बढ़ती महंगाई, छूटती जॉब, क्या आ रहा महासंकट? भारत की कुंडली से खतरे के संकेत

बढ़ती महंगाई, छूटती जॉब, क्या आ रहा महासंकट? भारत की कुंडली से खतरे के संकेत

ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध से विश्व में जो ऊर्जा और आर्थिक संकट पैदा हुआ है, उसका असर भारत समेत पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है. इसकी वजह से सोना, चांदी, गैस, पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ रहे हैं, महंगाई उछाल मार रही है. रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं, तो दूसरी ओर AI और मंदी की आशंका की वजह से लोगों को जॉब से हाथ धोना पड़ रहा है, दुनियाभर के शेयर मार्केट गोते लगा रहे हैं, निवेशकों के पैसे स्वाहा हो रहे हैं. इस समय पूरी दुनिया में जो हालात बन रहे हैं, वो लोगों के अंदर वित्तीय महासंकट का डर पैदा कर रहे हैं. इस स्थिति को भारत के संबंध में देखते हुए कानपुर की ज्योतिषाचार्या स्वाति सक्सेना ने जॉब और वित्तीय स्थिति को लेकर खतरे के संकेत दिए हैं.

शनि-राहु आर्थिक उन्नति पर लगाएंगे ‘ग्रहण’

6 जून से लेकर 25 फरवरी 2027 तक की बात करें तो भारत की कुंडली में जहां कर्म के देवता शनि पराक्रम भाव में विराजमान हैं, वर्तमान समय में शनि का गोचर गंडमूल नक्षत्र रेवती में हो रहा है, जो बुध का नक्षत्र है. इसका प्रभाव वाणिज्य और आर्थिक पक्ष पर होगा. भारत की कुंडली में मंगल की महादशा में राहु का अंतर चल रहा है, जो दर्शाता है कि आर्थिक उन्नति को लेकर ये समय संघर्ष का है. राहु के प्रभाव से परिस्थितियां अचानक से सामने आएंगी, जिसके लिए हम सभी को तैयार रहना चाहिए.

रक्षात्मक निर्णय आएंगे सामने, लेकिन ​दिख सकता ठहराव

हालांकि वर्तमान में प्रभावी रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं, जो समृद्धि और संपन्नता के रक्षक है. इस कारण से देश की आर्थिक स्थिति के लिए रक्षात्मक दृष्टि से कुछ निर्णय सामने आएंगे. इस गोचर के प्रभाव के चलते शीर्ष और सर्वोच्च पदों को छोड़कर बाकी सभी को ठहराव सा महसूस हो सकता है.

कानपुर की ज्योतिषाचार्या स्वाति सक्सेना.

अगले 6 महीनों में गति होगी धीमी

ज्योतिषाचार्या सक्सेना का कहना है कि मंगल का संबंध गति से है, जो वर्तमान गोचर के चलते ठहराव ले सकता है. गति धीमी हो सकती है, वहीं वर्तमान गोचर में अतिचारी बृहस्पति आने वाले 6 महीनों में व्यापार, शिक्षा, बैंकिंग, कानून व्यवस्था, खाद्य पदार्थ, प्रकृतिक खनीज पर अपना प्रभाव दिखाएगा, इसलिए यह साल गति में कुछ ठराव ला सकता है.

आम लोगों की आमदनी और जॉब पर संकट!

विश्व में जो हालात बने हुए हैं, उसको देखते हुए वर्तमान में शनि का गोचर आर्थिक उन्नती पर पूरा प्रभाव डाल रहा है क्योंकि आजाद भारत की कुंडली में शनि जनता के कारक चंद्रमा की राशि में विराजमान हैं, जो विपरीत परिस्थितियों को सीधे तौर पर आम जनता की आय और आर्थिक विकास से जोड़ रही है. इस वजह से भारत के लिए अच्छी स्थिति बनती नहीं दिख रही है. साथ में मंगल में राहु का अंतर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को बहुत तीव्रता से बढ़ाएगा, इस कारण से जॉब का जाना और मंदी जैसी स्थितियों का बनना स्वाभाविक है.

इन 3 महीनों में होंगे बड़े फेरबदल

शनि के प्रभाव के चलते खनिज पदार्थों, तेल, गैस, पेट्रोल संबंधी समस्याएं बढ़ेंगी और इनकी कीमतों में काफी इजाफा होगा. आजाद भारत की कुंडली में मंगल की महादशा इन प्रभावों को तीव्रता देगी, जिसका स्पष्ट प्रभाव हमें देखने को मिलेगा. अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में स्थितियों में बड़ा फेरबदल हो सकता है, जो विषमताएं बढ़ा सकता है.

कब बदलेंगे हालात?

इस सवाल पर ज्योतिषाचार्या सक्सेना का कहना है कि दिसंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच कुछ सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. बृहस्पति गोचर से सोना और चांदी को लेकर बड़े अनुपात में अंतर दिख सकता है. ये स्थितियां मार्च 2027 के बाद ही बदलती दिख रही है. हालांकि अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में सोने में तेजी देखने को मिल सकती है.

Source link

You May Have Missed