21 महीने का होगा इस बार का नासिक कुंभ मेला, गुरु की चाल की वजह से कहलाएगा सिंहस्थ कुंभ

21 महीने का होगा इस बार का नासिक कुंभ मेला, गुरु की चाल की वजह से कहलाएगा सिंहस्थ कुंभ

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21 महीने का होगा नासिक कुंभ मेला, गुरु की चाल की वजह से कहलाएगा सिंहस्थ कुंभ

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Nashik Simhastha Kumbh 2027: नासिक कुंभ मेला इस बार 21 महीने का होगा, जो एक असाधारण अवधि है. गुरु ग्रह की विशेष चाल के कारण इसे ‘सिंहस्थ कुंभ’ के नाम से जाना जाएगा. सिंहस्थ कुंभ केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा, संत संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का विराट उत्सव भी है. यहां देशभर के मठ, अखाड़े और संत समाज एक मंच पर एकत्र होकर धर्म, संस्कृति और मानव कल्याण का संदेश देते हैं. आइए जानते हैं सिंहस्थ कुंभ मेले के बारे में खास बातें…

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Nashik Simhastha Kumbh 2027: कुंभ मेला सनातन धर्म का सबसे बड़ा और विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक आयोजन माना जाता है. यह मेला प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में निश्चित ज्योतिषीय संयोगों के आधार पर आयोजित होता है. इस बार कुंभ मेला महाराष्ट्र के नासिक में लगने जा रहा है यह अपनी अवधि और विशेष ज्योतिषीय संयोग के कारण चर्चा में है. इस कार्यक्रम में देश-विदेश से लाखों-करोड़ों की संख्या श्रद्धालु पहुंचते हैं और पवित्र संगम में स्नान करने के लिए जुटते हैं. प्रशासन भी युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है और अखाड़ों के साथ भी बातचीत पूरी हो चुकी है.

21 महीने का सिंहस्थ कुंभ
इस बार कुंभ मेले की शुरुआत साल 2026 के अंतिम महीने से होगी और समापन 24 जुलाई 2028 को होगा. इस तरह नासिक कुंभ मेला 21 महीने का होने जा रहा है. वहीं कुंभ मेले के शाही स्नान और धार्मिक आयोजन साल 2027 में किए जाएंगे. लगभग दो साल तक चलने वाले इस बार के कुंभ को सिंहस्थ कुंभ कहा जा रहा है और इसका प्रमुख कारण देवगुरु बृहस्पति (गुरु) की सिंह राशि में विशेष स्थिति और उनकी चाल मानी जा रही है. ऐसे में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गोदावरी तट पर पहुंचकर पवित्र स्नान, संतों के दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे.

कब लगता है कौन सा कुंभ, जानें?
प्रयागराज – ग्रहों के राजा सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं और बृहस्पति वृषभ राशि में होते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में किया जाता है.
नासिक – जब सिंह राशि में सूर्य और बृहस्पति ग्रह विराजमान रहते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन महाराष्ट्र के नासिक में लगता है.
हरिद्वार – जब सूर्य मेष राशि में तो बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तब कुंभ का मेला हरिद्वार में लगता है.
उज्जैन – जब सूर्य मेष राशि में तो बृहस्पति सिंह राशि में होते हैं, तब कुंभ मेले का आयोजन उज्जैन में किया जाता है.

सिंहस्थ कुंभ मेले का महत्व
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, गुरु ग्रह लगभग 12 वर्षों में एक बार सिंह राशि में आते हैं. उनकी राशि परिवर्तन की गति और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर कुंभ पर्व की अवधि और प्रमुख स्नान तिथियां निर्धारित होती हैं. इस बार ग्रहों की विशेष चाल के कारण धार्मिक गतिविधियां लंबी अवधि तक प्रभावी रहेंगी, इसलिए इसे 21 महीने तक चलने वाले विशेष सिंहस्थ आयोजन के रूप में देखा जा रहा है. सिंहस्थ कुंभ का सबसे बड़ा आकर्षण शाही स्नान होता है, जिसमें विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्मा, नागा साधु और महामंडलेश्वर पारंपरिक शोभायात्रा के साथ गोदावरी नदी में स्नान करते हैं. मान्यता है कि इस दौरान गोदावरी में स्नान, दान, जप, तप और भगवान शिव तथा श्रीराम की पूजा करने से अनेक जन्मों के पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है.

सिंहस्थ कुंभ मेले की शुरुआत
कुंभ मेले की शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 से होगी, इस दिन ध्वजारोहण का कार्यक्रम किया जाएगा. इस दिन से अखाड़े कुंभ मेले में आना शुरू हो जाएंगे. वहीं 29 जुलाई 2027 को नगर प्रदक्षिणा निकाली जाएगी. इस दिन विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत पारंपरिक शाही स्वरूप में नगर भ्रमण करेंगे.

कहां लगेगा सिंहस्थ कुंभ?
यह कुंभ मेला गोदावरी नदी के तट पर लगेगा, जो त्र्यंबकेश्वर में स्थित है. गोदावरी नदी गंगा नदी के बाद दूसरी सबसे लंबी नदी है. यह नदी भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 10% हिस्सा कवर करती है. इसे दक्षिण गंगा भी कहा जाता है और इसकी उत्पत्ति पश्चिमी घाट में त्रयंबक पहाड़ी से हुई है.

नासिक कुंभ मेला 2027: पूरा शेड्यूल

  • ध्वजारोहण: 31 अक्टूबर 2026
  • नगर प्रदक्षिणा: 29 जुलाई 2027
  • पहला अमृत स्नान: 2 अगस्त 2027
  • दूसरा अमृत स्नान: 31 अगस्त 2027
  • तीसरा अमृत स्नान (नासिक): 11 सितंबर 2027
  • तीसरा अमृत स्नान (त्र्यंबकेश्वर): 12 सितंबर 2027
  • समापन समारोह: 24 जुलाई 2028

कुंभ मेले के प्रमुख अनुष्ठान और कार्यक्रम

  • शाही स्नान: यह साधुओं और अखाड़ों का पवित्र स्नान होता है. गोदावरी नदी में पवित्र डुबकी लगाने के लिए उन्हें पहली प्राथमिकता मिलती है. पवित्र स्नान की तारीखें ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर तय की जाती हैं.
  • कल्पवास: यह उपवास, ध्यान और आध्यात्मिक अभ्यासों की अवधि है.
  • राम कुंड में स्नान: वह पवित्र कुंड जहां भगवान राम ने नासिक में अपने वनवास के वर्षों के दौरान स्नान किया था, इसलिए इसे राम कुंड कहलाता है. कुंभ मेले के दौरान भक्त राम कुंड में अनुष्ठानिक स्नान करेंगे.
  • आरती: शाम की आरती एक विशेष प्रार्थना है, जहां पुजारी जलते हुए दीपक पकड़े हुए जोर-जोर से मंत्र गाते हैं. वे गोदावरी नदी के तट पर खड़े होते हैं और सैकड़ों भक्त उनके साथ गाते हैं.
  • अखाड़ों का जुलूस: कुंभ मेले के दौरान कई अखाड़े नासिक आएंगे. वे शाही स्नान करेंगे और एक विशाल जुलूस में आएंगे. प्रत्येक अखाड़े का एक विशेष झंडा होगा और वह एक अलग धार्मिक संप्रदाय से संबंधित होगा.
  • पिंड दान: यह पवित्र अनुष्ठान पूर्वजों की शांति के लिए किया जाता है. लोग गोदावरी नदी में खड़े होकर अपने पूर्वजों को पिंड दान करते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस पिंड दान के दौरान पूर्वजों को भोजन और प्रार्थनाएं अर्पित की जाती हैं.
  • अन्नकूट: यह दान का एक कार्य है, जहां गरीब और जरूरतमंद लोगों के बीच भोजन, कपड़े और भोजन वितरित किए जाते हैं.

21 महीने का सिंहस्थ कुंभ 2027

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Parag SharmaChief Sub Editor

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें



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