33 करोड़ देवी-देवताओं के बीच कौआ क्यों हुआ नाराज? इस शहर में मलमास आते ही क्यों नहीं दिखता

33 करोड़ देवी-देवताओं के बीच कौआ क्यों हुआ नाराज? इस शहर में मलमास आते ही क्यों नहीं दिखता

Rajgir Crow Mystery: भारत में ऐसी कई जगहें हैं जहां आस्था, रहस्य और लोककथाएं आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं. बिहार का राजगीर भी उन्हीं खास जगहों में गिना जाता है. यहां मलमास शुरू होते ही एक ऐसी अनोखी घटना देखने को मिलती है, जिसे सुनकर लोग चौंक जाते हैं. कहा जाता है कि पूरे एक महीने तक राजगीर में एक भी कौआ दिखाई नहीं देता. आम दिनों में हर गली-मोहल्ले और पेड़ों पर नजर आने वाले कौए आखिर अचानक कहां चले जाते हैं, यह सवाल आज भी लोगों के मन में बना हुआ है.

स्थानीय लोग इसे सतयुग से जुड़ी कथा मानते हैं. धार्मिक मान्यताओं, कुंडों की पवित्रता और 33 करोड़ देवी-देवताओं के निवास से जुड़ी कहानियां इस रहस्य को और भी दिलचस्प बना देती हैं. मलमास के दौरान यहां लगने वाला मेला भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन जाता है.

मलमास शुरू होते ही क्यों गायब हो जाते हैं कौए?
बिहार के नालंदा जिले में मौजूद राजगीर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, लेकिन मलमास के दौरान यहां होने वाली एक अनोखी घटना लोगों की जिज्ञासा बढ़ा देती है. मान्यता है कि पूरे अधिक मास में यहां एक भी कौआ नजर नहीं आता. स्थानीय पंडितों और बुजुर्गों के मुताबिक इसके पीछे सतयुग की एक कथा जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा वसु ने राजगीर के ब्रह्मकुंड परिसर में एक विशाल यज्ञ कराया था. इस यज्ञ में 33 करोड़ देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया गया, लेकिन भूलवश कौए को आमंत्रित नहीं किया गया. इसी बात से नाराज होकर कौए ने राजगीर छोड़ दिया. तभी से यह मान्यता चली आ रही है कि मलमास लगते ही कौए राजगीर से दूर चले जाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय लोग आज भी इस घटना को आस्था से जोड़कर देखते हैं.

राजगीर के कुंडों का रहस्य भी कम दिलचस्प नहीं
राजगीर सिर्फ कौओं के रहस्य के लिए ही नहीं, बल्कि यहां मौजूद पवित्र कुंडों के लिए भी काफी प्रसिद्ध है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी ने यहां 22 कुंड और 52 जलधाराओं का निर्माण करवाया था.

क्यों बनाए गए थे इतने कुंड?
कहा जाता है कि यज्ञ के दौरान देवी-देवताओं को स्नान करने में परेशानी हो रही थी. इसी वजह से अलग-अलग कुंड और जलधाराएं बनाई गईं ताकि सभी देवता आराम से स्नान कर सकें. वैभारगिरी पर्वत के आसपास मौजूद गर्म जलकुंड आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं. यहां का ब्रह्मकुंड सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है. इसे पाताल गंगा भी कहा जाता है. कुंड का पानी हमेशा गर्म रहता है, जिसे लेकर भी कई तरह की मान्यताएं प्रचलित हैं.

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मलमास मेले में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़
अधिक मास को भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है. यही वजह है कि राजगीर में हर मलमास पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है. इस दौरान बिहार ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. सुबह होते ही कुंडों के आसपास स्नान और पूजा करने वालों की भीड़ लग जाती है. कई लोग मानते हैं कि यहां स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. राजगीर के बाजारों में भी इस दौरान अलग ही रौनक देखने को मिलती है. धार्मिक वस्तुओं, प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रहती है.

आस्था और रहस्य का अनोखा संगम है राजगीर
भारत में धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी कहानियां हमेशा लोगों को आकर्षित करती रही हैं. राजगीर का यह रहस्य भी उन्हीं में से एक है. वैज्ञानिक तौर पर भले ही इसका कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया हो, लेकिन आस्था रखने वाले लोग इसे चमत्कार मानते हैं.

कई पर्यटक सिर्फ इस बात को देखने के लिए मलमास के दौरान राजगीर पहुंचते हैं कि क्या सच में वहां कौए नजर नहीं आते. वहीं स्थानीय लोग इसे सदियों पुरानी परंपरा और देवताओं के आशीर्वाद से जोड़कर देखते हैं. राजगीर की यही खासियत इसे बाकी धार्मिक स्थलों से अलग बनाती है. यहां इतिहास, पौराणिक कथाएं और लोकविश्वास एक साथ देखने को मिलते हैं.

राजगीर का यह रहस्य आज भी लोगों के लिए कौतूहल बना हुआ है. मलमास के दौरान कौओं का गायब होना, पवित्र कुंडों की मान्यताएं और देवी-देवताओं से जुड़ी कथाएं इस शहर को बेहद खास बना देती हैं. यही वजह है कि हर साल हजारों लोग यहां आस्था और रहस्य का अनुभव करने पहुंचते हैं.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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