, मान्यता है कि यदि दिशाओं का उपयोग उनके स्वभाव के अनुरूप किया जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जबकि विपरीत उपयोग जीवन में कई तरह की परेशानियों का कारण बन सकता है. बता दें कि वास्तुशास्त्र में वर्णित 16 दिशाओं में दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य दिशा को विशेष महत्व दिया गया है. इस दिशा में लंबे समय तक बैठकर पढ़ाई, कार्यालय का काम या महत्वपूर्ण निर्णय लेने जैसे कार्य करने से बचना चाहिए.

नैऋत्य दिशा का संबंध राहु-केतु से माना जाता है

वहीं, इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी बताते हैं कि वास्तु मान्यताओं के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा नैऋत देवता को समर्पित मानी जाती है. इस दिशा का संबंध राहु और केतु ग्रहों से भी जोड़ा जाता है, जिन्हें भ्रम और आलस्य का कारक माना जाता है. उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति इस दिशा में लंबे समय तक सक्रिय कार्य करता है तो उसके स्वभाव में सुस्ती, असमंजस और निर्णय लेने में कठिनाई जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं.

मास्टर बेडरूम और स्टोर रूम के लिए मानी जाती है उपयुक्त

उन्होंने बताया कि यह दिशा स्थिरता और विश्राम की प्रतीक मानी जाती है, इसलिए इसे पढ़ाई या ऑफिस के कार्य के बजाय मास्टर बेडरूम या स्टोर रूम के लिए अधिक उपयुक्त माना गया है. बेडरूम का उपयोग मुख्य रूप से आराम और नींद के लिए होता है, जबकि स्टोर रूम में केवल जरूरत पड़ने पर ही जाया जाता है. इस कारण इस दिशा का उपयोग वास्तु सिद्धांतों के अनुरूप माना जाता है.

विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए क्या है सलाह?

वहीं, ज्योतिषाचार्य पंडित दीपलाल जयपुरी का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों और लंबे समय तक मानसिक एकाग्रता वाले कार्य करने वाले लोगों को विशेष रूप से इस दिशा में कार्यस्थल बनाने से बचना चाहिए. वास्तु मान्यताओं के अनुसार यहां बैठने से व्यक्ति को अधिक नींद आने, आलस्य बढ़ने और काम के प्रति उत्साह कम होने की संभावना मानी जाती है.

विज्ञान क्या कहता है?

उन्होंने कहा कि राहु और केतु के प्रभाव के कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने से निर्णय क्षमता भी प्रभावित हो सकती है. हालांकि, यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि ये सभी बातें वास्तुशास्त्र और ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. आधुनिक विज्ञान अब तक यह प्रमाणित नहीं कर पाया है कि किसी विशेष दिशा में बैठने मात्र से व्यक्ति की बुद्धि, कार्यक्षमता या सफलता सीधे प्रभावित होती है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी, स्वच्छ हवा, शांत वातावरण, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद जैसे कारक मानसिक एकाग्रता और कार्यक्षमता को अधिक प्रभावित करते हैं.

आस्था के साथ रखें व्यावहारिक पहलुओं का भी ध्यान

उन्होंने बताया कि ऐसे में यदि कोई व्यक्ति वास्तुशास्त्र में आस्था रखता है तो वह अपने घर की दिशा और कमरों का उपयोग इन मान्यताओं के अनुसार कर सकता है. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि घर और कार्यस्थल का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जहां सकारात्मक माहौल, पर्याप्त रोशनी और अच्छा वेंटिलेशन उपलब्ध हो, ताकि व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से बेहतर प्रदर्शन कर सके.

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