क्या सच में पति की मृत्यु के बाद महिला का चेहरा नहीं देखना चाहिए, जानें असली सच्चाई

क्या सच में पति की मृत्यु के बाद महिला का चेहरा नहीं देखना चाहिए, जानें असली सच्चाई

होमताजा खबरधर्म

क्या सच में पति की मृत्यु के बाद महिला का चेहरा नहीं देखना चाहिए, जानें सच्चाई

Last Updated:

Widow Superstitions Explained: क्या सच में पति की मृत्यु के बाद महिला का चेहरा नहीं देखना चाहिए? सदियों से चली आ रही इस मान्यता को लेकर समाज में तरह-तरह की बातें कही जाती हैं. कई लोग इसे अशुभ मानते हैं, तो कुछ इसे सिर्फ अंधविश्वास बताते हैं. लेकिन इस पर धार्मिक ग्रंथ क्या कहते हैं और परंपराओं की असली पृष्ठभूमि क्या है? जानें इस प्रचलित धारणा के पीछे की असली सच्चाई और इससे जुड़ी मान्यताओं की हकीकत…

Zoom

Widow Superstitions Explained: पति की मृत्यु के बाद महिला का चेहरा ना देखने जैसी बातें समाज में वर्षों से चली आ रही मान्यताओं और अंधविश्वासों का हिस्सा हैं. कई जगह इसे अशुभ माना जाता है, लेकिन धर्मग्रंथों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण में इसका कोई ठोस आधार नहीं मिलता. विशेषज्ञों के अनुसार शोक की स्थिति में महिला को सहारे और सम्मान की जरूरत होती है, ना कि भेदभाव की. बदलते समय के साथ लोग अब ऐसी रूढ़ियों को चुनौती दे रहे हैं और इसे सामाजिक कुरीति मान रहे हैं. आखिर क्या है इस परंपरा की असली सच्चाई और कैसे शुरू हुई यह मान्यता, जानिए इस खास रिपोर्ट में…

बाहरी दुनिया से संपर्क कम
पहले के समय में, अगर किसी परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती थी तो परिवार कई दिनों तक शोक मनाता था. उस दौरान, परिवार के सदस्य बाहरी दुनिया से बहुत कम संपर्क रखते थे. अन्य लोग भी उनसे दूर रहते थे ताकि उन्हें मानसिक शांति और व्यक्तिगत समय मिल सके. साथ ही उस समय माना जाता था कि पति की मृत्यु के बाद महिला का चेहरा नहीं देखना चाहिए क्योंकि यह उस व्यक्ति के लिए अपशगुन हो सकता है.

आज भी कई जगहों पर चल रही है यह प्रथा
पति की मृत्यु के बाद महिला का चेहरा ना देखने की प्रथा बहुत लंबे समय तक चली लेकिन आजकल शिक्षा और जागरूकता बढ़ने के साथ, कई लोगों ने ऐसे अंधविश्वासों पर विश्वास करना छोड़ दिया है. लेकिन आज भी कई जगहों पर ऐसी प्रथा चली आ रही है और लोग इन चीजों पर विश्वास भी करते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह मात्र एक अंधविश्वास है और इससे ज्यादा कुछ नहीं.

नहीं होते कोई भी शुभ काम
हिंदू धर्म में किसी के घर में बच्चे का जन्म या मृत्यु हो जाए तो दोनों की परिस्थिति में अशुद्धि मानी जाती है. कुछ क्षेत्रों में इस अवधि को सूतक कहा जाता है तो कुछ जगहों पर पातक. हालांकि दोनों में थोड़ा अंतर जरूर है. दरअसल सूतक को किसी के घर में जन्म बच्चे की अशुद्धि के लिए उपयोग किया जाता है तो वहीं किसी की मृत्यु की अशुद्धि को पातक कहते हैं. जब किसी घर में मृत्यु हो जाती है तो तब कहीं 11 तो कहीं 13 दिन तक, वहीं कुछ जगहों पर डेढ़ महीने तक घर में प्रवेश नहीं किया जाता. इस दौरान कोई पूजा-अर्चना नहीं होती.

चेहरा देखने से नहीं आता दुर्भाग्य
यह कहना सही नहीं है कि किसी का चेहरा देखने से दुर्भाग्य आता है. दुर्भाग्य और सौभाग्य किसी का चेहरा देखने से नहीं आता है. पति को खो चुकी महिला के जीवन में यह बहुत बड़ा दर्द होता है. ऐसे समय में उसे भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है. लेकिन कुछ पुरानी मान्यताओं के कारण उसे दूर रखना और उसका चेहरा ना देखने के लिए कहना उसके दुख को और भी बढ़ा सकता है. आज के दौर में लोगों में शिक्षा की वजह से जागरूकता बढ़ रही है तो ऐसे में अंधविश्वास भी खत्म होता जा रहा है.

मृत्यु हर इंसान का हिस्सा
मृत्यु हर इंसान के जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है. किसी व्यक्ति की मृत्यु को परिवार के लिए अपशगुन मानना ​​मानवता के विरुद्ध है. अच्छा और बुरा हमारे विचारों, कर्मों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, ना कि किसी के चेहरे के कारण. इसीलिए ऐसी गलत धारणाओं को दूर करना और दुख झेल रहे लोगों के साथ खड़ा होना बहुत जरूरी है. समाज को भी ऐसी महिलाओं के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए. यही करुणा, मानवता और प्रेम के सच्चे मूल्य हैं.

About the Author

authorimg

Parag SharmaChief Sub Editor

पराग शर्मा Hindi News18 Digital में Chief Sub Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्र, राशि और वास्तु से जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेद…और पढ़ें



Source link

You May Have Missed