पूजा में हर फूल-फल नहीं होता शुभ, जानिए किस भगवान को कौन-सी चीज नहीं चढ़ानी चाहिए
Puja Rules: पूजा-पाठ करते समय ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि भगवान को फल, फूल और प्रसाद श्रद्धा से चढ़ा दिया जाए तो पूजा पूरी हो जाती है, लेकिन सनातन परंपरा में सिर्फ श्रद्धा ही नहीं, पूजा की विधि और सामग्री का भी खास महत्व माना गया है. कई बार लोग अनजाने में ऐसी चीजें भी अर्पित कर देते हैं जो किसी विशेष देवी-देवता की पूजा में वर्जित मानी गई हैं. इसका मतलब यह नहीं कि भगवान नाराज हो जाते हैं, बल्कि शास्त्र बताते हैं कि हर देवता की अपनी प्रिय और निषिद्ध पूजन सामग्री होती है.
इसलिए सही जानकारी के साथ पूजा करना अधिक शुभ माना जाता है, अगर आप भी रोज पूजा करते हैं या किसी खास व्रत और त्योहार पर विधि-विधान से आराधना करते हैं, तो यह जानना आपके लिए उपयोगी हो सकता है कि किन देवी-देवताओं को कौन-सी चीज अर्पित नहीं करनी चाहिए और इसके पीछे क्या मान्यता बताई गई है.
भगवान विष्णु की पूजा में इन चीजों से करें परहेज
भगवान विष्णु की पूजा में हमेशा साफ और साबुत अक्षत चढ़ाने की परंपरा है. टूटे हुए चावल यानी खंडित अक्षत अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता. इसके साथ ही आक और धतूरा भी भगवान विष्णु को नहीं चढ़ाए जाते. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये दोनों सामग्री भगवान शिव को प्रिय मानी जाती हैं. इसलिए विष्णु पूजा में तुलसी दल, पीले फूल और स्वच्छ अक्षत का इस्तेमाल अधिक शुभ माना गया है.
भगवान शिव को केतकी का फूल क्यों नहीं चढ़ाया जाता?
पौराणिक कथा से जुड़ा है कारण
भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, धतूरा और आक का विशेष महत्व है, लेकिन केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाता. इसके पीछे एक प्रसिद्ध कथा प्रचलित है. मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद के दौरान केतकी के फूल ने असत्य का साथ दिया था. इससे भगवान शिव ने उसे अपनी पूजा में निषिद्ध कर दिया. यही वजह है कि आज भी शिवलिंग पर केतकी का फूल नहीं चढ़ाया जाता.
गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?
तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है, लेकिन भगवान गणेश की पूजा में तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता. मान्यता है कि तुलसी ने गणेश जी से विवाह की इच्छा जताई थी, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद दोनों के बीच शाप और वरदान से जुड़ी कथा सामने आती है. इसी कारण गणेश पूजा में तुलसी चढ़ाने से बचने की सलाह दी जाती है.
देवी दुर्गा की पूजा में हमेशा ताजे फल ही चढ़ाएं
देवी दुर्गा की आराधना में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है. पूजा में कभी भी बासी, कटे हुए या सड़े-गले फल नहीं चढ़ाने चाहिए. ताजे, साफ और बिना खराब हुए फल अर्पित करना शुभ माना जाता है. यही नियम लगभग सभी देवी-देवताओं की पूजा पर भी लागू होता है, अगर फल लंबे समय से रखा हुआ है या उसमें खराबी आ गई है, तो उसे पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
सूर्य देव को बिल्व पत्र अर्पित नहीं किए जाते
भगवान सूर्य की पूजा में लाल रंग के फूल, गेहूं, गुड़ और जल से अर्घ्य देने का विशेष महत्व बताया गया है. वहीं बिल्व पत्र सामान्य रूप से भगवान शिव की पूजा से जुड़ा माना जाता है. इसलिए सूर्य देव को बिल्व पत्र अर्पित करने की परंपरा नहीं है. सूर्य उपासना में उनकी प्रिय सामग्री का ही उपयोग करना बेहतर माना जाता है.
पूजा में सिर्फ सामग्री नहीं, भावना भी है जरूरी
धार्मिक ग्रंथों में पूजा सामग्री को लेकर कई नियम बताए गए हैं, लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं में कुछ अंतर भी देखने को मिलता है. इसलिए अगर किसी विशेष व्रत, अनुष्ठान या पारिवारिक पूजा की बात हो तो स्थानीय परंपरा या जानकार विद्वान की सलाह लेना बेहतर रहता है.
आज भी कई घरों में पूजा की तैयारी करते समय सबसे पहले फूल और फल की शुद्धता देखी जाती है. यही छोटी-छोटी बातें पूजा को विधि-विधान के अनुसार पूरा करने में मदद करती हैं. श्रद्धा के साथ सही सामग्री का उपयोग करने से मन को भी संतोष मिलता है और पूजा का अनुभव अधिक सकारात्मक बनता है.
पूजा का मूल आधार श्रद्धा और आस्था है, लेकिन शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करने से पूजा अधिक व्यवस्थित और परंपरा के अनुरूप मानी जाती है. इसलिए अगली बार पूजा की थाली सजाते समय यह जरूर ध्यान रखें कि जिस देवी-देवता की आराधना कर रहे हैं, उन्हें कौन-सी सामग्री प्रिय है और किन चीजों से परहेज करना चाहिए.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)


