Sawan Shivratri पर शिव पूजा में क्यों खास है 108 का अंक? किन-किन रूपों में होता है प्रयोग,

Sawan Shivratri पर शिव पूजा में क्यों खास है 108 का अंक? किन-किन रूपों में होता है प्रयोग,

Sawan Shivratri 108 Significance: सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन सावन शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, इस बार यह शुभ तिथि 11 अगस्त दिन मंगलवार को मनाई जाएगी. भगवान शिव की आराधना का पवित्र सावन मास 30 जुलाई दिन गुरुवार से शुरू हो रहा है और 28 अगस्त दिन शुक्रवार को समापन होगा. वहीं सावन के पहले सोमवार का व्रत 3 अगस्त किया जाएगा. सावन शिवरात्रि के दौरान देशभर के शिवालयों में श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजन करते हैं और इस पूजा में 108 संख्या का विशेष महत्व माना जाता है. कई श्रद्धालु भगवान शिव को 108 बेलपत्र, 108 फूल, 108 अक्षत (चावल के दाने), 108 गेहूं के दाने, 108 बार जल अर्पित करने या 108 बार ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करने का संकल्प लेते हैं. आइए जानते हैं सावन शिवरात्रि पर 108 नंबर का क्या महत्व है…

सावन शिवरात्रि 2026
चतुर्दशी तिथि का आरंभ: 11 अगस्त, सुबह 4 बजकर 54 मिनट से
चतुर्दशी तिथि का समापन: 12 अगस्त, रात 1 बजकर 52 मिनट तक
निशीथ काल (मध्यरात्रि पूजा) का शुभ मुहूर्त: रात्रि 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 47 बजे तक (11-12 अगस्त की मध्यरात्रि)

पूजा की माला में 108 मनके
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 108 अंक पूर्णता, आध्यात्मिक ऊर्जा और ब्रह्मांडीय संतुलन का प्रतीक माना जाता है. सनातन परंपरा में अधिकांश जप मालाएं भी 108 मनकों की होती हैं, जिससे मंत्र जाप को पूर्ण और फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि 108 बार मंत्र जप या 108 वस्तुएं अर्पित करने से साधक का मन एकाग्र होता है और भगवान शिव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है.

शिव पूजा में किन-किन रूपों में होता है 108 का प्रयोग?
सावन में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान शिव को 108 बेलपत्र अर्पित करते हैं. प्रत्येक बेलपत्र के साथ ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण करने की परंपरा है. इसके अलावा 108 सफेद या सुगंधित फूल, 108 चावल के दाने, 108 गेहूं के दाने, 108 बादाम, किशमिश या अन्य मेवे, 108 बूंदें या पात्र जल, 108 दीपक और 108 बार शिव मंत्र का जाप भी विशेष पुण्यदायी माना जाता है. सावन शिवरात्रि के दिन कई स्थानों पर भक्त 108 बार शिवलिंग की परिक्रमा करने का संकल्प भी लेते हैं, हालांकि इसे अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए.

108 अंक क्यों माना जाता है पवित्र?
धर्मशास्त्रों और ज्योतिष परंपरा में 108 संख्या को कई कारणों से पवित्र माना गया है. एक मान्यता के अनुसार 12 राशियां और 9 ग्रह मिलकर 108 (12×9) का योग बनाते हैं, जो संपूर्ण ज्योतिषीय चक्र का प्रतीक है. वहीं 27 नक्षत्र और प्रत्येक के 4 चरण मिलकर भी 108 चरण बनाते हैं. योग और उपनिषदों की परंपरा में भी 108 का विशेष महत्व बताया गया है, इसलिए इसे आध्यात्मिक साधना की पूर्ण संख्या माना जाता है.

शिव पूजन में सच्ची श्रद्धा जरूरी
धर्माचार्यों का कहना है कि सावन में 108 वस्तुएं अर्पित करना अनिवार्य नहीं, बल्कि श्रद्धा का प्रतीक है. अगर कोई भक्त सच्चे मन से एक बेलपत्र, एक लोटा जल और ॐ नमः शिवाय मंत्र के साथ भगवान शिव की पूजा करता है, तो वह भी उतनी ही श्रद्धा का भाव प्रकट करता है. इसलिए सावन के पहले सोमवार 3 अगस्त को भक्त अपनी क्षमता और आस्था के अनुसार पूजा कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं.

108 अंक का विशेष महत्व और इसका प्रयोग
1. किन-किन रूपों में होता है प्रयोग?

  • मंत्र जाप (108 बार): सावन शिवरात्रि पर महामृत्युंजय मंत्र या ॐ नमः शिवाय का 108 बार जाप करने से मन शांत होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. रुद्राक्ष की माला में भी 108 मनके (दाने) इसीलिए होते हैं.
  • 108 बेलपत्र अर्पण: शिव पूजा में भगवान शिव को 108 बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं. प्रत्येक बेलपत्र पर चंदन से राम या लिखकर चढ़ाने से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं.
  • 108 नामावली (शिव अष्टोत्तर शतनामावली): शिवजी के 108 दिव्य नामों का स्मरण व उच्चारण करके जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करना अति फलदायी माना जाता है.
  • 108 लोटा जल/सामग्री: विशेष रुद्राभिषेक के दौरान 108 बार जल, दूध या धारा अर्पित करने का विधान है.

2. क्यों खास है 108 का अंक?

  • ज्योतिषीय गणित: ब्रह्मांड में 12 राशियां और 9 नक्षत्र-चरण (नक्षत्रों के 4 पद x 27 नक्षत्र = 108 पद) होते हैं. 108 बार शिव नाम या मंत्र का जाप करने से पूरे ब्रह्मांड और सभी ग्रहों की ऊर्जा का संतुलन बनता है.
  • सूर्य और पृथ्वी का संबंध: सूर्य का व्यास पृथ्वी के व्यास से लगभग 108 गुना बड़ा है. साथ ही, सूर्य से पृथ्वी की दूरी सूर्य के व्यास की 108 गुनी है.
  • शरीर का ऊर्जा चक्र: शास्त्रों और योग विज्ञान के अनुसार मानव शरीर में 108 मुख्य नाड़ियां (ऊर्जा केंद्र) होती हैं, जो हृदय चक्र से जुड़ती हैं. जब हम 108 बार जाप करते हैं, तो सभी नाड़ियां जाग्रत और पवित्र हो जाती हैं.

सावन सोमवार तिथियां 2026
साल 2026 में सावन माह में 4 सोमवार का व्रत किया जाएगा

  • पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त
  • दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त
  • तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त
  • चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त

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