जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक में क्या है अंतर? इससे क्या होते हैं फायदे
Jalabhishek Rudrabhishek Difference: सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष होता है. वे अनेक प्रकार से भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं. सावन शिव जी की प्रिय माह है, इसलिए इस महीने में व्रत, पूजा, स्नान, दान, जप, कांवड़ यात्रा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पंचामृत अभिषेक आदि वो हर उपाय करते हैं, जिससे महादेव की कृपा प्राप्त हो जाए. शिव शंभू के दया करने मात्र से ही प्राणियों का उद्धार हो जाता है, इसलिए हर शिवभक्त कोशिश करता है कि वह सावन में शिव जी का जलाभिषेक करे. विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक किया जाता है, जिसमें पंचामृत अभिषेक भी शामिल होता है. आइए जानते हैं कि जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक में क्या है अंतर?
जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक में अंतर
पंचामृत अभिषेक: पंचामृत अभिषेक रुद्राभिषेक का ही एक प्रकार है. इसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर पंचामृत बनाते हैं और फिर महादेव का रुद्राभिषेक किया जाता है. इसमें भी रुद्राभिषेक के पूजा नियमों का पालन करते हैं.
जलाभिषेक और रुद्राभिषेक से होने वाले फायदे
जब आप किसी असाध्य रोग, कष्ट, मानसिक पीड़ा, ग्रह दोष, असफलता, गृह क्लेश, कोर्ट केस, अकाल मृत्यु, कालसर्प दोष, वैवाहिक अलगाव आदि से जूझते हैं तो उस समय आपको जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना चाहिए. इससे जीवन में उन्नति होती है, परिवार में सुख, शांति, समृद्धि आती है, व्यक्ति को आरोग्य का वरदान प्राप्त होता है.
किस दिन करा सकते हैं रुद्राभिषेक?
आप रुद्राभिषेक महाशिवरात्रि के दिन कराएं तो बहुत ही उत्तम फलदायी रहेगा. इसके अलावा सावन माह में किसी भी दिन करा सकते हैं या फिर सावन शिवरात्रि, सावन प्रदोष और सावन सोमवार को रुद्राभिषेक कराएं. इसके अलावा हर माह में शिवरात्रि और प्रदोष व्रत आते हैं, उस दिन भी रुद्राभिषेक कराएं. किसी भी माह के उस सोमवार को रुद्राभिषेक करा सकते हैं, जिसमें शुभ फलदायी शिववास हो.


