अमरनाथ यात्रियों के लिए चौंकाने वाली खबर, तेजी से पिघल रहे बाबा बर्फानी, अब सिर्फ 1 फीट के
अमरनाथ यात्रियों के लिए चौंकाने वाली खबर, तेजी से पिघल रहे बाबा बर्फानी
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Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रियों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. बाबा बर्फानी तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे उनकी ऊंचाई अब सिर्फ 1 फीट रह गई है. यह स्थिति श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि हर साल लाखों भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा पर आते हैं. इस अप्रत्याशित बदलाव ने यात्रा के अनुभव और पवित्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं…
Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज चार दिनों के भीतर 85,779 श्रद्धालु बाबा बर्फानी के गुफा मंदिर में दर्शन कर चुके हैं. सोमवार को 28,818 श्रद्धालुओं ने गुफा में पहुंचकर बाबा अमरनाथ के दर्शन किए. प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. बताया जा रहा है कि पवित्र हिमलिंग का आकार पिघलकर सिर्फ 1 फीट का रह गया है. सामने आईं नई तस्वीरों में बाबा बर्फानी पहले की तुलना में काफी कम दिखाई दे रहे हैं. शिवलिंग के आकार में आई कमी के बाद भी भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है. अभी भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं.
तेजी से पिघर रहा है हिमलिंग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 23 मई को अमरनाथ हिमलिंग का आकार 7 फीट का था. 29 जून को 5 फीट का रह गया और अब सोमवार को आई नई तस्वीरों से जानकारी मिली है कि शिवलिंग पिघलकर सिर्फ एक फिट के बचे हैं. दर्शन करके लौट रहे भक्तों का कहना है कि अब शायद हिमलिंग चार पांच दिन से अधिक टिक पाए. 3 जुलाई से शुरू हुई बाबा बर्फानी की पवित्र यात्रा रक्षाबंधन के दिन तक चलती है. यह कोई पहली बार नहीं है कि हिमलिंग तेजी से पिघर रहा है, बल्कि पिछले कई सालों से ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है. लगातार बढ़ती गर्मी और ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ऐसी स्थिति बन रही है.
पहले भी बन चुकी हैं ऐसी स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार, अमरनाथ ग्लेशियरों से घिरा हुआ है और ज्यादा लोगों के वहां पहुंचने से तापमान में अधिक वृद्धि हो जाती है, जिससे ग्लेशियर पिघलने लगते हैं. साल 2016 में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी. यात्रा के महज 10 दिन में ही हिमलिंग पिघल गया था. वहीं साल 2013 में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी, यात्रा खत्म होने से पहले ही हिमलिंग अंतर्ध्यान हो गए थे.
अमरनाथ यात्रा का महत्व
अमरनाथ यात्रा इस वर्ष 3 जुलाई से शुरू हुई और यात्रा का समापन 28 अगस्त दिन शुक्रवार को रक्षाबंधन के दिन होगा. यह यात्रा हर वर्ष 57 दिन तक चलती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ यात्रा करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है. अमरनाथ यात्रा को हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था. यही कारण है कि इस यात्रा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है.
सोमवार को कई जगहों पर तेज बारिश
अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार को दिनभर कई इलाकों में तेज बारिश हुई. खराब मौसम के बावजूद श्रद्धालु बालटाल और पहलगाम, दोनों मार्गों से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा तक पहुंचे और बाबा बर्फानी के दर्शन किए. दर्शन करने के बाद सोमवार शाम श्रद्धालु सुरक्षित रूप से बालटाल बेस कैंप लौट आए. अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम स्थित नुनवान बेस कैंप तक वापस पहुंचने में तीन से चार दिन लग जाते हैं. यही वजह है कि पहलगाम मार्ग से यात्रा करने वाले अधिकांश श्रद्धालु दर्शन के बाद वापसी के लिए बालटाल मार्ग को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि इस रास्ते से वे उसी दिन बेस कैंप तक लौट सकते हैं.
श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजार
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं. दोनों बेस कैंपों और यात्रा मार्ग पर रुकने वाले स्थानों पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा जगह-जगह लंगर लगाए गए हैं, जहां यात्रियों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके अलावा बालटाल, नुनवान पहलगाम से लेकर पवित्र गुफा तक हजारों टेंट भी लगाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को ठहरने में किसी तरह की परेशानी ना हो.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


