शनिवार को शनिदेव को कैसे चढ़ाएं तेल? जानें सही विधि, नियम, मंत्र और इससे मिलने वाले लाभ
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Shani Dev Ko Tel Chadhana: शनिवार के दिन शनिदेव को तेल चढ़ाना शास्त्रों में विशेष महत्व रखता है. माना जाता है कि सही विधि, नियम और मंत्र के साथ तिल या सरसों का तेल अर्पित करने से शनि दोष में कमी आती है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं. इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि शनिवार को शनिदेव को तेल कैसे चढ़ाएं, कौन-सा मंत्र बोले और इससे कौन-कौन से लाभ मिलते हैं…
Shani Dev Ko Tel Chadhana: हिंदू धर्म में शनिवार का दिन न्याय और कर्म के कारक ग्रह शनिदेव की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक शनिदेव की विधि विधान के साथ पूजा करने और सरसों का तेल अर्पित करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है. माना जाता है कि शनिदेव को तेल अर्पित करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और शनि दोष तथा साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान मानसिक बल मिलने की कामना की जाती है. लेकिन बहुत से लोगों को शनिदेव को सही विधि और नियम से तेल चढ़ाने के बारे में जानकारी नहीं है, जिससे उनको शनिदेव की पूजा का लाभ कम मिल पाता है. आइए जानते हैं शनिदेव को तेल चढ़ाने के नियम और सही विधि…
शनिदेव को तेल चढ़ाने की सही विधि
शनिवार की सुबह स्नान कर स्वच्छ, गहरे नीले या काले रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद शनिदेव के मंदिर जाएं या घर में स्थापित शनिदेव की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप जलाएं. पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें, फिर शनिदेव का ध्यान करें. सरसों के तेल को एक पात्र में लेकर श्रद्धापूर्वक शनिदेव के चरणों में अर्पित करें. अगर मंदिर में शनि शिला या प्रतिमा पर तेल चढ़ाने की परंपरा हो, तो स्थानीय नियमों का पालन करते हुए तेल अर्पित करें. तेल चढ़ाते समय मन में अपने कर्मों के लिए क्षमा और सदाचार का संकल्प लेना भी शुभ माना जाता है.
- शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करने के लिए सबसे अच्छा समय सूर्यास्त से लेकर रात 8 बजे तक माना जाता है.
- तेल लोहे के पात्र में होना चाहिए और एक रुपए का सिक्का भी डाल दे.
- शनिदेव को तेल अर्पित करने से पहले उसमें अपना चेहरा देखें, इसके बाद शनिदेव को तेल अर्पित करें.
- शनिदेव को तेल अर्पित करते समय हमेशा ध्यान रखें कि आपकी नजर उनके चरणों में होनी चाहिए.
- तेल चढ़ाते समय मूर्ति के ठीक सामने खड़े होने के बजाय हमेशा थोड़ा दाएं या बाएं हटकर ही खड़े हों.
- मंदिर में शनिदेव के चरणों में धीरे-धीरे तेल अर्पित करें, अगर मूर्ति के नीचे कुंड बना है तो उसमें तेल डालें.
तेल चढ़ाते समय इन बातों का रखें ध्यान
- शनिदेव को मुख्य रूप से सरसों या काले तिल का तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है.
- पूजा पूरी श्रद्धा और शांत मन से करें, दिखावे की भावना से बचें.
- तेल चढ़ाने के बाद काले तिल, उड़द की दाल, काला वस्त्र या जरूरतमंदों को भोजन का दान करना भी शुभ माना जाता है.
- शनिवार के दिन असत्य, क्रोध, अपशब्द और किसी का अपमान करने से बचने की सलाह दी जाती है.
- पीपल के वृक्ष के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाना भी कई परंपराओं में शुभ माना गया है.
शनिदेव का मंत्र
तेल अर्पित करते समय या पूजा के दौरान ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप किया जाता है. इसके अलावा श्रद्धालु शनि स्तोत्र या शनि चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं.
शनिदेव को तेल चढ़ाने के माने जाने वाले लाभ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को तिल का तेल अर्पित करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं. इससे शनि दोष का प्रभाव कम होने, कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होने, न्याय संबंधी मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने और मानसिक तनाव कम होने की कामना की जाती है. साथ ही व्यक्ति में धैर्य, अनुशासन और कर्म के प्रति निष्ठा बढ़ने की भी मान्यता है. ज्योतिष शास्त्र में यह भी माना जाता है कि नियमित रूप से शनिदेव की पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से जीवन में सकारात्मकता आती है तथा आर्थिक और पारिवारिक परेशानियों से राहत मिलने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है.
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पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें


